
चुनावी साल में राजनीतिक दल अपने संगठन को चुस्त-दुरुस्त करने में जुट गए हैं. कांग्रेस जहां अलग-अलग राज्यों में गुटबाजी की समस्या से पार पाने के लिए एक्शन मोड में है तो वहीं भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) भी संगठन के स्तर पर कोई कमजोर कड़ी नहीं छोड़ना चाहती. केंद्र की सत्ता पर काबिज राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की अगुवाई कर रही बीजेपी भी राज्यों के संगठन की धार तेज करने की कवायद में जुटी है.
बीजेपी ने झारखंड, पंजाब, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष बनाए हैं. झारखंड में बीजेपी ने आदिवासी कार्ड चल दिया है. पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी को बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है तो वहीं पंजाब में पार्टी की कमान कांग्रेस से आए सुनील जाखड़ को सौंपी है. आंध्र प्रदेश में डी पुरंदेश्वरी को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है. जी किशन रेड्डी तेलंगाना बीजेपी के नए अध्यक्ष होंगे.
मरांडी के सहारे आदिवासी वोटों पर नजर
बीजेपी ने झारखंड में पार्टी की कमान बाबूलाल मरांडी को सौंपी है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे मरांडी झारखंड राज्य गठन के बाद सूबे के पहले मुख्यमंत्री भी बने. 1994 में एकीकृत बिहार के वनांचल बीजेपी अध्यक्ष रहे मरांडी आदिवासी समाज के संथाल समुदाय से आते हैं. आदिवासी आबादी में संथाल समाज की हिस्सेदारी देखें तो ये एक तिहाई यानी 33 फीसदी के करीब है. ऐसे में बीजेपी का 'संथाल आदिवासी कार्ड' सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के सामने मुश्किलें खड़ी कर सकता है. जेएमएम का मुख्य वोट बेस आदिवासी समाज ही है.
राजनीतिक विश्लेषक अमिताभ तिवारी कहते हैं कि मरांडी को झारखंड बीजेपी की कमान सौंपने के पीछे रणनीति आदिवासी वोट, जेएमएम को उसके सबसे मजबूत किले वनांचल में ही घेरने और छत्तीसगढ़ के साथ मध्य प्रदेश के आदिवासियों को झारखंड से बड़ा संदेश देने की है. मरांडी पिछले कुछ समय में मनरेगा घोटाले से लेकर खनन घोटाले तक, हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ बहुत मुखर रहे हैं. उनकी छवि बेदाग नेता की है. वे आदिवासी समाज से भी आते हैं. ऐसे में बीजेपी आदिवासी की काट आदिवासी के फॉर्मूले पर आती दिख रही है. मरांडी 1998 के लोकसभा चुनाव में जेएमएम प्रमुख शिबू सोरेन को दुमका लोकसभा सीट से हराकर इस फॉर्मूले को सही भी साबित कर चुके हैं.
जाखड़ को कमान- पंजाब से राजस्थान पर निशाना
बीजेपी ने पंजाब में पार्टी की कमान सुनील जाखड़ को सौंप दी है. सिख बाहुल्य पंजाब में एक हिंदू नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाना पर अमिताभ तिवारी कहते हैं कि पार्टी सूबे में अपनी सियासी जमीन बनाने की कोशिश कर रही है. सुनील जाखड़ के पास संगठन का अनुभव है. वे पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. वे हिंदू और सिख, दोनों ही समाज में समान पकड़ रखते हैं. 2017 में आम आदमी पार्टी की मजबूत चुनौती के बीच कांग्रेस सत्ताधारी एसएडी और बीजेपी गठबंधन को हराकर सत्ता में वापसी करने में सफल रही तो उसके लिए पंजाब कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष सुनील जाखड़ को शिल्पकार माना गया. बीजेपी की रणनीति सुनील जाखड़ के सहारे संगठन की मजबूत नींव तैयार करने की है.
दूसरा पहलू ये है कि राजस्थान में 13 फीसदी के करीब जाट वोटर हैं जो चुनाव में जीत-हार तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं. जाट वोट की अहमियत इस बात से भी समझी जा सकती है कि वसुंधरा राजे सिंधिया खुद को राजपूतों की बेटी और जाटों की बहू बताकर वोट मांगती हैं. राजस्थान में इसी साल चुनाव होने हैं और बीजेपी ने चुनावी साल में सतीश पूनिया को राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर सीपी जोशी को सूबे के संगठन की कमान सौंप दी थी.
अमिताभ तिवारी कहते हैं कि पंजाब में सुनील को संगठन की कमान दिया जाना जाट समाज को बैलेंस करने की कोशिश है. ये 'पंजाब पर नजर, राजस्थान पर निशाना' जैसी बात है. सुनील जाखड़ की गिनती ऐसे नेताओं में होती है जिनका दो राज्यों की राजनीति में समान दखल है. सुनील जाट समाज से आते हैं. उनके पिता बलराम जाखड़ राजस्थान की सीकर और बीकानेर लोकसभा सीट से सांसद रहे थे. गौरतलब है कि बलराम जाखड़ दो बार लोकसभा के स्पीकर भी रहे. जाखड़ को कमान भले ही पंजाब बीजेपी की दी गई है लेकिन उनका असली टेस्ट राजस्थान चुनाव में होगा.
तेलंगाना-आंध्र प्रदेश में क्या है रणनीति
बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी को तेलंगाना का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया है. जी किशन रेड्डी तेलंगाना बीजेपी के अध्यक्ष रहे बंदी संजय की जगह लेंगे. बीजेपी के इस कदम को तेलंगाना की सत्ताधारी बीआरएस के साथ बढ़ती नजदीकी, किसान वोट पर नजर से जोड़कर देखा जा रहा है. तेलंगाना में बीजेपी के कुछ नेता बंदी संजय के कुछ फैसलों से नाराज बताए जा रहे थे.
बंदी संजय लगातार केसीआर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले रहे. बंदी संजय ने केसीआर सरकार के खिलाफ पदयात्रा भी की थी. अब उनको बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी की ताजपोशी को सूबे के बदलते राजनीतिक हालात में केसीआर के लिए भी संदेश बताया जा रहा है. केसीआर की बेटी के कविता का नाम दिल्ली शराब नीति घोटाले में भी आया था. के कविता से ईडी की टीम दिल्ली दफ्तर में इसे लेकर मैराथन पूछताछ भी कर चुकी है.
केसीआर की राजनीति का मिजाज भी कुछ ऐसा रहा है कि उन्हें मजबूत सहयोगी और मजबूत प्रतिद्वंदी, दोनों ही रास नहीं आते. केसीआर अपनी शर्तों पर सियासत करते हैं. पिछले कुछ चुनावों में जिस तरह से बीजेपी का ग्राफ चढ़ा है, बंदी संजय ने जिस तरह से केसीआर को टारगेट किया, उसको लेकर भी केसीआर एक्टिव थे. जानकार बीजेपी के साथ केसीआर की बढ़ती नजदीकियों के पीछे इसे प्रमुख वजह बता रहे हैं. गैर कांग्रेस, गैर बीजेपी गठबंधन का नारा बुलंद कर तीसरा मोर्चा खड़ा करने की कवायद में जुटे केसीआर अगर एनडीए में शामिल हो जाएं तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए.
आंध्र प्रदेश में बीजेपी ने पूर्व मुख्यमंत्री एनटी रामाराव की बेटी डी पुरंदेश्वरी को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया है. आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम लोकसभा सीट से सांसद पुरंदेश्वरी अपनी भाषण शैली को लेकर सूबे में काफी लोकप्रिय हैं. पुरंदेश्वरी को आंध्र प्रदेश की कमान सौंपे जाने को उनकी लोकप्रियता के सहारे सूबे में सियासी जमीन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.
2024 के लिए बीजेपी का माइक्रो प्लान
बीजेपी ने साल 2024 के चुनाव को लेकर माइक्रो लेवल प्लान बनाया है. पार्टी संगठन से लेकर सरकार तक बड़े बदलाव की तैयारी में है. बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृह मंत्री अमित शाह और बीएल संतोष के बीच पिछले दिनों कई दौर की बैठक में बदलाव का रोडमैप बना. बाद में बीजेपी अध्यक्ष नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह के साथ पीएम मोदी की मैराथन बैठक में भी इस प्लान को लेकर चर्चा हुई थी. सरकार और संगठन में सहमति बनने के बाद बीजेपी ने अब बदलाव शुरू कर दिया है.