कर्नाटक के बीजेपी अध्यक्ष नलिन कुमार कतील के टीपू सुल्तान पर दिए गए बयान पर विवाद खड़ा हो गया है. इसको लेकर अब AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने भी पीएम मोदी और बीजेपी पर निशाना साधा है. साथ ही उन्होंने बीजेपी को चुनौती दी और कहा कि अगर मैं टीपू का नाम लूंगा तो क्या मुझे भी मिटा देंगे. उन्होंने बीजेपी अध्यक्ष के बयान को नरसंहार के लिए उकसाने वाला बताया.
दरअसल, बीजेपी अध्यक्ष के बयान पर पलटवार करते हुए ओवैसी ने कहा कि कर्नाटक बीजेपी के अध्यक्ष नलिन कुमार कतील कह रहे हैं कि जो टीपू का नाम लेगा, उसे मिटा दिया जाएगा. मैं टीपू सुल्तान का नाम ले रहा हूं. क्या करोगे तुम लोग? मुझे मारोगे क्या? क्या तुम मुझे मिटा दोगे अगर मैं टीपू का नाम लूंगा तो? बोलो कहां आना है कर्नाटक में. पीएम मोदी सहमत हैं इन भाषाओं से? यह तो OPEN CALL है MURDER/GENOCIDE के लिए. अब क्या इसपर भी मोदी चुप रहेंगे. कोई कार्रवाई करेंगे अपने कर्नाटक अध्यक्ष पर.
बता दें कि कतील मंगलवार को कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे. यहां जल्द ही चुनाव होने वाले हैं. इस दौरान कतील ने कहा कि हम भगवान राम और हनुमान के भक्त हैं. हम टीपू सुल्तान की संतान नहीं हैं. इस दौरान कर्नाटक बीजेपी चीफ ने उत्साही भीड़ से कहा कि मैं यालबुर्गा के लोगों से पूछना चाहता हूं - क्या आप हनुमान की पूजा करते हैं या टीपू सुल्तान की प्रशंसा करते हैं.
उन्होंने आगे कहा कि क्या आप टीपू की प्रशंसा करने वालों को खदेड़कर जंगलों की ओर नहीं भगाएंगे? जो लोग टीपू का समर्थन करते हैं, उन्हें इस भूमि पर नहीं रहना चाहिए. सिर्फ वही रहें, जो भगवान राम और हनुमान जी के भक्त हैं.
कर्नाटक बीजेपी चीफ ने कांग्रेस पर साधा था निशाना
कर्नाटक बीजेपी चीफ कतील ने कांग्रेस नेता पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि उन्हें दो कुकरों से लगाव है - एक बेलगावी कुकर और दूसरा मंगलुरु कुकर. कतील आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक एक कांग्रेस नेता द्वारा कथित रूप से बेलगावी में कुकर मुफ्त वितरण का जिक्र कर रहे थे. कतील ने कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर तंज कसा और उन्हें बादामी से चुनाव लड़ने की चुनौती दी, जहां कांग्रेस नेता ने 2018 के विधानसभा चुनाव में बहुत कम अंतर से जीत हासिल की थी. कतील ने कहा कि आप एक ऐसे नेता हैं, जिन्होंने पांच साल तक शासन किया. आप खुद को कांग्रेस के जननेता कहते हैं. जननेता के पास चुनाव लड़ने के लिए क्षेत्र क्यों नहीं है?