आज हनुमान जयंती है इस मौके पर हम आपको ऐसे बाबा के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि वो हनुमान जी का ही अवतार थे. बाबा के मंदिर की इतनी मान्यता है कि यहां देशभर से नहीं बल्कि दुनियाभर से लोग आते हैं. यहां ऐप्पल के को-फाउंडर स्टीव जॉब्स से लेकर फेसबुक के फाउंडर मार्क जुकरबर्ग तक दर्शन करने के लिए आ चुके हैं. उनका कहना है कि यहां आकर उनकी परेशानियां दूर हो गईं. जानें कौन हैं नीम करौली बाबा और उन्हें क्यों कहा जाता है हनुमान जी का अवतार.
उत्तराखंड को देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है. उत्तराखंड के नैनीताल से 65 किलोमीटर दूर कैंची में नीम करौली नाम के एक बाबा का आश्रम है. इन बाबा का निधन 11 सितंबर 1973 को हुआ था, लेकिन बाबा की मान्यता इतनी ज्यादा है कि वहां आज भी लोग आते हैं.
वहां न केवल देश से बल्कि विदेशों से भी भक्त आते हैं. आश्रम पहाड़ी इलाके में देवदार के पेड़ों के बीच है. यहां पांच देवी-देवताओं के मंदिर हैं, जिनमें हनुमान जी का भी एक मंदिर है. बाबा के भक्तों का मानना है कि बाबा हनुमान जी के अवतार थे.
बाबा का जन्म उत्तर प्रदेश के ब्राह्मण परिवार में दुर्गा प्रसाद शर्मा के घर हुआ था. बचपन में बाबा का नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा था. कहा जाता है कि बाबा एक बार बस में बिना टिकट सफर कर रहे थे तो टीसी ने ट्रेन रुकवाकर नीम करौली गांव में उन्हें बस से उतार दिया, इसके बाद बहुत बार कोशिश करने पर भी ट्रेन नहीं चल पाई. इसके बाद किसी व्यक्ति ने उन्हें बाबा को फिर से बस में बैठाने के लिए कहा. बताया जाता है कि इसके बाद बस स्टार्ट हो गई.
साल 2015 में पीएम नरेंद्र मोदी ने अमेरिका में फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग से मुलाकात की थी इस दौरान मार्क ने बताया कि वो भारत में एक मंदिर गए थे.
मार्क ने बताया कि इस मंदिर में जाने के लिए उन्हें ऐप्पल के को- फाउंडर स्टीव जॉब्स ने कहा
था. हालांकि मार्क ने मंदिर का नाम नहीं बताया, लेकिन खबरों के मुताबिक यह
मंदिर नीम करौली बाबा का ही मंदिर था.
मार्क से पहले स्टीव जॉब्स भी इस मंदिर में दर्शन के लिए आ चुके थे. स्टीव
1974 में इस मंदिर में आए थे. स्टीव अपने दोस्त के साथ यहां पहुंचे थे.
खबरों की मानें तो स्टीव यहा संन्यास लेने के उद्देश्य से आए थे और नीम
करौली बाबा से मिलना चाहते थे, लेकिन उनके पहुंचने के कुछ समय पहले ही बाबा
का देहांत हो चुका था. स्टीव ने कुछ दिनों तक यहां ध्यान आराधना की. इसके
बाद स्टीव को प्रेरणा मिली कि संन्यास लेने की जगह उन्हें नई कंपनी बनानी
चाहिए.
इसके बाद साल 2004 में मार्क जुकरबर्ग की कंपनी फेसबुक परेशानियों के दौर से गुजर रही थी और इसके बिकने की नौबत आ चुकी थी. इस समय जॉब्स ने मार्क की मदद की और उन्हें भारत आकर नीम करौली मंदिर में समय बिताने के लिए कहा. कहा जाता है कि मार्क यहां एक दिन के लिए ही आए थे, लेकिन खराब मौसम के चलते उन्हें दो दिन यहां रुकना पड़ा था.
पीएम मोदी से बातचीत में मार्क ने बताया था कि जब वे इस कन्फ्यूजन में थे कि फेसबुक को बेचा जाए या नहीं, तब स्टीव जॉब्स ने उन्हें भारत के एक मंदिर में जाने को कहा था, वहीं से उन्हें कंपनी के लिए नया मिशन मिला. मार्क ने बताया था कि वो एक महीना भारत में रहे थे और इसी दौरान उस मंदिर में भी गए थे.
हॉलीवुड अभिनेत्री जूलिया रॉबर्ट्स भी इस मंदिर में आ चुकी हैं. हालांकि वो कब आईं थी इस बात की जानकारी नहीं है.