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जानें बीजेपी संसदीय बोर्ड की पावर, जिससे बाहर किए गए गडकरी और शिवराज

बीजेपी अध्यक्ष जय प्रकाश नड्डा ने पार्टी के संसदीय बोर्ड का गठन कर लिया है. इस बार बड़ा बदलाव नितिन गडकरी और शिवराज सिंह चौहान का इसमें नाम ना होना है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीजेपी का संसदीय बोर्ड काम कैसे करता है. क्या-क्या काम उसके हिस्से आता है और पार्टी में निर्णय लेने को लेकर इसकी पावर कितनी होती है?

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नितिन गडकरी और शिवराज सिंह चौहान
नितिन गडकरी और शिवराज सिंह चौहान
स्टोरी हाइलाइट्स
  • शाहनवाज हुसैन को दिखाया बाहर का रास्ता
  • केन्द्रीय चुनाव समिति में रखे गए हैं 15 सदस्य

अमित शाह के सियासी उत्तराधिकारी के तौर पर जेपी नड्डा ने बीजेपी की कमान तो काफी पहले संभाल ली थी, लेकिन पार्टी के संसदीय बोर्ड का गठन अब हुआ है. बीजेपी की ओर से नए संसदीय बोर्ड और केन्द्रीय चुनाव समिति का एलान कर दिया गया है. खास बात ये है कि इन दोनों समितियों से केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की छुट्टी कर दी गई है तो शाहनवाज हुसैन को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है. 

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बीजेपी संसदीय बोर्ड का गठन

बीजेपी में आठ साल बाद पार्टी के संसदीय बोर्ड का गठन किया गया है. संसदीय बोर्ड में पार्टी अध्यक्ष के अलावा 10 सदस्य शामिल किए गए हैं. इनमें नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह, अमित शाह, बीएस येदयुरप्पा, सर्बानंद सोनोवाल, के. लक्ष्मण, इकबाल सिंह लालपुरा, सुधा यादव, सत्यनारायण जटिया और बीएल संतोष (सचिव) शामिल हैं. 

2014 में अमित शाह ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान संभाली थी, तब उन्होंने संसदीय बोर्ड का गठन किया था. इसमें नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह, अमित शाह, नितिन गडकरी, थावर चंद गहलोत, शिवराज सिंह चौहान, बीएल संतोष शामिल थे. इसके अलावा अरुण जेटली, अनंत कुमार, सुषमा स्वराज भी सदस्य थे, जिनका निधन हो जाने से तीन जगहें खाली थीं. वेंकैया नायडू के उपराष्ट्रपति और थावरचंद गहलोत के राज्यपाल बनने से उनकी जगह भी खाली थी. 

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अब जब संसदीय बोर्ड का फिर से गठन किया गया है, तो नितिन गडकरी और शिवराज सिंह चौहान को जगह नहीं मिली है. इनकी जगह, बीएस येदयुरप्पा, सर्बानंद सोनोवाल, के. लक्ष्मण, इकबाल सिंह लालपुरा, सुधा यादव और सत्यनारायण जटिया को नए चेहरे को तौर पर संसदीय बोर्ड में शामिल किया गया है. 

बीजेपी संसदीय बोर्ड का काम

बीजेपी संसदीय बोर्ड काफी पावरफुल होता है. पार्टी की संसदीय गतिविधियों के संचालन और समन्वय के लिए राष्ट्रीय कार्यकारिणी एक संसदीय बोर्ड का गठन करती है. संसदीय बोर्ड ही इससे जुड़े नियम बनाता है. पार्टी अध्यक्ष के अतिरिक्त इसमें दस सदस्य होते हैं. इनमें से एक सदस्य संसद में पार्टी का नेता होता है, जबकि राष्ट्रीय अध्यक्ष संसदीय बोर्ड का प्रमुख होता है.
 
अध्यक्ष पार्टी के महामंत्रियों में से एक को संसदीय बोर्ड का सचिव नियुक्त करता है. संसदीय बोर्ड का काम मंत्रिमंडल गठन पर मार्गदर्शन करने, विधानमंडल और संसदीय दल की गतिविधियों की निगरानी करने, अनुशासन भंग के मामले में विचार करने इत्यादि का होता है. इस तरह से समझ सकते हैं कि बीजेपी की केंद्र से लेकर राज्य सरकारों के गठन में संसदीय बोर्ड की भूमिका कितनी अहम होती है. 


बीजेपी की केन्द्रीय चुनाव समिति

संसदीय बोर्ड के साथ-साथ बीजेपी की केन्द्रीय चुनाव समिति का भी गठन किया गया है. इसमें 15 सदस्यों को शमिल किया गया है. केन्द्रीय संसदीय समिति की तरह चुनाव समिति के अध्यक्ष भी जेपी नड्डा ही होंगे. इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह, अमित शाह, बीएस येदियुरप्पा, सर्बानंद सोनोवाल, के लक्ष्मण, इकबाल सिंह लालपुरा, सुधा यादव, सत्यनारायण जटिया, भूपेंद्र यादव, देवेंद्र फडणवीस, ओम माथुर, बीएल संतोष, वनथी श्रीनिवास को जगह मिली है. 

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केन्द्रीय चुनाव समिति का काम

बीजेपी में केन्द्रीय चुनाव समिति भी काफी ताकतवर होती है. इसमें संसदीय बोर्ड के सदस्यों के अलावा निर्वाचित आठ सदस्य होंगे. महिला मोर्चा की अध्यक्ष पदेन सदस्य होंगी. यह समिति संसद और विधानमंडलों के चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन को अंतिम रूप देती है. चुनाव अभियानों का भी संचालन करती है. केन्द्रीय चुनाव से लेकर राज्यों के चुनाव और टिकट वितरण में कमेटी की अहम भूमिका होती है.

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