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राकेश टिकैत बोले- लखीमपुर खीरी मामले में बीजेपी से समझौता नहीं, आग लगने से बचाया

गृहराज्य मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए किसान नेता ने कहा कि अजय मिश्रा टेनी के मंत्री रहते हुए उनके बेटे आशीष मिश्रा पर लगे आरोप की निष्पक्ष जांच नहीं हो सकती है. इसलिए गृहराज्य मंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए.

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राकेश टिकैत, किसान नेता (फोटो- आजतक)
राकेश टिकैत, किसान नेता (फोटो- आजतक)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • किसान नेता ने गृहराज्य मंत्री के इस्तीफे की मांग की
  • टिकैत बोले, मंत्री रहते हुए निष्पक्ष जांच संभव नहीं
  • मृतकों का शरीर रखकर नहीं हो सकता समझौता

किसान नेता राकेश टिकैत ने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव कार्यक्रम में लखीमपुर खीरी मामले को लेकर कहा कि उन्होंने बीजेपी से कोई समझौता नहीं किया है बल्कि आग लगने से बचा लिया. क्योंकि घर के सामने मृत शरीर पांच दिनों तक रखकर समझौता नहीं किया जा सकता है. अंतिम संस्कार तक सारी बातें मानी गईं. मृतकों के परिवारों को मुआवजा दिया गया, सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया. वहीं गृहराज्य मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए किसान नेता ने कहा कि अजय मिश्रा टेनी के मंत्री रहते हुए उनके बेटे आशीष मिश्रा पर लगे आरोप की निष्पक्ष जांच नहीं हो सकती है. इसलिए गृह राज्य मंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए.

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दरअसल लखीमपुर खीरी के तिकुनिया में जिस तरह किसानों का आंदोलन हिंसक हुआ और किसानों की मौत के बाद किसानों की नाराजगी अपने चरम पर पहुंची उससे सरकार के हाथ पांव फूल गए. रातोरात जिस तरीके से प्रियंका गांधी और दूसरे नेताओं ने लखीमपुर पहुंचने की ठानी प्रदेश सरकार के लिए हालात को संभालना और भी भारी हो रहा था. ऐसे में राकेश टिकैत ने योगी सरकार के साथ समझौता कराने में अहम भूमिका निभाई.

और पढ़ें- लखीमपुर हिंसाः स्कूटर से क्राइम ब्रांच के दफ्तर पहुंचे थे आशीष मिश्रा, ड्राइव कर रहे थे MLA

इससे पहले किसान चारों शवों के पोस्टमॉर्टम को तैयार नहीं थे, मांग थी कि बीजेपी के गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी पर मुकदमा दर्ज हो, उनके बेटे को गिरफ्तार किया जाए. इसके साथ-साथ गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के इस्तीफे की मांग थी. वहीं राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) गाजीपुर बॉर्डर से रात को ही चले और देर रात लखीमपुर खीरी के तिकुनिया के उस गुरुद्वारे में पहुंचे जहां चारों किसानों के शव रखे हुए थे.

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प्रशासन की ओर से कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बाद किसानों के परिजन उनका पोस्टमॉर्टम कराने के लिए राजी हुए थे. सोमवार को उन चारों का पोस्टमॉर्टम किया गया. मंगलवार को उन चार में से लवप्रीत सिंह (19), नक्षत्र सिंह (65) और दलजीत सिंह (42) का अंतिम संस्कार मंगलवार को हो चुका है. लेकिन गुरविंदर सिंह (22) का अंतिम संस्कार रोक दिया गया था.

बाद में चौथे किसान गुरविंदर सिंह का छह अक्टूबर की सुबह अंतिम संस्कार किया गया. किसान नेता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) के मनाने के बाद देर रात गुरविंदर का दोबारा पोस्टमॉर्टम किया गया था. मंगलवार को पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट (Postmortem Report) आने के बाद परिजनों ने रिपोर्ट को गलत बताते हुए दोबारा पोस्टमॉर्टम की मांग की थी और अंतिम संस्कार रोक दिया था. इसके बाद गुरविंदर के शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम किया गया.

 

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