केंद्र सरकार की ओर पारित तीन कृषि बिल पर विपक्षी दलों का विरोध जारी है. कांग्रेस इसके खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन कर रही है. कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने इन तीनों बिलों को किसानों के लिए विश्वासघात बताया है.
कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, ''सभी राजधानियों और शहरों में कांग्रेस आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रही है. ये तीन कानून (कृषि से संबंधित) तीन विश्वासघात की तरह हैं. सबसे बड़ा मजाक है कि सरकार कहती है इससे किसानों का लाभ होगा, मुद्दा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का है जिसका जिक्र बिल में नहीं है, एमएसपी हटाते हैं इसका भी जिक्र नहीं है.''
सिंघवी ने एमएसपी के बारे में कहा, ''आधा सत्य है जो झूठ से भी बड़ा है. एमएसपी का कोई वजूद नहीं छोड़ा है. सरकार से बार-बार आग्रह किया कि न्यूनतम सीमा बिल में लिखे. यह अहंकार की राजनीति है. बिल को सेलेक्ट कमेटी, स्टैंडिंग कमिटी में भेजने का सुझाव दिया गया लेकिन सरकार ने नहीं माना. सरकार शांता कुमार समिति की सिफारिश सीधी लागू कर रही है जिससे कि 1 लाख करोड़ बच जाएं. ये खतरनाक षड्यंत्र वाला तरीका अपनाया गया है.''
कांग्रेस नेता ने कृषि बिल पर सरकार को घेरते हुए कहा कि कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग की बात है. 75 साल से ये क्यों नहीं हुई, ये आज इसलिए हो रहा है क्योंकि औसतन किसान के पास 2 एकड़ जमीन है. जिसके पास करारनामा करने की समझ तक नहीं है, वो कैसे बड़े-बड़े उद्योगपति से करार कर पाएंगे. करारनामा से सामंतशाही बनेगी, ये 2020 की नई परिभाषा है. स्टोरेज की सीमा हटा दिया है जिससे कालाबाजारी बढ़ेगी. विवाद निपटारे के लिए सरकार ने कोई प्रावधान नहीं दिया, कोई ट्रिब्यूनल नहीं बनाया.
उन्होंने कहा कि मंडी इसलिए कांग्रेस ने बनाई क्योंकि किसान ज्यादा दूर नहीं जा सकता. खेत-मज़दूर, किसान, आढ़ती कई लोग इससे गंभीर रूप से प्रभावित होंगे. 2006-07 में बिहार में मंडी हटा दी, उसपर स्टडी करने से पता चलता है कि किसानों पर क्या बीती. बिहार में सरकारी प्रोक्योरमेंट लगातार कम हुई. ये कानून संघीय ढांचे के खिलाफ है. कृषि की स्थिति आज भारत में कैसी है, ये देखने की जरूरत है. 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का वादा था. इसके लिए 14% जीडीपी चाहिए जो आज निगेटिव है. एमएसपी और महंगाई की रेट भी देखना जरूरी है. एमएसपी जितने दे नहीं रहे, महंगाई से ज्यादा ले रहे हैं.
अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि राज्यसभा में क्या हुआ ये समझना जरूरी है. हम लगातार वोट डिवीजन की मांग करते रहे, कोरम भी था या नहीं ये भी सवालों के घेरे में है. एक व्यक्ति भी अगर डिवीजन मांगता है तो देना पड़ता है. उप सभापति ने डिवीजन नहीं कराया जबकि वे बाध्य हैं ऐसा करने के लिए. 1 बजे हाउस खत्म होना चाहिए ये तय हुआ था, लेकिन संडे के दिन ऐसा नहीं किया गया. इसका कारण सिर्फ एक ही है क्योंकि सरकार के पास आंकड़ा नहीं था. इसलिए हमने राष्ट्रपति से गुहार लगाई है कि वे इस कानून को पास न करें. ये गैर कानूनी है.