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सुखबीर बादल बोले- किसानों को देशद्रोही कहने की हिम्मत कैसे हुई, क्या बूढ़ी महिलाएं भी खालिस्तानी

कृषि कानूनों को लेकर शिरोमणि अकाली दल मोदी सरकार पर हमलावर रही है. इस मुद्दे के कारण वो NDA से भी अलग हो चुकी है. वहीं, अब शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने किसानों के आंदोलन को लेकर बयान दिया है. 

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सुखबीर सिंह बादल (फोटो- PTI)
सुखबीर सिंह बादल (फोटो- PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • किसानों का आंदोलन पिछले 8 दिन से जारी
  • किसानों को देशद्रोही बोलने की हिम्मत कैसे: सुखबीर बादल
  • 'किसानों को देशद्रोही कहने का हक किसने दिया'

केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन पिछले 8 दिन से जारी है. बीजेपी की सबसे पुरानी सहयोगियों में से एक रही शिरोमणि अकाली दल किसानों के साथ खड़ी है. कृषि कानूनों को लेकर वो मोदी सरकार पर हमलावर रही है. इस मुद्दे के कारण वो NDA से भी अलग हो चुकी है. वहीं, अब शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने किसानों के आंदोलन को लेकर बयान दिया है. 

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सुखबीर सिंह बादल ने आंदोलन में खालिस्तानियों की मौजूदगी की अफवाहों को लेकर आक्रामक रुख दिखाया. उन्होंने कहा कि इस आंदोलन में कई बूढ़ी महिलाएं भी शामिल हैं. क्या वो खालिस्तानी लगती हैं? यह देश के किसानों को संबोधित करने का कोई तरीका है? यह किसानों का अपमान है. 

पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी हिम्मत कैसे हुई हमारे किसानों को देशद्रोही कहने की? बीजेपी या किसी और को, किसानों को देशद्रोही कहने का हक किसने दिया? किसानों ने अपना पूरा जीवन देश के लिए समर्पित कर दिया और आप इन्हें देशद्रोही कह रहे हैं? जो इन्हें देशद्रोही कह रहे हैं, वो खुद देशद्रोही हैं. 

बता दें कि भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेताओं और उनसे जुड़े संगठनों ने किसान आंदोलन पर सवाल खड़े किए. प्रदर्शन में शामिल कुछ लोगों पर खालिस्तान के समर्थन का आरोप लगा. 

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वहीं,  प्रकाश सिंह बादल के पद्म विभूषण लौटाने पर सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि प्रकाश सिंह बादल ने पूरे जीवन किसानों के हक के लिए लड़ाई लड़ी. उन्होंने सरकार को एक कड़ा संदेश देने के लिए अपना अवॉर्ड लौटाया है. जब किसानों को ही ये कानून नहीं चाहिए तो भारत सरकार उन पर ये कानून जबर्दस्ती क्यों लाद रही है. आपको बता दें कि प्रकाश सिंह बादल ने गुरुवार को किसानों के समर्थन में अपना पद्म विभूषण लौटा दिया. 

 

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