
राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत पांच राज्यों का चुनावी शोर नतीजों के बाद नजरें अब लोकसभा चुनाव पर हैं. हिंदी पट्टी के तीनों राज्यों में चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद अब विपक्षी इंडिया गठबंधन के भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं. सवाल केवल कांग्रेस की हार नहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के इंडिया गठबंधन की बैठक बुलाने और अखिलेश यादव समेत कई दिग्गज नेताओं के बैठक में शामिल होने से इनकार की वजह से भी उठ रहे हैं. मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव नतीजों के तुरंत बाद 6 दिसंबर को इंडिया गठबधन की बैठक बुलाई थी.
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की प्रमुख ममता बनर्जी, बिहार के मुख्यमंत्री और विपक्षी एकजुटता की कवायद के अगुवा नीतीश कुमार, झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) प्रमुख और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों का हवाला देते हुए इस बैठक से किनारा कर लिया. एक के बाद एक नेताओं के इनकार से ये बैठक खटाई में पड़ गई. खड़गे ने अब 16 दिसंबर को बैठक बुलाई है और इसमें सभी नेता शामिल हों, इसके लिए सभी को तैयार करने की जिम्मेदारी बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को दी गई है.
दरअसल, मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने सपा को एक भी सीट नहीं दी थी, वह भी नहीं जहां से 2018 में अखिलेश की पार्टी के उम्मीदवार को जीत मिली थी. अखिलेश और कांग्रेस की तल्खी जगजाहिर रही तो वहीं ममता बनर्जी ने भी चुनावी राज्यों में क्षेत्रीय दलों को लेकर ग्रैंड ओल्ड पार्टी के रवैये पर सवाल उठाए थे. जनता दल यूनाइटेड के नेता नीतीश कुमार ने भी राज्यों के चुनाव की वजह से इंडिया गठबंधन का कोई कार्यक्रम नहीं होने को लेकर नाराजगी जताई थी. अब सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बड़ी लकीर खींच दी है.
अखिलेश यादव ने साफ संदेश दे दिया है कि अब इंडिया गठबंधन में पहले सीट बंटवारा होगा और इसके बाद आगे की बात होगी. उन्होंने ये भी कहा है कि इंडिया गठबंधन के पहले जो बात तय हुई थी कि जो जहां मजबूत होगा वो वहां नेतृत्व करेगा और दूसरी पार्टियां वहां उसकी सहयोग करेंगी. इंडिया गठबंधन को इसी फॉर्मूले पर आगे बढ़ना होगा. अखिलेश इंडिया गठबंधन से एग्जिट की बात नहीं कर रहे लेकिन साथ ही संकेत ये भी साफ दे रहे हैं कि बात अब हमारी शर्तों पर ही होगी. अब सवाल ये भी उठ रहे हैं कि क्या कांग्रेस अखिलेश यादव की इस शर्त पर राजी होगी?
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अखिलेश के ताजा बयान को लेकर यूपी कांग्रेस के प्रवक्ता अंशु अवस्थी ने कहा कि इंडिया गठबंधन का गठन इस देश के लोकतंत्र की संप्रभुता, लोगों की आजादी की रक्षा करने के लिए हुआ है. समाजवादी पार्टी हो या दूसरे राजनीतिक दल, सबको अपने सियासी स्वार्थ से ऊपर उठकर आगे आना होगा. उन्होंने आगे कहा कि जहां तक सीट बंटवारे का सवाल है तो उसे लेकर इंडिया गठबंधन की कोऑर्डिनेशन कमेटी विस्तार से चर्चा कर रही है. एक-एक पॉइंट पर बात हो रही है. कोऑर्डिनेशन कमेटी में सपा के प्रतिनिधि हैं, दूसरे दलों के नेता भी हैं. सभी आपस में बातचीत कर जल्द ही किसी नतीजे पर पहुंच जाएंगे. लोकसभा चुनाव में अब अधिक समय नहीं बचा है इसलिए गठबंधन के सभी सहयोगी दल तेजी से काम कर रहे हैं.
वहीं, जानकार इसे मध्य प्रदेश चुनाव जैसी स्थिति दोबारा न बने, इसे लेकर अखिलेश की रणनीति बता रहे हैं. अखिलेश यादव ने मध्य प्रदेश चुनाव के नतीजों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ये भी कहा था कि हमने छह सीट की बात की थी लेकिन उनकी (कांग्रेस की) परिस्थितियां अलग थीं. भविष्य में ऐसा नहीं होगा. सपा प्रमुख की ताजा शर्त को उनके इस बयान से जोड़कर भी देखा जा रहा है.
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वरिष्ठ पत्रकार डॉक्टर श्रीराम त्रिपाठी ने कहा कि दूध का जला छांछ भी फूंक-फूंककर पीता है. मध्य प्रदेश के चुनाव में जिस तरह की परिस्थितियां बनीं, वजह चाहे जो रही हो लेकिन उन परिस्थितियों ने क्षेत्रीय दलों में कांग्रेस को लेकर एक तरह से अविश्वास को जन्म दिया है. सपा के साथ बाकी पार्टियां भी अब ये यकीन करने को तैयार नहीं हैं कि गठबंधन कर लें और सीट बंटवारे पर तो कभी भी बात हो जाएगी. कांग्रेस के पास मध्य प्रदेश, राजस्थान जैसे राज्यों में इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों को कुछ सीटें देकर भविष्य के लिए उदाहरण सेट करने का मौका था जिसे उसने गंवा दिया है.
क्या सीट बंटवारे तक दूरी बनाए रखना चाहते हैं अखिलेश?
कहा तो ये भी जा रहा है कि अखिलेश यादव सीट बंटवारे को लेकर बात फाइनल होने तक कांग्रेस के साथ दूरी बनाए रखना चाहते हैं. इसके पीछे वजह मध्य प्रदेश चुनाव के दौरान खुलकर सामने आई दोनों दलों की तल्खी को बताया जा रहा है. सपा और कांग्रेस अगर साथ-साथ नजर आते हैं और मध्य प्रदेश जैसे हालात बनते हैं तो सपा को ये आशंका है कि उसे नुकसान हो सकता है. सपा लोकसभा चुनाव में किसी अगर-मगर जैसे हालात के साथ नहीं उतरना चाहती और यही वजह है कि पार्टी तब तक कांग्रेस के साथ खड़े होने से परहेज करना चाहती है जब तक सीटों पर बात फाइनल नहीं हो जाती.