INDIA गठबंधन की बैठक की तारीख बदल गई है. यह बैठक पहले 6 दिसंबर को प्रस्तावित थी, लेकिन अब ये बैठक 17 दिसंबर को होनी है. 6 तारीख को होने वाली बैठक में ममता बनर्जी और नीतीश कुमार के बाद अखिलेश यादव ने भी मीटिंग में जाने से मना कर दिया था.
कांग्रेस को तीन राज्यों में चुनावी हार के बाद इंडिया गठबंधन के साथियों से भी मुंह की खानी पड़ी, क्योंकि अब अखिलेश यादव सरीखे नेता कांग्रेस पार्टी को ज्यादा स्पेस देने के मूड में नहीं हैं और कांग्रेस से नाराजगी का इजहार इन पार्टियों ने कर भी दिया. लेकिन यह बात सिर्फ नाराजगी तक नहीं है. अब अखिलेश यादव सरीखे नेता कांग्रेस से सिर्फ सीटों के बंटवारे पर बात करना चाहते हैं. यानी की पहले सीटें तय हो उसके बाद गठबंधन में बाकी के फैसले लिए जाएं.
'जो तय हुआ था, उसी फार्मूले पर आगे बढ़ना होगा'
आज अखिलेश यादव ने एक बड़ा बयान दिया. अखिलेश यादव ने आज कहा कि 'INDIA गठबंधन के पहले जो बात तय हुई थी कि जो जहां मजबूत होगा, उसे वहां दूसरे दल मदद करेंगे. इस फार्मूले पर इंडिया गठबंधन को आगे बढ़ना होगा.' इससे पहले वाराणसी में अखिलेश यादव ने कहा था कि चुनाव के नतीजों के साथ ही अहंकार भी खत्म हो गया.
यानी कि अब अगर इंडिया गठबंधन की जो बैठक होगी उसमें सीटों का फार्मूला जब तक तय ना हो जाए, तबतक आगे की बात होना मुश्किल है.
कांग्रेस के लिए UP में मुश्किल
एक के बाद एक बयान उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को परेशान करने वाले हैं. अखिलेश यादव के यह दोनों बयान दिखा रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में अब अखिलेश यादव कांग्रेस पार्टी को ज्यादा सीट देने के मूड में नहीं हैं. सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चंद ने आजतक को बताया था कि कांग्रेस पार्टी की हैसियत उत्तर प्रदेश में अमेठी और रायबरेली से ज्यादा कि नहीं है. ऐसे में अब कांग्रेस पार्टी को उत्तर प्रदेश में वहीं तक सीमित रहना होगा.
सपा और कांग्रेस के बीच बढ़ रही तल्खियां
हालांकि अब INDIA गठबंधन को लेकर आगे कैसे बढ़ा जाए, इस पर बैक रूम बातचीत शुरू हो चुकी है. अखिलेश यादव से भी कांग्रेस का आलाकमान संपर्क में है. लेकिन असली जड़ सीटों की बातचीत है. अगर कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश में ज्यादा सीटें मांगेगी तो बातचीत पटरी से उतर जाएगी. उधर उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी हर हाल में अपनी ताकत बढ़ाने और दिखाने के मूड में है. अजय राय भी उत्तर प्रदेश में झुकने को तैयार नहीं हैं. यानी अगर सपा के नेता कांग्रेस को रायबरेली और अमेठी तक सीमित रहने की बात करते हैं तो अजय राय मैनपुरी और कन्नौज में भी कांग्रेस के जीत की बात करते हैं. यानी प्रदेश स्तर पर सपा और कांग्रेस के बीच की तल्खी चुनावी नतीजे के बाद कम नहीं हुई.
घट गया कांग्रेस का सियासी कद!
सियासत तो यही कहती है कि 2024 के लिए विपक्ष का गठबंधन तो होगा. लेकिन कांग्रेस पार्टी को शायद उत्तर प्रदेश में इस गठबंधन के लिए काफी झुक कर आना होगा. क्योंकि कांग्रेस पार्टी ने तीन राज्यों में चुनावी हार के बाद नेतृत्व करने की अपनी उसे पोजीशन को गंवा दी है.