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दिवाली से पहले कांग्रेस को मिलेगा नया अध्यक्ष, जानिए कैसे होता है चुनाव और कौन करते हैं वोट?

कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए तारीख का ऐलान हो गया है. कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव 17 अक्टूबर को होगा और नतीजे 19 अक्टूबर को आएंगे. कांग्रेस के 9000 से अधिक पीसीसी प्रतिनिधि (डेलीगेट्स) पार्टी अध्यक्ष पद के लिए वोटिंग करेंगे. इसके बाद अध्यक्ष अपनी टीम का गठन करता है. कांग्रेस में करीब 21 साल केबाद चुनाव हो रहे हैं.

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सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी और राहुल गांधी
सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी और राहुल गांधी

कांग्रेस में अध्यक्ष पद को लेकर तीन सालों से चल रही कश्मकश अब दिवाली से पहले खत्म हो जाएगी. कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए 21 साल बाद चुनाव की घोषणा रविवार कर दी गई है. चुनाव कार्यक्रम के अनुसार, 24 सितंबर से नामांकन दाखिल किए जाएंगे जिसके बाद 17 अक्टूबर को चुनाव होंगे. नतीजे 19 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे. दिवाली 24 अक्टूबर को है यानी दिवाली से पहले ही कांग्रेस को अपना अध्यक्ष मिल जाएगा.

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कांग्रेस के इतिहास में पार्टी अध्यक्ष का पद ज्यादातर समय नेहरू-गांधी परिवार के पास ही रहा है. आजादी के 75 सालों में 40 साल नेहरू-गांधी परिवार से कोई न कोई अध्यक्ष रहा तो 35 साल पार्टी की कमान गांधी-परिवार से बाहर रही.

हालांकि, कांग्रेस में ज्यादातर अध्यक्ष आम सहमति से निर्विरोध चुने जाते रहे हैं, लेकिन कई बार बाकायदा चुनाव के जरिए भी चुने गए हैं. ऐसे में ये जानना भी जरूरी है कि कांग्रेस में अध्यक्ष का चुनाव किस तरह से होता है और कौन लोग चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेते हैं? 

कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया

कांग्रेस में अध्यक्ष का चुनाव पार्टी के संविधान के मुताबिक होता है. कांग्रेस में अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया लंबी और रोचक है. कांग्रेस संविधान के हिसाब से पार्टी संगठन की चुनाव प्रक्रिया में तमाम पदों की भूमिका, जिम्मेदारी, चयन आदि के बारे में पूरी प्रक्रिया बताई गई है. कांग्रेस की कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) पार्टी में चुनाव के लिए सबसे पहले एक सेंट्रल इलेक्शन अथॉरिटी (सीईए) का गठन करती है, जिसके जिम्मे चुनाव कराने की पूरी जिम्मेदारी होती है. 

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इलेक्शन अथॉरिटी कराता है चुनाव 

सेंट्रल इलेक्शन अथॉरिटी गठन के बाद वह चुनाव का प्रारूप तैयार करती है और फिर चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की जाती है. अथॉरिटी के जरिए ही इलेक्शन शेड्यूल में चुनाव के नामांकन से लेकर नाम वापसी और स्क्रूटनी, मतदान और नतीजे के बाद विजेता को सर्टिफिकेट देने तक सबकी तारीख तय होती है. कांग्रेस राष्ट्रीय पार्टी है, लिहाजा अध्यक्ष का चुनाव भी राष्ट्रीय स्तर पर ही किया जाता है.

कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव के लिए पार्टी अथॉरिटी को पूरे देश में चुनाव कराने के लिए हर राज्य में एक प्रदेश रिटर्निंग अफसर और एक से दो एपीआरओ (राज्यों के आकार के मुताबिक असिस्टेंट प्रदेश रिटर्निंग अफसर) नियुक्त करती है. इनके ऊपर ही राज्यों में चुनाव कराने की जिम्मेदारी होती है. 

कांग्रेस में कौन लोग डालते हैं वोट?

कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव की शुरुआत सदस्यता अभियान से होती है, जो लगभग एक साल चलता है. इसके पूरा होने बाद बूथ कमिटी और ब्लॉक कमिटी बनाई जाती है. इसके बाद जिला संगठन बनाया जाता है. संविधान के मुताबिक, इन कमिटियों का गठन भी चुनाव के आधार पर होना चाहिए. ब्लॉक कमिटी और बूथ कमिटी मिलकर प्रदेश कांग्रेस कमिटी का प्रतिनिधि या पीसीसी डेलिगेट्स चुनते हैं. 

हर ब्लॉक से एक प्रतिनिधि का चुनाव किया जाता है. इसके बाद हर 8 पीसीसी पर एक केंद्रीय कांग्रेस कमिटी के प्रतिनिधि या एआईसीसी डेलिगेट चुना जाता है. एआईसीसी और पीसीसी का अनुपात एक और आठ का होता है. पीसीसी डेलिगेट्स के वोटों से ही प्रदेश कांग्रेस कमिटी का अध्यक्ष और पार्टी अध्यक्ष के चुनाव किया जाता है. 2017 में हुए संगठन चुनावों के दौरान पीसीसी की तादाद 9000 थी तो वहीं एआईसीसी डेलिगेट्स की संख्या 1500 थी. इस बार पीसीसी और एआईसीसी के डेलिगेट्स की संख्या बढ़ी है.

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कौन लड़ सकता है अध्यक्ष का चुनाव?

कांग्रेस अध्यक्ष को चुनने के लिए 9000 से अधिक पीसीसी प्रतिनिधि (डेलीगेट्स) मतदान कर सकेंगे. कांग्रेस के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने के लिए पार्टी के किसी भी व्यक्ति को बतौर प्रस्तावक 10 पीसीसी डेलिगेट्स का समर्थन हर हाल में चाहिए होता है. ऐसे में कांग्रेस के किसी भी सदस्य को अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ना है तो उसे पहले 10 पीसीसी डेलिगेट्स को अपने समर्थन में जुटाना होगा. 

कांग्रेस अध्यक्ष की ताजपोशी

कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव लड़ने के लिए 10 पीसीसी प्रस्तावक के समर्थन से नामांकन दाखिल करना होगा. नामांकन सही पाया जाता है तो ही चुनाव में हिस्सा ले सकते हैं. इसके बाद पीसीसी डेलिगेट्स को अपने पक्ष में वोटिंग करने के लिए तैयार करना होगा. चुनाव लड़ने वाले जिस भी उम्मीदवार के पक्ष में पीसीसी डेलिगेट्स के ज्यादा वोट पड़ते हैं, उसे विजेता घोषित कर दिया जाता है. कांग्रेस के चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद पार्टी अपना अधिवेशन बुलाती है, जहां अध्यक्ष पद का औपचारिक ऐलान होता है और सीडब्ल्यूसी का चुनाव होता है. 

कांग्रेस में CWC का गठन 

कांग्रेस नीति निर्धारण में कांग्रेस वर्किंग कमेटी अहम होती है. एआईसीसी के प्रतिनिधियों के वोटिंग से कांग्रेस वर्किंग कमिटी चुनी जाती है. हर नया अध्यक्ष अपनी सीडब्ल्यूसी का गठन करता है. एआईसीसी डेलिगेट्स के द्वारा CWC के 12 सदस्य चुनकर आते हैं जबकि 11 सदस्य को अध्यक्ष मनोनीत करते हैं. हालांकि, आमतौर पर सीडब्ल्यूसी के सदस्यों को अध्यक्ष ही चुनता है. इस कमिटी में अध्यक्ष के अलावा, संसद में पार्टी का नेता और अन्य सदस्य होते हैं. कांग्रेस में सीडब्ल्यूसी ही सबसे अहम होती है, जो तमाम अहम फैसले करती है. 

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आपात स्थिति में अध्यक्ष का चुनाव

कांग्रेस संविधान के मुताबिक, किसी आपातकाल स्थिति में पार्टी अध्यक्ष के निधन या अचानक इस्तीफा देने से खाली हुए अध्यक्ष पद के रोजमर्रा के कामकाज की जिम्मेदारी संभालने का भार संगठन के सबसे वरिष्ठ महासचिव के कंधे पर आता है. इसके अलावा सीडब्ल्यूसी आपस में मिलकर कार्यकारी या अंतरिम अध्यक्ष का चुनाव करती है, जो अगला पूर्णकालिक अध्यक्ष चुने जाने तक पार्टी की कमान संभालता है. इस प्रक्रिया में लगभग छह महीने से एक साल लगते हैं. 2019 में राहुल गांधी ने पार्टी के अध्यक्ष छोड़ा था और तब से ही सोनिया गांधी आंतरिम अध्यक्ष के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रही हैं. 

कांग्रेस संगठन का कार्यकाल 

कांग्रेस में अध्यक्ष सहित तमाम पदों के लिए चुनाव हर पांच साल में होता है जबकि इससे पहले हर तीन साल में संगठन के चुनाव होते थे. संगठन के मुताबिक ही अध्यक्ष का कार्यकाल भी तीन से बढ़ाकर पांच साल कर दिया गया. 2017 में राहुल गांधी संगठन चुनाव के बाद निर्विरोध चुन कर आए थे, जिन्होंने 2019 के आम चुनावों में पार्टी की करारी हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद से इस्तीफा दे दिया था. तीन साल के बाद अब कहीं जाकर अध्यक्ष का चुनाव की घोषणा हुई है, अब देखना है कि कौन-कौन नेता किस्मत आजमाते हैं?

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