पश्चिम बंगाल के आसनसोल लोकसभा क्षेत्र से सांसद बाबुल सुप्रियो ने फेसबुक पर एक भावुक पोस्ट लिखकर राजनीति से संन्यास का ऐलान किया था. बाबुल सुप्रियो ने तब ये कहा था कि समाजसेवा के लिए राजनीति जरूरी नहीं. उस समय काफी मान-मनौव्वल और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद बाबुल सुप्रियो ने संसद की सदस्यता से अपना इस्तीफा वापस ले लिया था.
तब माना यही जा रहा था कि बाबुल सुप्रियो मान गए हैं लेकिन ऐसा था नहीं. संसद का मॉनसून सत्र समाप्त होने के कुछ ही दिन बाद नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में मंत्री रहे बाबुल सुप्रियो ने बीजेपी से किनारा कर अब पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का दामन थाम लिया है. बाबुल सुप्रियो ने शनिवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी की मौजूदगी में भगवा छोड़कर टीएमसी का झंडा थाम लिया.
बाबुल सुप्रियो का टीएमसी में शामिल होना कोई अचानक घटित हुई घटना नहीं है. बाबुल सुप्रियो के बीजेपी छोड़ने, किसी दूसरे दल में जाने की पटकथा तो उसी दिन लिखी जा चुकी थी जिस दिन नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल विस्तार से पहले केंद्र में मंत्री के पद से उनका इस्तीफा लिया गया. मोदी कैबिनेट में जब स्थान नहीं मिला था तभी से बाबुल सुप्रियो का पार्टी से प्रस्थान शुरू हो गया था यानी वे पार्टी से दूर होने लगे थे.
सियासत में आते ही छा गए थे बाबुल सुप्रियो
बाबुल सुप्रियो सियासत में आने से पहले पार्श्व गायन के क्षेत्र में जाना-पहचाना नाम थे. 2014 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले बाबुल सुप्रियो ने गायन की दुनिया से सियासत में एंट्री ली और आते ही छा गए. बाबुल सुप्रियो को बंगाल में अपनी सियासी जमीन तैयार करने की कोशिशों में जुटी बीजेपी ने आसनसोल लोकसभा सीट से टिकट दे दिया और बाबुल सुप्रियो ने जबरदस्त जीत भी हासिल कर ली. यहां से सुप्रियो की सियासत का काफिला चल निकला और बीजेपी ने उन्हें केंद्र सरकार में मंत्री पद से भी नवाजा.
बाबुल अपने बूते जीते थे आसनसोल की जंग
बाबुल सुप्रियो की आसनसोल संसदीय सीट एकमात्र ऐसी सीट थी जिसे बीजेपी ने अपने बूते जीता था. तब (2014 के चुनाव में) बीजेपी को बंगाल में दो संसदीय सीटों पर जीत मिली थी. आसनसोल के अलावा दूसरी सीट दार्जिलिंग की थी जो 2009 में भी बीजेपी के कब्जे में थी. दार्जिलिंग से एसएस अहलूवालिया जीतकर आए थे लेकिन वहां बीजेपी अकेले नहीं, गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के साथ गठबंधन कर, उसके समर्थन से चुनाव मैदान में उतरी थी.
इस तरह शुरू हुआ सुप्रियो की सियासत का डाउनफाल
केंद्र सरकार में पर्यावरण मंत्री रहे बाबुल सुप्रियो आसनसोल से बीजेपी के टिकट पर 2019 के लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज कर लगातार दूसरी बार संसद पहुंचे. इसके बाद बारी आई बंगाल चुनाव की. बीजेपी पूरी ताकत से लड़ी और केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो को भी अरूप विश्वास के खिलाफ टालीगंज विधानसभा सीट से चुनावी रणभूमि में उतारा गया लेकिन इसबार सुप्रियो का जादू नहीं चला. बाबुल सुप्रियो को टीएमसी के दिग्गज अरूप विश्वास से मात खानी पड़ी और इसी के साथ शुरू हो गया सुप्रियो की सियासत का डाउनफाल भी.
बाबुल ने फेसबुक पर पोस्ट कर बयान किया था अपना दर्द
पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद 7 जुलाई को केंद्र सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार हुआ. मंत्रिमंडल विस्तार से पहले कई मंत्रियों के इस्तीफे लिए गए और कई नए चेहरों को जगह दी गई. जिन मंत्रियों के इस्तीफे लिए गए, उनमें एक नाम बाबुल सुप्रियो का भी था. इस्तीफे के कुछ दिन बाद बाबुल सुप्रियो ने फेसबुक पोस्ट के जरिए अपना दर्द बयान भी किया था और कहा था कि अपने लिए दुखी हूं. कुछ दिन और गुजरे थे कि अचानक बाबुल सुप्रियो ने फेसबुक पर भावुक पोस्ट लिखकर संसद की सदस्यता, राजनीति से संन्यास का ऐलान कर दिया.
अपनी बात पर अडिग नहीं रह पाए सुप्रियो
बाबुल सुप्रियो ने सियासत से संन्यास का ऐलान किया था. उन्होंने अपने इसी पोस्ट में ये भी साफ किया था कि उन्होंने केवल एक ही पार्टी की है बीजेपी पश्चिम बंगाल और वे किसी दूसरे दल में शामिल नहीं होंगे. बाबुल सुप्रियो अपनी बात पर अडिग नहीं रह पाए. सुप्रियो ने सियासत से संन्यास नहीं लिया और बंगाल की सत्ताधारी टीएमसी में शामिल भी हो गए.