लगातार दो बार दिल्ली जीतने के बाद पंजाब विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत हासिल करने वाली आम आदमी पार्टी अब अपना विस्तार कर रही है. गुजरात और हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी मजबूती से ताल ठोक रही है. पार्टी के बढ़ते कद के बीच अब राष्ट्रीय राजनीति में आम आदमी पार्टी की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं जोर पकड़ने लगी हैं.
एक तरफ कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को परास्त करने की प्लानिंग कर रहा है तो दूसरी तरफ केजरीवाल ने भी अपना एजेंडा स्पष्ट कर दिया है. केजरीवाल ने कह दिया है कि वो गठबंधन करके किसी पार्टी को हराना नहीं चाहते, बल्कि 130 करोड़ देशवासियों के साथ गठबंधन कर देश को जिताना चाहते हैं. केजरीवाल के इस बयान से कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या उन्होंने विपक्षी एकजुटता के प्रयास को झटका देते हुए बड़ी राजनीतिक लकीर खींच दी है?
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल लगातार देश के अन्य राज्यों के दौरे कर रहे हैं. रविवार को वो महाराष्ट्र के नागपुर में थे. एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के रोल पर अपनी बात रखी.
गठबंधन को लेकर केजरीवाल का बयान
केजरीवाल ने कहा, ''काफी लोग मुझसे पूछते हैं कि हम राष्ट्रीय स्तर पर किसके साथ गठबंधन करेंगे. मेरे को राजनीति करनी नहीं आती. किसी को हराने के लिए 10-20 पार्टियों के गठबंधन की बात मुझे समझ नहीं आती. मैं किसी को हराना नहीं चाहता, मैं चाहता हूं कि देश जीते. मैं सिर्फ देश के 130 करोड़ लोगों के साथ गठबंधन करूंगा ताकि भारत को दुनिया में नंबर वन बनाया जा सके.''
विपक्षी एकजुटता को दिया झटका?
अरविंद केजरीवाल के इस बयान को विपक्षी एकजुटता को झटके के तौर पर भी देखा जा रहा है. दरअसल, जब से केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार आई है बीजेपी का विजयी रथ हर गुजरते चुनाव के साथ आगे बढ़ता जा रहा है. 2014 के बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को और ज्यादा प्रचंड बहुमत हासिल हुआ था. साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रूप में बीजेपी के पास वो चेहरा भी है, जिसकी काट अभी तक विपक्ष नहीं निकाल पाया है.
राष्ट्रीय पार्टी के नाते कांग्रेस के ऊपर बीजेपी से लड़ाई का सबसे बड़ा जिम्मा जरूर है लेकिन राहुल गांधी हों या प्रियंका गांधी, चुनावी राजनीति में दोनों ही चेहरे लगातार फीके नजर आए हैं.
दूसरी तरफ, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने बीजेपी को करारी शिकस्त देकर अपनी प्रबल दावेदारी ठोक रखी है. इसी मिशन के तहत ममता बनर्जी विपक्षी दलों को एकजुट रखने की कोशिशें भी कर रही हैं. वो लगातार एनसीपी प्रमुख शरद पवार से मुलाकात करती हैं, सपा प्रमुख अखिलेश यादव के लिए चुनाव प्रचार किया, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव से लगातार संपर्क में रहती हैं. लेकिन ममता बनर्जी की ताकत को देखा जाए तो उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस अभी सिर्फ पश्चिम बंगाल तक ही सीमित है. जबकि आम आदमी पार्टी का दायरा दो राज्यों तक बढ़ गया है.
दो राज्यों में सरकार वाली इकलौती क्षेत्रीय पार्टी
बीजेपी और कांग्रेस को छोड़ दिया जाए तो आम आदमी पार्टी एकमात्र दल है, जिसकी सरकार अब दो राज्यों में हो गई है. अन्ना आंदोलन से निकली इस नई नवेली पार्टी ने दिल्ली के दो चुनावों में एकतरफा जीत हासिल की तो हाल ही में पंजाब विधानसभा चुनाव को भी लगभग क्लीन स्वीप करते हुए जीता. इस जीत ने पार्टी का मनोबल आसमान पर पहुंचा दिया है. यही वजह है कि केजरीवाल अब गुजरात और हिमाचल जैसे राज्यों में मजबूती से ताल ठोक रहे हैं और देश की राजनीति पर भी उनकी नजर है.
नागपुर के कार्यक्रम में भी केजरीवाल ने अपने बयान अपनी मंशा जाहिर कर दी है. बीजेपी का नाम लिए बिना केजरीवाल ने कहा है कि एक बड़ी पार्टी है जो गुंडागर्दी का समर्थन कर रही है, दंगे प्लान कर रही है और बलात्कारियों के स्वागत कर रही है. केजरीवाल ने कहा कि ''देश ऐसी गुंडागर्दी से नहीं चल सकता. अगर आप तरक्की, स्कूल और अस्पताल चाहते हैं तो मेरे साथ आइए.''
केजरीवाल ने 130 करोड़ देशवासियों से गठबंधन का आह्वान करते हुए कहा कि भारत को जल्द से जल्द दुनिया का नंबर वन देश बनना चाहिए और वह इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाना चाहते हैं.
माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने ताजा बयान से एक तरफ जहां 2024 के चुनाव में खुद को विपक्षी एकजुटता से अलग दिखाने का प्रयास किया है, वहीं आम आदमी पार्टी के काम को आगे रखते हुए देश के सामने एक विकल्प रखने का काम भी किया है.