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क्या किसान बिल पर सबक लेकर संसद में दिखेगी विपक्षी एकजुटता? 

कृषि विधेयक के विरोध में किसान गुस्से में हैं और सड़क पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं. किसानों के मामले पर बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए में फूट पड़ गई है. अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर ने मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया है. इसके बावजूद मोदी सरकार अपने स्टैंड पर पूरी तरह से कायम है और फिलहाल अपने कदम पीछे खींचने के मूड में नहीं दिख रही है. वहीं, विपक्ष अभी भी पूरी तरह से बिखरा हुआ नजर आया है.

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कृषि विधेयक का विरोध करते किसान
कृषि विधेयक का विरोध करते किसान
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कृषि विधेयक के खिलाफ किसान आक्रोशित हैं
  • चीन से लेकर जीएसटी तक के मुद्दे पर विपक्ष बिखरा है
  • राज्यसभा में किसान मुद्दे पर विपक्ष एक होगा?

किसानों से जुड़े विधेयक लोकसभा में पारित हो गया है और अब उसे राज्यसभा में पेश किया जाना है. इस विधेयक के विरोध में किसान गुस्से में है और सड़क पर उतरने की तैयारी में है. किसानों के मामले पर बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए में फूट पड़ गई है. अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर ने मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया है. इसके बावजूद मोदी सरकार अपने स्टैंड पर पूरी तरह से कायम है और फिलहाल अपने कदम पीछे खींचने के मूड में नहीं दिख रही है. वहीं, विपक्ष अभी भी पूरी तरह से बिखरा हुआ नजर आया है. ऐसे में सवाल उठता है कि देश में किसानों की नाराजगी को देखते हुए विपक्ष एकजुट हो सकेगा? 

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कृषि से संबंधित बिल के विरोध में भारतीय किसान यूनियन सड़क पर उतरकर मोदी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहा है. हरियाणा में 20 सितंबर को सड़क रोको आंदोलन होगा. 24 सितंबर से 26 सितंबर के बीच पंजाब में रेल रोको आंदोलन चलाएंगे. 25 सितंबर को भारत बंद की आपील की जा सकती है, जिसे लेकर पंजाब में किसान संगठनों की बैठक चल रही है. सरकार विधेयक को लेकर किसानों की नाराजगी की गहराई की थाह नहीं लगा सकी. हालांकि, कांग्रेस ने यह बात जरूर शुरू में कह दिया था कि कृषि से जुड़े विधेयकों का वह विरोध करेगी. 

किसानों के मुद्दे पर बीजेपी के साथ फिलहाल मजबूती के साथ जेडीयू खड़ी है. शिरोमणी अकाली दल ने भी अब इस विधेयक के खिलाफ सरकार का साथ छोड़ दिया है. वहीं, कांग्रेस, सपा, शिवसेना, एनसीपी, केसीआर, डीएमके, टीएमसी, बसपा, आम आदमी पार्टी सहित तमाम विपक्षी दल विरोध में हैं, लेकिन सवाल यही है कि क्या ये किसान बिल पर सबक लेते हुए राज्यसभा में एक हो सकेंगा या फिर लोकसभा की तरह वाकआउट कर जाएंगे. 

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लोकसभा में पास हो चुके तीन किसान विधेयकों को लेकर अरविंद केजरीवाल भी मैदान में आ गए हैं. उन्होंने  किसानों के विरोध-प्रदर्शन के समर्थन में उतरते हुए कहा कि केंद्र सरकार के कृषि से जुड़े हुए विधेयक किसानों को बड़ी कंपनियों के हाथों शोषण के लिए छोड़ देंगे. उन्होंने सभी विपक्षी पार्टियों से कहा कि राज्यसभा में एकजुट होकर इसका विरोध करना चाहिए. 

हालांकि, संसद में गुरुवार को जिस तरह से विपक्ष बिखरा हुआ नजर आया. चीन सीम विवाद पर कांग्रेस भले ही आक्रामक रुख अख्तियार करते हुई पूर्ण चर्चा की मांग कर रही हो, लेकिन वो इस मुद्दे पर खुद को अलग-थलग पाती है. राज्यसभा में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के बयान के बाद आधिकांश विपक्षी दल सरकार के साथ खड़े नजर आ रहे हैं. विपक्षी दलों के मूड को भांपते हुए कांग्रेस ने विरोध करने से परहेज किया है. 

राज्यों के जीएसटी के भुगतान की मांग को लेकर टीएमसी सहित आठ क्षेत्रीय दलों ने संसद भवन के अंदर गांधी प्रतिमा के सामने प्रदर्शन किया. विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस को विपक्षी दलों ने आमंत्रित नहीं किया था. इसमें टीएमसी, टीआरएस, आरजेडी, डीएमके, सपा, एनसीपी और शिवसेना नेताओं ने भाग लिया था. टीएसपी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि क्षेत्रीय दलों को आपस में तालमेल बिठाने में आसानी होती है. कांग्रेस के मुद्दे हम तय नहीं कर सकते हैं. राज्यों में कुछ नहीं कर सकते हैं और संसद में समर्थन चाहते हैं. 

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वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस, वामपंथी दलों, आरजेडी और डीएमके नेताओं ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात कर फरवरी में दिल्ली में हुए दंगों के मामले पर पुलिस की जांच को लेकर सवाल खड़े किए हैं. राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान टीएमसी इसका हिस्सा नहीं थी. सीपीएम नेता ने कहा कि राष्ट्रपति को ज्ञापन देने पर जो लोग सहमत थे वही प्रतिनिधि मंडल का हिस्सा थे. हालांकि, सभी विपक्षी दलों ने राज्यसभा में संयुक्त रूप से तीन कृषि विधेयकों का विरोध करने के लिए एकमत हैं. 

 

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