क्या सरकार लोगों के बीच सहमति बनाने में विफल हो रही है. चाहे वह केंद्र हो या राज्य सरकारें हों. क्या लोगों द्वारा अलग-अलग मुद्दों पर किया जा रहा विरोध लोकतंत्र के लिए खतरनाक है. भुवनेश्वर से भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी ने इस पर कहा कि जब से मोदी सरकार बनी है. तब से आज तक इसे किसी ने विघटन वाली सरकार नहीं कहा. जब हम अपने समय से आगे सोचते हैं, तो विरोध होता है. पिछले 8 सालों में हर सकारात्मक कदम पर प्रतिक्रिया हुई है. वह भी एकदम बराबर स्तर पर. 11 बिल भेजे गए. कई स्टैंडिंग कमेटी के पास. पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल 78 बार कमेटी मिली. इसके बाद बिल बना. बायोलॉजिकल डायवर्सिटी अमेंडमेंट बिल. प्रोहिबिशन ऑफ चाइल्ड मैरिज अमेंडमेंट 2020.. ऐसे कई उदाहरण हैं. हम लगातार सहमति बनाने का प्रयास कर रहे हैं. ये बात तो प्रधानमंत्री मोदी भी बोलते हैं. आर्टिकल 368 स्पष्ट कहता है कि हम संवैधानिक बदलाव करना चाहते हैं तो कर सकते हैं. अगर 50 फीसदी से ज्यादा लोग सहमत है.
संसद सत्र में विपक्ष के लिए समय ही नहीं बचाः सुखेंदु शेखर
पश्चिम बंगाल से टीएमसी राज्य सभा सांसद सुखेंदु शेखर रे ने कहा कि विपक्ष को लगता है कि कुछ गलत हो रहा है. तब वह विरोध करती है. पर यहां तो विघटन की ही सरकार है. हम किसी पर आरोप नहीं लगाना चाहते. लेकिन लोगों के माइंडसेट से सहमति बनती है. लोकपाल, जीएसटी पर सहमति बनी थी. विघटन की वजह है समय की सीमा, विपक्ष को लोगों की समस्याों को समझने का समय कम मिलता है. अब संसद कम समय के लिए चलता है. संसद को ज्यादा दिनों के लिए चलाया जाना चाहिए. यूके में विपक्ष को 20 दिन का समय दिया जाता है. संसद में चर्चा करने के लिए. हमारे यहां संसद तो इतना कम समय के लिए चलता है कि विपक्ष को मौका नहीं मिलता. दूसरी वजह ये है कि संसदीय समितियों को बिल जाता ही नहीं है. तीसरी वजह ये है कि पक्ष कभी भी विपक्ष से बात नहीं करती. ताकि सहमति बन सके. प्रणब मुखर्जी, अटल जी, जेटली जी, सुषमा जी ये काम करते थे.
अब तो रात में भी बिल पर चर्चा होती हैः अपराजिता
अपराजिता ने कहा कि 14वीं से 17वीं संसदीय सभा की प्रोडक्टिविटी देखेंगे तो यह 90 फीसदी से ज्यादा है. 17वीं लोकसभा ने बेहतर परफॉर्म किया है. खूब चर्चा हुई है. हमने बिल पर रात में भी बात की है. हमारे स्पीकर लोकसभा के बाद भी विपक्ष से बात करते थे. किसान आंदोलन के समय हर विपक्षी नेता को बुलाया गया था ताकि चर्चा की जा सके.
पहले 120 दिन संसद चलता था, अब 70 दिनः प्रद्युत बोरदोलोई
असम से कांग्रेस के लोकसभा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने कहा कि जब आप बजट सेशन की बात करेंगे. 17 बिल्स बिना सेशन के पास हो गए. कई वजहों से विघटन होती है. अगर 50, 60, 70 के दशक में संसद की बैठक 120 दिन से ज्यादा होती थी. अब 70 दिन होती है. संसदीय कमेटी बेहद जरूरी है. ये कानून बनाने में मदद करती है. यूपीए-2 में जितने बिल्स कमेटियों को जाते थे, आज नहीं जाते. चीन का युद्ध 1962 की बात है. तब विपक्ष का युवा सांसद अटल बिहारी बाजपेयी जाकर नेहरू से मिले. उन्होंने स्पेशल संसद बैठक बुलाने की बात कही थी. नेहरू मान गए थे. आपको विपक्ष की इज्जत करनी चाहिए. उन्हें मौका देना चाहिए. अगर आप उनसे बात ही नहीं करेंगे तो मुद्दों का समाधान कैसे होगा.
किसान बिल वापस लिया, अग्निपथ भी वापस होगाः खालिक
अपराजिता ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ये बात मानती है कि बिना सहमति के काम नहीं होता. हम सिर्फ सरकार चलाना नहीं चाहते. हम राष्ट्र को आगे लेकर जाना चाहते हैं. ये सबकी जिम्मेदारी है. इस पर कांग्रेस के लोकसभा सांसद अब्दुल खलिक ने कहा कि डिसेंट, डिबेट और डिरप्सन डेमोक्रेसी के हिस्से हैं. ये बात अरुण जेटली जी ने कही थी. विपक्ष ने कई बार कहा कि फार्म लॉ को स्टैंडिंग कमेटी को भेजो. नहीं माने. बिल वापस लेना पड़ा. अग्निपथ पर भी सरकार को अपने कदम पीछे हटाने होंगे. ये अपना एजेंडा पूरा करने के लिए अपनी बहुमत का फायदा उठाते हैं. तीन तलाक पर तुरंत कानून बनाया. सबरीमाला पर रिव्यू क्यों? सहमति का मुख्य काम सत्ता पक्षा को करना चाहिए. विपक्ष का नहीं. फिर भी हम सहयोग करेंगे. सीएए से बिल से कानून हो गया. लेकिन अभी तक रूल ही नहीं बना पाया. यहां किसी को नागरिकता नहीं मिली. इतनी जल्दबाजी क्यों?
देश में एंटी-ग्रोथ, एंटी-इंडिया एजेंडा चलाया जा रहा हैः अपराजिता
अपराजिता ने तीन उदाहरण दिया. जीएसटी बिल अप्रैल-मई 2017 में आया. इससे पहले इस पर काफी ज्यादा मेहनत की गई. फार्म लॉ की बात करें तो लोगों ने जबरदस्ती विरोध किया. लाल किला की घटना, शाहीनबाग की घटना हुई. लगातार लोगों से बात की जा रही है. लेकिन यहां एंटी-ग्रोथ, एंटी-इंडिया एजेंडा चल रहा है. कुछ लोग सरकार के विकास की गति को रोकना चाहते हैं. अब्दुल खालिक कहते हैं कि CAA का नियम क्यों नहीं बना अब तक. सुखेंदु शेखर ने कहा कि प्रणब मुखर्जी ने जीएसटी को पेश किया था. तब भाजपा ने इसका विरोध किया था. लेकिन बाद में जब ये लोग लेकर आए तो सभी विपक्षी पार्टियों ने जीएसटी पर अपनी सहमति जताई. बिल को कानून में बदलने में मदद की.
हर उस बिल पर बात होनी चाहिए जो आम आदमी के फायदे की होः प्रद्युत
प्रद्युत बोरदोलोई ने कहा कि राज्यसभा को सहमति बनाने के लिए बनाया गया है. राजीव गांधी की सरकार के समय उनके पास सबसे ज्यादा बहुमत था. लेकिन उनके सरकार के समय में भी राज्यसभा ने बिल रोक दिया था. प्रेसाइडिंग ऑफिसर बायस्ड होते हैं आजकल. सुखेंदु ने कहा कि राज्यसभा के नियमों में है कि अगर कोई मामला कोर्ट में है, तो उस पर चर्चा नहीं होगी. अपराजिता ने कहा पीएम मोदी की सरकार निर्णय लेती है. उसे पूरा करती है. जम्मू एंड कश्मीर रीऑर्गेनाइजेशन बिल पर दोनों सभाओं में वोटिंग हुई थी. दोनों सभाओं में भारी सहमति से बिल बना. हमने हमेशा विपक्ष को मौका दिया था. इस पर अब्दुल खालिक ने कहा कि जल्दबाजी में फैसला लिया गया था. वोटिंग थी. सहमति कहां थी. प्रद्युत ने कहा कि हमें उन बिल पर काम करना चाहिए जो आम आदमी के फायदे के हो.