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वरुण के वो बयान जिनमें राहुल गांधी को दिखी उनकी ‘विचारधारा’, कांग्रेस में नहीं हो सकेगी एंट्री

वरुण गांधी के बदले तेवर के बाद अटकलें लगाई जा रही थीं कि वे कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं. इसे लेकर राहुल गांधी ने साफ मना कर दिया. मंगलवार को राहुल गांधी ने कहा कि मैं वरुण गांधी को गले लगा सकता हूं, लेकिन उनकी विचारधारा को स्वीकार नहीं कर सकता. सवाल है कि आखिर वरुण गांधी की ऐसी क्या विचाराधारा है, जिसे राहुल गांधी सिरे से नकार रहे हैं? 

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राहुल ने वरुण की किस विचारधारा को बताया अलग?
राहुल ने वरुण की किस विचारधारा को बताया अलग?

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से बीजेपी सांसद वरुण गांधी पिछले कुछ समय से अपनी ही पार्टी और सरकार के खिलाफ हमलावर रुख अपनाए हुए हैं. इसके चलते उनके कांग्रेस में जाने की अटकलें लग रही हैं. ऐसे में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से उनकी 'भारत जोड़ो यात्रा' के दौरान बार-बार वरुण गांधी को लेकर सवाल भी पूछे जा रहे हैं. मंगलवार को राहुल गांधी ने इसका जवाब दिया. उन्होंने कहा कि मैं वरुण गांधी को गले लगा सकता हूं, लेकिन उनकी विचारधारा को स्वीकार नहीं कर सकता. सवाल है कि आखिर वरुण गांधी की ऐसी क्या विचाराधारा है, जिसे राहुल गांधी सिरे से नकार रहे हैं? 

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राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा पंजाब पहुंची तो होशियारपुर में उन्होंने मीडिया से बातचीत की. इस दौरान उनसे वरुण गांधी को लेकर सवाल किया गया. जवाब में राहुल गांधी ने कहा कि मेरा जो परिवार है उसकी एक विचारधारा है. उसका एक अलग थिंकिंग सिस्टम है. जो वरुण हैं उन्होंने एक समय और शायद आज भी उस विचारधारा को अपना लिया है, जिसे मैं स्वीकार नहीं कर सकता हूं. उस विचारधारा को मेरे लिए स्वीकार करना संभव नहीं है. मैं आरएसएस के दफ्तर नहीं जा सकता, चाहे मेरा गला काट दिया जाए. वरुण से मिल सकता हूं और गले लगा सकता हूं लेकिन उनकी विचारधारा को नहीं अपना सकता. 

एक ही परिवार के हैं राहुल और वरुण गांधी

गौरतलब है कि वरुण गांधी संजय गांधी के पुत्र हैं. संजय और राजीव गांधी सगे भाई थे और राहुल राजीव गांधी के पुत्र हैं. इस तरह राहुल गांधी और वरुण गांधी चचेरे भाई हैं. संजय गांधी के विमान हादसे में निधन के बाद उनकी पत्नी मेनका गांधी ने इंदिरा गांधी से मतभेदों के चलते घर छोड़ दिया और गांधी परिवार से अलग हो गई थीं. वरुण गांधी ने अपनी मां मेनका गांधी के नक्शे-कदम पर चलते हुए बीजेपी के साथ अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी. फायर ब्रांड हिंदुत्व का चेहरा बनने की कवायद के चलते उन्होंने कई बार विवादास्पद बयान दिए जिनपर भरपूर बवाल हुआ. एक बार तो उन्हें इसके लिए जेल भी जाना पड़ा. बहन प्रियंका गांधी ने वरुण को गीता पढ़ने की सार्वजनिक नसीहत भी दी. वरुण की छवि इसके बाद एक कट्टर हिंदुत्ववादी नेता की बन गई, उसी से राहुल गांधी को दिक्कत है. 

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वरुण गांधी के विवादित बयान

1. वरुण गांधी ने मार्च 2009 में पीलीभीत लोकसभा सीट से चुनाव प्रचार के दौरान भड़काऊ भाषण दिया. उन्होंने कहा था ये हाथ नहीं है, ये कमल की ताकत है जो किसी का भी सिर कलम कर सकता है. अगर कोई हिंदुओं की ओर हाथ बढ़ाता है या फिर ये सोचता है कि हिंदू नेतृत्वहीन हैं, तो मैं गीता की कसम खाकर कहता हूं कि मैं उस हाथ को काट डालूंगा.

2. एक बार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की विश्व प्रसिद्ध अहिंसावादी टिप्पणी को वरुण गांधी ने गलत ठहराया था. वरुण ने कहा था, 'मैं इसे बेवकूफीपूर्ण मानता हूं कि कोई अगर आपके गाल पर एक चांटा मारे तो आप दूसरा गाल आगे कर दें. उस..... के हाथ काट दो ताकि वो किसी दूसरे पर भी हाथ न उठा सके.

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में पीलीभीत सीट छोड़कर वरुण चुनाव लड़ने सुल्तानपुर चले गए थे और वहां से सांसद भी बने. इसके बाद 2019 में वरुण गांधी फिर पीलीभीत वापस आ गए. सुल्तानपुर से उनकी मां मेनका गांधी चुनावी मैदान में उतरीं. वरुण गांधी ने उनके लिए प्रचार के दौरान विवादित और भड़काऊ बयान दिए. 

3. एक बार वरुण गांधी ने मुलायम सिंह यादव परिवार को लेकर कहा था कि जो लोग सैफई में 15-20 साल पहले गोबर के कंडे उठाते थे, वह आज पांच-पांच करोड़ की गाड़ियों में घूम रहे हैं. ये पैसा जनता का है न कि इनके दादा का. ये लोग भ्रष्टाचारी हैं और सिर्फ देश का पैसा लूटते हैं. 

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4. एक बार तो मुलायम सिंह पर निशाना साधते हुए वरुण गांधी ने कहा था कि अयोध्या में रामभक्तों को किसने गोली मारी थी. राम भक्तों का खून बहाया गया, इसे हम लोग कैसे भूल सकते हैं. गठबंधन के लोग पाकिस्तानी हैं. खुद बताइए रामभक्तों के खून बहाने वाले और पाकिस्तानियों को वोट देकर जिताएंगे कि भारत माता के नाम पर वोट देंगे.

5. वरुण ने कहा था कि मेरी मां चुनाव लड़ रही हैं, वो नेक हैं. 24 साल के सियासी इतिहास में उनके ऊपर एक भी दाग नहीं है. मैं अपनी मां के नाम पर नहीं बल्कि भारत माता के नाम पर वोट मांग रहा हूं. भारत माता के नाम पर क्या आप लोग वोट देने के तैयार हैं. हिंदुस्तान के साथ हैं या पाकिस्तान के साथ? गठबंधन को जिता दिया तो पाकिस्तान चले जाएंगे. 

वरुण को कैसे अपनाएंगे राहुल?
  
वरुण गांधी को संघ परिवार ने ही आगे बढ़ने का मौका दिया और जनता के बीच उनकी एक खास छवि भी बनी. उनकी इस छवि के साथ कांग्रेस का गांधी परिवार राजनीतिक रूप से कभी सहज नहीं रह सकता. वो भी तब जब राहुल गांधी ने संघ और बीजेपी को लेकर आक्रमक रुख अपना रखा है. राहुल गांधी इन दिनों संघ के हिंदुत्व की सियासत के खिलाफ ही भारत जोड़ो यात्रा कर रहे हैं. ऐसे में राहुल गांधी कैसे वरुण गांधी को स्वीकार कर सकते हैं. 

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बदले हैं वरुण के तेवर

हालांकि, वरुण गांधी के तेवर इस समय बदले-बदले नजर आ रहे हैं. मोदी सरकार से लेकर योगी सरकार तक की वे जमकर अलोचना कर रहे हैं. पार्टी लाइन से अलग वरुण गांधी ने अपनी लाइन ले रखी है. हाल ही में उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि आज की राजनीति हिंदू को मुस्लिम से और मुस्लिम को हिंदू से लड़ाने की हो रही है. अब वे न तो गांधी-नेहरू की नीतियों का विरोध करते हैं और ना ही अल्पसंख्यक विरोधी बयान देते हैं. 

राहुल की ओर से 'ना'

पिछले साल पीलीभीत की ही एक जनसभा में वरुण गांधी ने कहा था, 'मै एक आस्तिक हिंदू हूं. मै हर एकादशी पर व्रत रखता हूं और मेरे घर देवी की अखंड ज्योति भी जलती है. मेरे घर के मंदिर में श्री हनुमान भी विराजमान हैं, लेकिन आज मै आपको एक बात बता दूं कि हिन्दू-मुस्लिम की राजनीति या नफरत की राजनीति इस देश को नुकसान पहुंचा रही है. वरुण गांधी ने ये भी कहा था कि 'जय श्री राम वाली राजनीति से देश को नुकसान पहुंच रहा है' इसके बाद ही वरुण गांधी के कांग्रेस के साथ जाने की चर्चांए तेज हो गई थीं, लेकिन शायद ये सब काफी नहीं था यही वजह है कि कम से कम अभी तो राहुल गांधी ने उनके लिए ना की लकीर खींच दी है.

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