पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न प्रणब मुखर्जी का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया है. भारतीय राजनीति में छह दशकों का लंबा सफर तय करने वाले प्रणब मुखर्जी ने राजधानी दिल्ली के सैन्य अस्पताल में अंतिम सांस ली. कुछ दिन पूर्व ही ब्रेन सर्जरी के लिए उन्हें दिल्ली के सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया था. सर्जरी के बाद से ही वे वेंटिलेटर पर थे. प्रणब कोरोना पॉजिटिव भी पाए गए थे. वे 84 वर्ष के थे. तस्वीरों में देखते हैं प्रणब मुखर्जी का सफर....
प्रणब मुखर्जी स्वतंत्रता सेनानी कामदा किंकर मुखर्जी और राजलक्ष्मी के पुत्र थे. पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में छोटे से गांव मिराती में, 11 दिसंबर, 1935 को उनका जन्म हुआ. उनके पिता कांग्रेस नेता के रूप में स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के कारण कई बार जेल गए. कामदा किंकर अखिल भारतीय कांग्रेस समिति और पश्चिम बंगाल विधान परिषद के सदस्य और जिला कांग्रेस समिति, बीरभूम (पश्चिम बंगाल) के अध्यक्ष रहे.
उनका विवाह रवींद्र संगीत की निष्णात गायिका और कलाकार शुभ्रा मुखर्जी से हुआ था. शुभ्रा मुखर्जी का 18 अगस्त 2015 को निधन हो गया था. उनके दो पुत्र अभिजीत मुखर्जी, इंद्रजीत मुखर्जी और एक पुत्री शर्मिष्ठा मुखर्जी हैं. अभिजीत मुखर्जी दो बार लोकसभा सांसद रहे हैं जबकि शर्मिष्ठा कांग्रेस की ओर से विधानसभा चुनाव लड़ चुकी हैं.
प्रणब दा ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गृहजिले बीरभूम में ही की. बाद में वे कोलकाता चले गए और वहां से उन्होंने राजनीति शास्त्र और इतिहास विषय में एम.ए. किया. उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय से एल.एल.बी. की डिग्री भी हासिल की.
(फोटो: अपने परिवार के साथ प्रणब मुखर्जी)
उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत इंदिरा गांधी के दौर में हुई थी. वे कांग्रेस के टिकट पर राज्यसभा के लिए चुने गए. 1973 में वे केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल कर लिए गए और उन्हें औद्योगिक विकास विभाग में उपमंत्री की जिम्मेदारी दी गई.
1980 में वे राज्यसभा में कांग्रेस के नेता बनाए गए. इस दौरान मुखर्जी को सबसे शक्तिशाली कैबिनेट मंत्री माना जाने लगा. प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति में वे ही कैबिनेट की बैठकों की अध्यक्षता करते थे. प्रणब मुखर्जी इंदिरा गांधी की कैबिनेट में वित्त मंत्री थे.
(इंदिरा गांधी के साथ प्रणब मुखर्जी)
1984 में यूरोमनी मैगजीन ने प्रणब मुखर्जी को दुनिया के सबसे बेहतरीन वित्त मंत्री के तौर पर सम्मानित किया था.
(फोटो: अपने दफ्तर में प्रणब मुखर्जी)
1984 में राजीव कैबिनेट में जगह नहीं मिलने से दुखी होकर प्रणब मुखर्जी ने कांग्रेस छोड़ दी और अपनी अलग पार्टी बनाई. प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस पार्टी का गठन किया, लेकिन ये पार्टी कोई खास असर नहीं दिखा सकी.
(इंदिरा गांधी के साथ प्रणब मुखर्जी)
1989 में राजीव गांधी से विवाद का निपटारा होने के बाद उन्होंने अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया.
(कांग्रेस पार्टी की एक बैठक के दौरान प्रणब मुखर्जी)
साल 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने तो प्रणब मुखर्जी का कद बढ़ा.
(पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के साथ प्रणब मुखर्जी)
1998 में कांग्रेस की कमान सोनिया गांधी ने संभाली तो प्रणब मुखर्जी उनके साथ मजबूती से खड़े रहे.
साल 2004 में कांग्रेस की सत्ता में वापसी हुई. इस दौरान प्रणब मुखर्जी ने वित्त से लेकर विदेश मंत्रालय तक का कार्यभार संभाला और पार्टी के संकट मोचक की भूमिका में रहे.
(2001 में कोलकाता में एक रैली के दौरान ममता बनर्जी के साथ प्रणब मुखर्जी)
विश्व बैंक तथा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के लिए जर्नल ऑफ रिकॉर्ड, ‘एमर्जिंग मार्केट्स’ द्वारा उन्हें 2010 में एशिया के लिए ‘वर्ष का वित्त मंत्री’ घोषित किया गया.
(मनमोहन सिंह के साथ प्रणब मुखर्जी)
प्रणब मुखर्जी के कार्यकाल के दौरान ही साल 2010 में देश की जीडीपी ग्रोथ 8.50 फीसदी दर्ज की गई थी, जो साल 2000 से 2020 के दौरान सबसे अधिक है.
(2009 में वित्त मंत्री की शपथ लेते प्रणब मुखर्जी)
अपने सरल स्वभाव के कारण विपक्षी पार्टी में भी उनका बराबर सम्मान था.
(अपने घर मिराती में अपने परिवार के साथ)
2012 में कांग्रेस ने उन्हें राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया और वो देश के 13वें राष्ट्रपति चुने गए.