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फिल्मी दुनिया में पर्दे पर हमेशा छाए रहने वाली देओल फैमिली के सदस्यों ने जब राजनीति की दुनिया में कदम रखा था तब यह उम्मीद की जा रही थी कि पर्दे पर दिखने वाले ये स्टार्स राजनीति में भी कुछ कमाल दिखाएंगे. लेकिन ऐसा होते दिख नहीं रहा है. देओल परिवार के सदस्य चाहे वो सनी देओल हों या हेमा मालिनी और धर्मेंद्र वो जब भी राजनीति में उतरे तब-तब उनके चुनावी क्षेत्रों से यह शिकायतें आती रहीं हैं कि नेताजी उपलब्ध नहीं है.
ताजा मामला पंजाब के पठानकोट का है. यहां गुरदासपुर से सांसद सनी देओल के गुमशुदगी के पोस्टर पठानकोट बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन में लगाए गए हैं. पोस्टर में सांसद सनी देओल से यूथ कांग्रेस ने यह अपील की है कि वो अपने संसदीय क्षेत्र में आकर लोगों की समस्याओं को सुनें, क्योंकि जब से कोविड शुरू हुआ है तब से सांसद गायब हैं. इसलिए वो गुरुदासपुर आएं और लोगों की दिक्कतों को समझे और उनका निराकरण करें.
मालूम हो कि यह पहला मौका नहीं है जब सांसद सनी देओल के गुमशुदगी के पोस्टर शहर में लगाए गए हों. इसके पहले भी गुरदासपुर में सांसद सनी देओल के लापता होने के पोस्टर लगाए गए थे. उस वक्त भी सनी देओल खुद तो अपने लोकसभा क्षेत्र नहीं पहुंचे थे लेकिन कोविड से जुड़ा कुछ सामान सरकारी अस्पतालों को जरूर उपलब्ध करवाया था.
अब बात बॉलीवुड की ड्रीम गर्ल यानी की हेमा मालिनी की करें तो उनके चुनावी क्षेत्र मथुरा में भी उनके गुमशुदगी के पोस्टर कई बार लगते रहे हैं. हाल ही में मई माह में मथुरा के जुगल घाट पर सांसद हेमा मालिनी के लापता होने के पोस्टर लगाए गए थे. साथ ही इन पोस्टरों पर लापता होने के साथ इनाम भी देने की बात कही गई थी.
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि कोरोना महामारी के दौरान सांसद अपने संसदीय क्षेत्र में नजर नहीं आई है उनका वृंदावन निवास होने के बाद भी संसदीय क्षेत्र को छोड़कर मुंबई चली गई हैं. इस वजह से महामारी के दौरान उन्हें मदद नहीं मिल पा रही है. इसके अलावा इंटरनेट पर भी हेमा मालिनी के लापता होने के पोस्टर वायरल होते रहे हैं.
धर्मेंद्र के भी लापता होने के पोस्टर ...
धर्मेंद्र 2004 से 2009 तक बीकानेर से भारतीय जनता पार्टी के लोकसभा सांसद थे. बताया जाता है कि चुनाव जीतने के पहले धर्मेंद्र ने बीकानेर के लोगों से यह वादा भी किया था कि वो शहर में लोगों के साथ वक्त बिताएंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. स्थानीय लोग बताते हैं कि चुनाव जीतने के बाद धर्मेंद्र एक या दो बार ही बीकानेर आए थे. उसके बाद वो कभी लोगों के बीच नहीं पहुंचे. उनके लापता होने के विज्ञापन अखबारों में तक छापे गए थे. हालांकि, उस वक्त उनके प्रवक्ता ने धर्मेंद्र के बीमार होने की वजह से बीकानेर न आने की बात कही थी.