वाराणसी में ज्ञानवापी से लेकर मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि तक विवाद जारी है. हालांकि, बीजेपी ज्ञानवापी और मथुरा जैसे मुद्दों से दूरी बनाती हुई नजर आ रही है. बीजेपी ने यह संकेत दिया है कि ये मुद्दे राम मंदिर मुद्दे से अलग हैं, जिसके लिए बीजेपी ने 1989 में पार्टी के अधिवेशन में प्रस्ताव पारित किया था.
बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सोमवार को संकेत दिया कि भारतीय जनता पार्टी वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि को वापस लेने के लिए चल रहे संघर्ष में सीधे नहीं उतरना चाहती.
ये मुद्दे कोर्ट-संविधान से तय होते हैं- जेपी नड्डा
आज तक के सवाल के जवाब में जेपी नड्डा ने कहा, ये मुद्दे भारत के संविधान और कोर्ट द्वारा तय होते हैं. बीजेपी सिर्फ इनका पालन करती है. जब उनसे पूछा गया कि क्या मथुरा और काशी में मंदिर अयोध्या मुद्दे की तरह बीजेपी के एजेंडे में शामिल है. इस पर नड्डा ने कहा, इन तीनों मुद्दों में अंतर है. नड्डा ने कहा, बीजेपी ने अपने पालमपुर अधिवेशन के दौरान राम मंदिर मुद्दे पर प्रस्ताव पास किया था. इसके बाद बीजेपी में कोई प्रस्ताव पास नहीं हुआ.
नड्डा बीजेपी के 1989 में पालमपुर में हुए अधिवेशन का जिक्र कर रहे थे. यहां बीजेपी ने प्रस्ताव पारित कर अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए अभियान में शामिल होने की नींव रखी थी. इसके बाद 26 सितंबर 1990 को बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने गुजरात के सोमनाथ से राम मंदिर के लिए रथ यात्रा शुरू की थी.
समान नागरिक संहिता पर कही ये बात?
नड्डा पीएम मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की 8 साल की उपलब्धियों के बारे में जानकारी दे रहे थे. इस दौरान उन्होंने यह बताया कि पुष्कर धामी के नेतृत्व वाली उत्तराखंड सरकार ने समान नागरिक संहिता के लिए एक कमेटी का गठन किया है. हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि उनकी पार्टी हमेशा सभी के लिए न्याय के मूल सिद्धांत और संविधान में निहित किसी का तुष्टीकरण न हो, इस नीति से काम करती है. नड्डा ने एक सवाल के जवाब में कहा कि हिमाचल में भी इस पर चर्चा चल रही है. हम इसे लेकर बिल्कुल स्पष्ट हैं कि सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए
बीजेपी से अलग संघ का एजेंडा!
जहां बीजेपी ने सोमवार को संकेत दिए कि वह ज्ञानवापी और कृष्ण जन्मभूमि मुद्दे पर दूरी बना रही है. वहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ लगातार हिंदू संगठनों द्वारा किए गए दावों का समर्थन कर रहा है कि मथुरा और वाराणसी दोनों जगहों पर मुस्लिम शासकों ने हिंदू मंदिरों को तोड़ा.
विश्व हिंदू परिषद के चीफ आलोक कुमार ने शुक्रवार को दावा किया कि हिंदू पक्ष ये साबित करेगा कि ज्ञानवापी में मिला शिवलिंग 12 ज्योर्तिलिंग में से एक है. उन्होंने आगे कहा था, "हमारी मान्यता है कि मस्जिद में मिला पत्थर शिवलिंग है, क्योंकि नंदी इसे देख रही है. जैसा हर शिव मंदिर में होता है. उन्होंने दावा किया कि ज्ञानवापी का वजूखाना मंदिर को तोड़कर उसके ऊपर बनाया गया. यह सब मुगल शासक औरंगजेब के आदेश पर हुआ.