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लड़ाई गाजा की और भारत में सियासी बवाल... शरद पवार के बयान पर भूचाल, फडणवीस ने 26/11 याद दिलाया तो हिमंता ने कही ये बात

इजरायल और हमास की जंग के बीच इस मुद्दे पर महाराष्ट्र में सियासी हलचल बढ़ गई है. जंग के बीच एनसीपी चीफ शरद पवार खुलकर फिलिस्तीन के समर्थन में उतर आए हैं तो वहीं दूसरी तरफ देवेंद्र फडणवीस और हिमंता बिस्वा सरमा ने पवार पर निशाना साधा है.

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शरद पवार/हिमंता बिस्वा सरमा/देवेंद्र फडणवीस (File Photo)
शरद पवार/हिमंता बिस्वा सरमा/देवेंद्र फडणवीस (File Photo)

इजरायल और हमास के बीच पिछले 11 दिनों से जंग जारी है. लेकिन गाजा-पट्टी पर जारी इस जंग का असर भारत की सियासत पर दिखने लगा है. हाल ही में एनसीपी चीफ शरद पवार ने एक बयान दिया था, जिसमें उन्होंने पीएम मोदी के इजरायल को समर्थन देने को 'दुर्भाग्यपूर्ण' करार देते हुए कहा था कि भारत के पहले के प्रधानमंत्री फिलिस्तीन के साथ मजबूती से खड़े थे. लेकिन पीएण मोदी ने वास्तविक मुद्दे की अनदेखी की.

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इजरायल-फिलिस्तीन पर शरद पवार के बयान के बाद बीजेपी ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. पहले तो महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने पवार पर निशाना साधा और फिर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले को गाजा भेजने की बात कह दी. शरद पवार पर निशाना साधते हुए फडणवीस ने मुंबई हमलों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा,'आतंकवादी हमलों के कारण मुंबई को बहुत नुकसान हुआ है. विशेष रूप से 26/11 के दौरान, मुंबई ने कई नागरिकों को खो दिया था.'

आतंकवाद का विरोध करता है भारत

देवेंद्र फडणवीस ने कहा,'इजरायल और फिलिस्तीन के मुद्दे पर शरद पवार को वोट बैंक की राजनीति से दूर रहते हुए आतंकवाद की निंदा करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत किसी भी रूप में, किसी के भी खिलाफ आतंकवाद का लगातार विरोध करता रहा है. जब पूरी दुनिया ने इजराइल में निर्दोष लोगों की हत्या की निंदा की तो भारत ने भी ऐसा ही किया है. इसलिए शरद पवार को भी आतंकवाद के खिलाफ वही भाषा बोलनी चाहिए.'

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इजरायल-फिलिस्तीन मुद्दे पर अलग राय

इस बीच शरद पवार पर भड़के असम के सीएम ने सुप्रिया सुले को लेकर टिप्पणी की. उन्होंने कहा,'मुझे लगता है कि शरद पवार सुप्रिया मैडम को हमास के लिए गाजा लड़ने भेजेंगे.' इजरायल-फिलिस्तीन के मुद्दे पर महाराष्ट्र में शुरू हुई इस सियासी उठापटक में एक तरफ बीजेपी इजरायल के साथ खड़ी नजर आ रही है तो वहीं ज्यादातर गैर भाजपाई दल खुलकर फिलिस्तीन के समर्थन में बयान दे रहे हैं.

शरद पवार ने क्या कहा था?

पवार ने कहा था, 'पूरी जमीन फिलिस्तीन की है और इजरायल ने उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया है. वह जगह, जमीन और घर, सब कुछ फिलिस्तीन का था और बाद में इजरायल ने उस पर कब्जा कर लिया. इजरायल एक बाहरी व्यक्ति है और जमीन मूल रूप से फिलिस्तीन की है." उन्होंने कहा था कि एनसीपी उन लोगों के साथ खड़ी है जो मूल रूप से इजरायल के रहने वाले हैं.

पीएम के स्टैंड को बताया दुर्भाग्यपूर्ण

शरद पवार ने आगे कहा, 'इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, जवाहरलाल नेहरू, अटल बिहारी वाजपेयी सभी के विचार फिलिस्तीन के साथ खड़े होने के समान थे, यह हमेशा भारत सरकार का रुख था. भारत कभी किसी और के साथ खड़ा नहीं हुआ. भारत हमेशा उन लोगों के साथ खड़ा रहा जो मूल रूप से खड़े थे. वहां की जमीन और मकानों के मालिक हैं. यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि पहली बार हमारे प्रधानमंत्री असली मुद्दे को छोड़कर इजरायल के साथ खड़े हैं. उन्होंने असली मुद्दे को नजरअंदाज कर दिया. हमें अपने रुख पर स्पष्ट होना चाहिए. एनसीपी का रुख स्पष्ट होना चाहिए. हम कायम हैं वे लोग जो मूल रूप से उस भूमि के निवासी हैं.'

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BJP ने की थी पवार के बयान की निंदा

शरद पवार की इस टिप्पणी की बीजेपी की ओर से भी निंदा की गई थी. सीएम हिमंता से पहले केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि यह बहुत परेशान करने वाला है, जब शरद पवार जैसे वरिष्ठ नेता इजरायल में आतंकवादी हमले पर भारत के रुख पर 'बेतुके बयान' देते हैं. केंद्रीय मंत्री गोयल ने एक ट्वीट में कहा था, 'पवार जी उसी सरकार का हिस्सा थे, जिसने बाटला हाउस मुठभेड़ पर आंसू बहाए थे और भारतीय धरती पर आतंकी हमले होने पर सोए थे.'

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