बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने रविवार को नीति आयोग की बैठक में शामिल नहीं होने को लेकर विपक्षी दलों पर निशाना साधा.उन्होंने आरोप लगाया कि नीति आयोग का मंच सकारात्मक चर्चा, प्रतिक्रिया और नीति-निर्माण के लिए है लेकिन विपक्षी दलों वाले राज्यों ने इसे राजनीति का मंच बना दिया है. दरअसल, इंडिया गठबंधन का प्रतिनिधित्व करने वाले कई मुख्यमंत्रियों ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई नीति आयोग की बैठक में भाग नहीं लिया था.
इन राज्यों ने बैठक में नहीं लिया था हिस्सा
नीति आयोग की बैठक में शामिल नहीं होने वाले राज्यों में कांग्रेस शासित कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना के मुख्यमंत्री शामिल थे. इसके अलावा तमिलनाडु, पंजाब और केरल के मुख्यमंत्री भी इस बैठक से दूर रहे. ठाकुर ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल गंदी राजनीति खेलने के लिए नीति आयोग के मंच का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं.
अनुराग ठाकुर ने विपक्षी दलों को घेरा
अनुराग ठाकुर ने कहा, 'हम विपक्ष में थे तो उस समय योजना आयोग था. हमारे मुख्यमंत्री जाते थे और अपने मुद्दे सामने रखते थे. क्या राज्यों के चुने हुए प्रतिनिधि सिर्फ राजनीति करने के लिए खुद को इस व्यवस्था से दूर रखना चाहते हैं?'उन्होंने कहा, हमने पिछले कुछ वर्षों में संसद में भी ऐसा ही देखा है. विपक्ष संसद में भी केवल हंगामा करने के लिए आता है.
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पंजाब के सीएम को दिया जवाब
पंजाब के सीएम भगवंत मान ने बजट में राज्य को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया था.इसका जवाब देते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह एक केंद्रीय बजट है. इसमें प्रत्येक राज्य के अनुसार विवरण नहीं दिया गया है. विपक्षी दलों के आरोप को खारिज करते हुए ठाकुर ने कहा कि बजट में किसी भी राज्य के साथ कोई भेदभाव नहीं किया गया है.
कोचिंग हादसे पर आप को घेरा
दिल्ली में कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में पानी भर जाने से तीन छात्रों की मौत पर ठाकुर ने आप सरकार की आलोचना करते हुए पूछा कि क्या यह अरविंद केजरीवाल मॉडल है.उन्होंने कहा कि उन परिवारों से पूछें जिन्होंने अपने बच्चों को खोया है. उन पर क्या गुजर रही है. न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर एक सवाल का जवाब देते हुए ठाकुर ने कहा कि यह नरेंद्र मोदी सरकार थी जिसने स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू की.उन्होंने कहा कि पिछले 10 साल के यूपीए शासन के दौरान एमएसपी पर खरीद 5.50 लाख करोड़ रुपये थी, जबकि एनडीए शासन के दौरान यह 18.40 लाख करोड़ रुपये है.