58 साल पुराना वो युद्ध आज भी हर हिंदुस्तानी के सीने में किसी ज्वालामुखी की तरह दहकता है. वक्त हर घाव को भर देता है लेकिन चीनी धोखे के उस घाव को नहीं जो 1962 में हिंदुस्तान के विश्वास और आत्मसम्मान पर लगा था. इसीलिए हिंदुस्तान उसी दिन से अलर्ट हो गया था और वो चुस्ती 29 अगस्त की रात को भी दिखी जब चीन के 200 सैनिकों को पैंगॉन्ग त्सो झील के इलाके से हमारे जांबाजों ने मार भगाया. लेकिन हिंदुस्तान की तैयारी इससे कही आगे की है. भारत ने तय कर लिया है कि अबकी बार चीन को ऐसा सबक सिखाना है कि वो अपनी चौहद्दी में रहना सीख जाए. देखें ये रिपोर्ट.