वो 18 जनवरी 1927 का दिन था, जब लॉर्ड इरविन अपनी शाही बग्घी में सवार होकर विजय चौक आए. और फिर एक बहुत भव्य कार्यक्रम के दौरान सोने की चाबी से काउंसिल हाउस का दरवाजा खोला गया. कार्यक्रम के दौरान ये चाबी लॉर्ड इरविन को सर हरबर्ट बेकर ने सौंपी थी. तब का काउंसिल हाउस भारत के आजाद होने के बाद भारतीय लोकतंत्र के मंदिर में तब्दील हो गया.