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UP: किसान बिल के विरोध में भाकियू का प्रदर्शन, राकेश टिकैत बोले- बहुमत के नशे में चूर है सरकार

कृषि बिल के खिलाफ किसानों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है. संसद में पारित किये गये तीन कृषि बिलों के विरोध में सोमवार को उत्तर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने प्रदर्शन किया.

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कृषि बिल के विरोध में प्रदर्शन करते कांग्रेस कार्यकर्ता
कृषि बिल के विरोध में प्रदर्शन करते कांग्रेस कार्यकर्ता
स्टोरी हाइलाइट्स
  • किसानों का यूपी के जिलों में प्रदर्शन
  • भाकियू की अगुवाई में प्रदर्शन का आयोजन
  • सरकार बहुमत के नशे में चूर: राकेश टिकैत

कांग्रेस किसान आंदोलन के जरिए अपनी पार्टी में जान फूंकने की कवायद कर रही है. कांग्रेस को लगता है कि विपक्ष को एकजुट करने का इससे बेहतर मौका नहीं मिल सकता. यही वजह है कि वह पार्टी के फायदे के लिए जनता में सीधा और मजबूत संदेश देना चाहती है. किसान बिल को लेकर कांग्रेस आगे की रणनीति तैयार करेगी इसके लिए उसने अपने तमाम नेताओं की बैठक बुलाई है. बैठक में सभी राज्यों के इंचार्ज किसानों का फीडबैक देंगे.

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वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए यह बैठक होगी, जिसके बाद कांग्रेस प्रेसवार्ता करेगी. इस बैठक में सभी मुख्य सचिव इंचार्ज और तमाम कमेटी के सदस्य हिस्सा लेंगे. यह पहली बार है जब अभी-अभी गठित हुई कमेटियों के नेता इस तरह बैठक करेंगे.

गौरतलब है कि इस दौरान राहुल गांधी और सोनिया गांधी विदेश में हैं. हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि राहुल गांधी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में हिस्सा लेंगे या नहीं. राहुल गांधी किसान बिल पर लगातार ट्वीट के जरिए मोदी सरकार पर हमला कर रहे हैं. वह कांग्रेस पार्टी के तमाम आला नेताओं के संपर्क में भी हैं और उनको संसद की हर अपडेट दी जा रही है.

'सरकार बहुमत के नशे में चूर'

कृषि बिल के खिलाफ किसानों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है. संसद में पारित किये गये तीन कृषि बिलों के विरोध में सोमवार को उत्तर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने प्रदर्शन किया. मुजफ्फरनगर में भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार बहुमत के नशे में चूर है.

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राकेश टिकैत ने कहा कि देश की संसद के इतिहास में पहली दुर्भाग्यपूर्ण घटना है जब अन्नदाता से जुड़े तीन कृषि विधेयकों को पारित करते समय न तो कोई चर्चा की और न ही इस पर किसी सांसद को सवाल करने का मौका दिया गया. यह भारत के लोकतन्त्र के अध्याय में काला दिन है.

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