सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में 25,753 शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्तियों को अवैध करार दिया है. यह फैसला 2016 में हुई भर्तियों से संबंधित है, जिन्हें नौ वर्ष बाद भी भर्ती घोटाले के कारण रद्द कर दिया गया है. इस फैसले से हजारों शिक्षक प्रभावित हुए हैं, जिनमें से कुछ का कहना है कि वे अनटेंटेड हैं और उनके खिलाफ कोई आरोप नहीं है.