2019 के लोकसभा चुनावों में भारी बहुमत से जीत के बाद भाजपा का देश भर में विधानसभा चुनावों में वोट शेयर धीरे-धीरे कम होता गया है. 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की बड़ी जीत हुई थी. पार्टी ने कुल वोटिंग का 37.70% वोट हासिल करके अपने प्रतिद्वंद्वियों पर महत्वपूर्ण बढ़त बनाई. हालांकि, उसके बाद से विधानसभा चुनाव परिणामों में एक अलग ही तस्वीर सामने आई.
2019 के बाद से 25 विधानसभा चुनाव हुए हैं, जिनमें चार राज्य-ओडिशा, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम शामिल हैं, जहां 2019 के लोकसभा चुनावों के साथ मतदान हुआ था. 2019 के बाद से हुए 25 विधानसभा चुनावों में से केवल दो राज्य, मणिपुर और मेघालय भाजपा के लिए मामूली सकारात्मक रहे. नागालैंड (2023) और पुडुचेरी (2021) में दो विधानसभा चुनावों में भाजपा ने अपने गठबंधन सहयोगी का समर्थन किया.
लोकसभा 2019 बनाम विधानसभा
ओडिशा 2019 (लोकसभा के साथ)
38.88%
32.49%
-6.39%
आंध्र प्रदेश 2019 (लोकसभा के साथ)
0.97%
0.84%
-0.13%
अरुणाचल प्रदेश 2019 (लोकसभा के साथ)
58.89%
50.86%
-8.03%
सिक्किम 2019 (लोकसभा के साथ)
4.74%
1.62%
-3.12%
महाराष्ट्र (अक्टूबर 2019).
27.83%
25.75%
-2.08%
हरियाणा (अक्टूबर 2019)
58.20%
36.49%
-21.71%
झारखंड दिसंबर 2019
51.60%
33.37%
-18.23%
दिल्ली (फरवरी 2020)
56.85%
38.51%
-18.34%
बिहार (नवंबर 2020)
24.05%
19.46%
-4.59%
असम 2021
36.41%
33.21%
-3.20%
तमिलनाडु 2021
3.62%
2.62%
-1.0%
पश्चिम बंगाल (मई 2021)
40.64%
37.97%
-2.67%
केरल 2021
12.99%
11.3%
-1.69%
पुडुचेरी 2021
AINRC सपोर्टेड
गोवा 2022
51.93%
33.31%
-18.62%
गुजरात 2022
63.07%
52.50%
-10.57%
हिमाचल प्रदेश 2022
69.70%
43%
-26.70%
उत्तर प्रदेश 2022
49.97%
41.29%
-8.68%
उत्तराखंड 2022
61.66%
44.33%
-17.33%
पंजाब 2022
9.73%
6.6%
-3.13%
मणिपुर 2022
34.32%
37.83%
+3.51%
त्रिपुरा 2023
49.56%
38.97%
-10.59%
नागालैंड 2023
एनडीपीपी का समर्थन किया
मेघालय 2023
7.99%
9.17%
+1.18%
कर्नाटक 2023
51.74%
36%
-15.74%
औसत
-8.99%
यह गिरावट कई विधानसभा चुनावों में देखी जा सकती है. उदाहरण के लिए, महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड, जो 2019 के लोकसभा चुनावों के बाद चुनाव में जाने वाले पहले राज्य थे, वहां भाजपा के वोट शेयर में गिरावट देखी गई.
वोट शेयर में गिरावट
इसके अलावा, पार्टी को महाराष्ट्र और हरियाणा में भारी झटका लगा, जहां उसका प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा. महाराष्ट्र में मजबूत अभियान चलाने के बावजूद भाजपा का वोट शेयर 2019 के आम चुनावों में 27.83% से गिरकर विधानसभा चुनावों में 25.75% हो गया. इसी तरह की प्रवृत्ति हरियाणा में देखी गई, जहां विधानसभा चुनावों में भाजपा का वोट शेयर 58.20% से घटकर 36.49% हो गया.
झारखंड में पार्टी सत्ता बरकरार रखने में विफल रही और उसका वोट शेयर लोकसभा में 51.60% से गिरकर विधानसभा चुनाव में 33.37% हो गया. दिल्ली और बिहार में 2020 के चुनावों ने भी इसी तरह का संकेत मिला, जिसमें भाजपा के वोट शेयर में महत्वपूर्ण गिरावट देखी गई. लोकसभा चुनाव की तुलना में दिल्ली में विधानसभा में 18.34% और बिहार में 4.59% की गिरावट देखी गई.
2021 में पांच विधानसभा चुनाव ऐसे हुए जहां भाजपा को 2019 के लोकसभा चुनावों की तुलना में कम वोट शेयर मिले. इसी तरह 2022 में हुए सात विधानसभा चुनावों में मणिपुर को छोड़कर, जहां पार्टी सकारात्मक मूड में थी, भाजपा का वोट शेयर लोकसभा 2019 चुनावों की तुलना में कम था. और अंत में 2023 में अब तक चार विधानसभा चुनाव हुए हैं, जहां भाजपा ने 2019 के आम चुनाव की तुलना में विधानसभाओं में कम वोट शेयर मिला.
ऐसा लगता है कि जहां 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा की शानदार जीत ने राष्ट्रीय राजनीति में एक प्रमुख पार्टी के रूप में अपनी स्थिति दर्ज कराई, वहीं बाद के विधानसभा चुनावों में कम वोट शेयर राज्य स्तर पर उस सफलता को दोहराने के लिए पार्टी को संघर्ष करते हुए देखा गया.