कर्नाटक के सियासी गलियारों में इस परिवार की सियासी गतिविधियों पर दशकों से नजर रखने वाले लोग इस फैमिली को 'श्री देवेगौड़ा नाटक मंडली' कहते हैं. राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले इस परिवार में महात्वाकांक्षाओं का जबरदस्त टकराव देखने को मिल रहा है. पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा की राजनीतिक विरासत में उनके विशाल कुनबे का हर सदस्य अपना थोड़ा-थोड़ा हक चाहता है.
लेकिन राजनीति में सीमित अवसरों की वजह से एक सदस्य का हक दूसरे सदस्य की हकमारी बन जाती है. लिहाजा गाहे-बगाहे इस ग्रैंड पॉलिटिकल फैमिली में टकराव देखने को मिलते रहता है. इस बार चुनाव से पहले देवेगौड़ा परिवार में ये टकराव खुलकर सामने आ गया जब पूर्व पीएम एचडी देवेगौड़ा की बड़ी बहू एक सीट पर दावा ठोक कर पूर्व सीएम एचडी कुमारस्वामी के अधिकार को चुनौती देने की कोशिश की.
देवेगौड़ा परिवार में टकराव की कहानी हम आपको बताएं इससे पहले राजनेता, अधिकारी, डॉक्टर, पत्रकार के इस परिवार के सदस्यों के बारे में हम आपको बताते हैं.
पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा का विवाह 1954 में चेनम्मा के साथ हुआ था. उनके 6 बच्चे हैं, 4 बेटे और 2 बेटियां. इनका परिचय इस प्रकार है.
देवेगौड़ा के परिवार में कौन कौन?
1- एचडी बालकृष्ण गौड़ा एचडी देवेगौड़ा के बड़े बेटे हैं. वे कर्नाटक सरकार में अधिकारी रहे हैं. कविता होनप्पा उनकी पत्नी हैं.
2-एचडी रेवन्ना एचडी देवेगौड़ा के दूसरे बेटे हैं. वे पूर्व कैबिनेट मिनिस्टर भी रह चुके हैं. भवानी रेवन्ना इन्हीं की पत्नी है. इन दोनों को दो बच्चे हैं सूरज रेवन्ना जो कि पेशे से डॉक्टर हैं. लेकिन इस वक्त वे एमएलसी हैं और दूसरे हैं प्राज्वल रेवन्ना जो सांसद हैं.
3-एचडी कुमारस्वामी देवेगौड़ा के तीसरे बेटे हैं. वे दो बार कर्नाटक के सीएम रहे हैं. अनिता कुमारस्वामी उनकी पत्नी हैं. अनिता अभी रामनगर सीट से विधायक हैं. इन दोनों का एक बेटा है जिसका नाम एच के निखिल गौड़ा है. निखिल फिल्म एक्टर हैं.
4-देवेगौड़ा फैमिली में चौथे नंबर पर आती हैं बेटी अनुसुइया मंजूनाथ. अनुसुइया लेक्चरर रह चुकी हैं. उनके पति सीएन मंजूनाथ हैं जो कार्डियोलॉजिस्ट हैं.
5- एचडी रमेश पूर्व पीएम देवेगौड़ा के तीसरे बेटे हैं. वे पेशे से रेडियोलॉजिस्ट हैं, सौम्या रमेश उनकी पत्नी हैं.
6-शायला चंद्रशेखर इस परिवार की सबसे छोटी सदस्य हैं. वे पत्रकार रह चुकी हैं. उनके पति एच एस चंद्रशेखर ऑर्थोपेडिक सर्जन हैं.
ये कर्नाटक का वो परिवार है जिसने धान की फसल की किसानी करने से लेकर कर्नाटक का पहला राजनीतिक परिवार बनने तक का सफर तय किया है. इन्हें कर्नाटक की फर्स्ट फैमिली भी कहा जाता है.
इस परिवार के हर सदस्य की रगों में राजनीति दौड़ती है और देवेगौड़ा ने खुद इस बात का जुगाड़ किया है कि परिवार का हर सदस्य कहीं न कहीं फिट हो जाए.
देवेगौड़ा की फैमिली में बहू और बेटे के बीच का टकराव
कर्नाटक के विधानसभा चुनाव में चार महीने से भी कम का समय रह गया है. इस बीच इस परिवार में बहू और बेटे के बीच का टकराव देखने को मिल रहा है. एक सभा को संबोधित करते हुए भवानी रेवन्ना ने अपनी इच्छा जाहिर करते हुए कहा कि वे हसन विधानसभा से चुनाव लड़ना चाहती हैं. भवानी का ये बयान देना था कि इस परिवार में हलचल मच गई. स्थिति ऐसी हुई कि पूर्व सीएम एचडी कुमारस्वामी को अपनी भाभी को सार्वजनिक रूप से मना करना पड़ा. कुमारस्वामी ने कहा कि पार्टी ने पहले ही इस विधानसभा क्षेत्र के लिए एक 'योग्य' उम्मीदवार का चयन कर लिया है.
इससे पहले हसन में महिलाओं के एक छोटे से समूह को संबोधित करते हुए भवानी ने कहा था कि 2018 में जब से हसन में बीजेपी का उम्मीदवार जीता है यहां विकास की गतिविधियां ठप हो गई है. उन्होंने कहा, " जनता दल सेकुलर परिवार के वरिष्ठों ने एक फैसला लिया है कि वे मुझे उम्मीदवार बनाना चाहते हैं, अगले कुछ दिनों में वे इसकी घोषणा करेंगे. इस बीच मैंने फैसला किया है कि मैं इस क्षेत्र का खूब भ्रमण करूंगी और लोगों से मिलूंगी,
राजनीतिक पंडितों का कहना है कि भवानी रेवन्ना जो कि हसन जिला पंचायत की पूर्व सदस्य थीं वे कई सालों से सक्रिय राजनीति में आने की कोशिश कर रही हैं. चुनाव से पहले भवानी ने अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए ये घोषणा की थी.
भवानी का दावा जनता के बीच पहुंचा भी नहीं था कि देवेगौड़ा के पसंदीदा पुत्र और उनके राजनीतिक वारिश और पूर्व सीएम कुमारस्वामी ने तुरंत प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, "हर किसी की तरह, भवानी रेवन्ना ने चुनाव लड़ने की इच्छा व्यक्त की है. अगर हमारे पास एक 'समर्थ' उम्मीदवार नहीं होता, तो मैं खुद भवानी को चुनाव लड़ने के लिए कहता. लेकिन, हमने पहले ही एक हसन सीट के लिए 'अच्छे' उम्मीदवार की पहचान कर ली है. मैं भवानी रेवन्ना से बात करूंगा और बिना किसी टकराव के भ्रम को दूर करूंगा."
भाभी भवानी से चुनौतियां
इधर मां भवानी रेवन्ना की सियासी हसरतों को उनके बेटों सूरज और प्राज्वल ने समर्थन दिया है. सूरज रेवन्ना ने कहा है कि इस सीट उम्मीदवार का फैसला एचडी देवेगौड़ा और एचडी रेवन्ना करेंगे. सूरज ने कहा कि इस सीट के लिए उनकी मां योग्य उम्मीदवार है. खास बात यह है कि सूरज ने अपने चाचा एचडी कुमारस्वामी का नाम तक नहीं लिया.
भवानी रेवन्ना ने हसन सीट से अपनी चुनौती पेश करने से पहले निश्चित रूप से अपनी फैमिली में विचार किया होगा. इस लिहाज से उनकी तैयारियों को कमजोर नहीं आंका जाना चाहिए.
कुमारस्वामी भले ही अस्थायी तौर पर भवानी की महात्वाकांक्षाओं की राह में रोड़ा बन गए हैं. लेकिन सभी जानते हैं कि इस पर आखिरी फैसला परिवार के बटवृक्ष माने जाने वाले पूर्व पीएम देवेगौड़ा करेंगे. देवेगौड़ा अब 90 साल के होने वाले हैं. उन्होंने अपने करियर में अपने परिवार में ऐसे कई उतार-चढ़ाव और हलचलों का सफलतापूर्वक सामना किया है. देवेगौड़ा पर कोई भी यह आरोप नहीं लगा सकता है कि उनके दिल में परिवार के सर्वोत्तम हित नहीं हैं.
यदि भवानी की चली और वे हसन सीट से विधानसभा में उतर गईं तो वे देवेगौड़ा खानदान से राजनीति में उतरने वाली 8वीं सदस्य होंगी.
हालांकि भवानी रेवन्ना की दावेदारी के बाद जब कर्नाटक की राजनीति में अलग अलग तरह की चर्चाएं होने लगी तो एचडी रेवन्ना ने मामले को शांति करने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि हसन सीट से उम्मीदवार पर कुमारस्वामी का फैसला आखिरी होगा. हालांकि इसे अस्थायी 'युद्धविराम' ही माना जा रहा है.
एचडी कुमारस्वामी को अपने बेटे के करियर की चिंता
इधर पूर्व सीएम एचडी कुमारस्वामी को अपने बेटे निखिल कुमारस्वामी के भविष्य की चिंता सता रही है. राज्य में बीजेपी के उभार के बीच इस खानदान के लिए राजनीति मुश्किल होती जा रही है. निखिल कुमारस्वामी 2019 में मंड्या लोकसभा सीट से सिने स्टार सुमलता से चुनाव हार चुके हैं. कुमारस्वामी बेटे के करियर को लेकर इतने चिंतित हैं कि उन्होंने निखिल को सुरक्षित माने जाने वाले रामनगर सीट से खड़ा करने का फैसला कर दिया है और वे खुद चन्नापटन सीट जा रहे हैं.
कुमारस्वामी की भावुक अपील
कुमारस्वामी ने अपने समर्थकों को यह भी बताया कि वे अपनी भाभी भवानी रेवन्ना को क्यों हसन सीट से चुनाव लड़ने के लिए रोकेंगे. इसके लिए उन्होंने एक भावुक बयान दिया. कुमारस्वामी ने कहा, "कभी-कभी, हमें पार्टी के उन लाखों कार्यकर्ताओं की खातिर अपना सिर भी देना पड़ता है (त्यागा करना पड़ता है) जो पार्टी बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं. हमें अनीता को मघुगिरी सीट से अंतिम मौके पर लड़ाना पड़ा क्योंकि तब पार्टी उम्मीदवार वीरभद्र का बतौर सरकारी कर्मचारी इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया था. एक और मौके पर मुझे रामनगर के साथ ही चन्नापटन सीट से लड़ना पड़ा क्योंकि चन्नापाटन में हमारा कोई उम्मीदवार नहीं था. पार्टी के कार्यकर्ता हताश थे लेकिन तब मुझे खुद अपना ही सिर पेश करना पड़ा."
2023 का चुनाव श्री गौड़ा नाटक मंडली का आखिर शो
राजनीतिक पंडित मानते हैं कि संभवत: ये चुनाव श्री गौड़ा नाटक मंडली का आखिरी शो हो सकता है, क्योंकि लोगों में इस परिवार का असर धीरे-धीरे कम हो रहा है. 2018 के चुनाव में पार्टी ने जो 30 सीटें जीती वो पुराने मैसुरु क्षेत्र से थी. 2019 लोकसभा चुनाव में पार्टी के खाते में मात्र एक सीट आया. पूर्व पीएम देवेगौड़ा तुमकुर से हारे और निखिल कुमारस्वामी मंडया सीट से पराजित हुए. जबकि इन क्षेत्रों को पुराने मैसुरु का ह्रदयस्थल कहा जाता है. इसके अलावा पिछले 5 सालों में पार्टी के कई बड़े नेता जेडीएस से अलग भी हुए हैं.
रिपोर्ट- रामकृष्ण उपाध्या