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'1947 में ही नेहरू-पटेल ने भारत को जोड़ दिया था, अभी कांग्रेस को जोड़ने की जरूरत', गुलाम नबी आजाद ने दी सलाह  

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद का इस्तीफा पार्टी के लिए जम्मू-कश्मीर समेत राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा नुकसान माना जा रहा है. इस्तीफा देते समय उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर कई सावल उठाए थे. वह बयान दे चुके हैं कि पार्टी का नया अध्यक्ष भी कठपुतली ही होगा. उन्होंने आरोप लगाया है कि पार्टी पर वरिष्ठ नेताओं को किनारे कर दिया गया है. उन्हें अपमानित किया गया है. उन्होंने कहना है कि राहुल गांधी ने पार्टी के अंदर बात रखने की जगह भी नहीं छोड़ी है.

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गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस पर उठाए सवाल (फाइल फोटो)
गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस पर उठाए सवाल (फाइल फोटो)

कांग्रेस से इस्तीफा दे चुके गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा पर सवाल खड़े किए. उन्होंने आजतक से बातचीत में कहा कि भारत को इस समय जोड़ने की जरूरत नहीं है. जोड़ने का काम 1947 के बाद कर लिया गया था. नेहरू और सरदार पटेल ने मिलकर वो काम किया था. तब पूरे भारत को साथ लाया गया था. अब इस समय ये कोई नहीं बोल सकता कि भारत अलग है. भारत जुड़ा हुआ है. वैसे भी भारत जोड़ो यात्रा से क्या कांग्रेस पार्टी में चल रही समस्याएं दूर हो जाएंगी. नहीं हो सकती. इस समय भारत जोड़ो नहीं कांग्रेस जोड़ों की जरूरत है.

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आजाद ने यह भी साफ कर दिया कि उनकी वजह से कभी कांग्रेस मुक्त भारत वाले नैरेटिव को मजबूती नहीं मिली है. उन पर जो पार्टी के नेता ऐसा लगातार आरोप लगा रहे हैं, असल में उन्होंने ही पार्टी के अंदर रहते हुए कांग्रेस मुक्त भारत की पटकथा लिखी है.

गुलाम नबी ने सीधा-सीधा इस्तीफा देने के बजाए पांच पन्ने की चिट्ठी लिखने पर बताया कि अगर वह ऐसा नहीं करते तो फिर यह कहा जाता कि पार्टी ने सबकुछ दिया और ऐन वक्त पर आजाद छोड़कर चले गए. उन्होंने कहा कि कुछ उदाहरण देना जरूरी था, यह बताना था कि आखिर पार्टी ने क्या नहीं किया, हमने क्या प्रयास किए, क्या उम्मीद रखी, लेकिन जब बच्चे ही बड़ों की घर में इज्जत ना करे तो अकलमंदी इसी में है कि बड़ों को घर से चले जाना चाहिए.

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कांग्रेस ने कई मुद्दों पर मुझे नजरअंदाज किया

गुलाम नबी आजाद ने कहा कि कांग्रेस से कई मुद्दों पर उनकी नाराजगी रही. आजाद ने कहा कि उन्हें इस बात की पीड़ा रही कि जिस पार्टी को उन्होंने इतने साल दिए, लगातार काम किया, उसी पार्टी ने कई मुद्दों पर उन्हें नजरअंदाज कर दिया. आजाद बताते हैं कि जब हमने 2020 में सोनिया गांधी को कहा था कि कैंपेन कमेटी अभी से बनानी चाहिए. इन्होंने स्टार कैंपेन की जो लिस्ट जारी की उसमें मेरा नाम ही नहीं था. 40 साल में पहली बार मुझे ड्रॉप कर दिया गया.

पीएम के लिए चोर शब्द का इस्तेमाल ठीक नहीं

गुलाम नबी आजाद ने बताया कि 2019 के चुनाव में राहुल गांधी 'चौकीदार चोर है' का नैरेटिव लेकर आए. इस पर कांग्रेस कमेटी की मीटिंग बुलाई गई लेकिन इस नैरेटिव पर कोई वरिष्ठ नेता सहमत नहीं हुआ. आप प्रधानमंत्री के लिए ऐसे शब्द का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं. महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दे भी उठाए जा सकते थे.

कुछ देर धरने पर बैठने से कुछ नहीं होता

आजाद ने जोर देकर कहा गया कि भाषण देने से, कुछ देर के लिए किसी धरने में बैठने से, फोटो खिचवाने से कुछ नहीं होता. गुलाम नबी आजाद ने कहा कि उन्होंने अपने स्तर पर पार्टी को मजबूत करने की पूरी कोशिश की. समय-समय पर सुझाव दिए.

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वे कहते हैं कि मुझे भड़काने का प्रयास किया गया. मुझ पर झूठे आरोप लगाए गए. कांग्रेस नेताओं को फोन करके कहा जाता था कि गुलाम के खिलाफ सोशल मीडिया पर कुछ बोल दो, उस पर ये आरोप लगा दो.

 

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