जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक सवाल के जवाब में कहा कि ‘जल जीवन मिशन’ को जनांदोलन बनाकर लागू किया जा रहा है. इसलिए इससे जुड़ी जिला स्तरीय योजनाओं में हर स्तर पर सांसदों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी. जानें और क्या-क्या दिया उन्होंने सांसदों को...
‘माननीयों’ से पूछकर बनेगी योजना
जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लोकसभा में महाराष्ट्र के नन्दूरबार से सांसद डॉक्टर हीना वी. गवित के एक सवाल के जवाब में कहा कि ‘जल जीवन मिशन’ को लेकर उन्होंने राज्यों के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कहा है कि जब भी जिला स्तर पर जल जीवन मिशन की योजना बनायी जाए तो उसमें स्थानीय सांसदों के सुझावों को स्थानीय तौर पर शामिल किया जाए. उनके सुझाव के बाद तैयार रिपोर्ट पर भी सांसदों से अनुमति ली जाए. यदि किसी तकनीकी वजह से किसी क्षेत्र या गांव को योजना में शामिल नहीं किया जा सकता है तो उसे मीटिंग मिनट्स में उल्लेखित किया जाए और उसका कारण भी बताया जाए.
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समय से हो सारा काम
शेखावत ने कहा कि सांसदों से पूछकर योजना बनाने का काम समयबद्ध तरीके से होगा. अधिकारियों को सांसदों से 15 दिन के भीतर जल जीवन मिशन की जिला स्तरीय योजना पर सुझाव लेकर सूचना देनी होगी.
हर उद्धाटन ‘माननीय’ की उपस्थिति में
गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि जल जीवन मिशन से जुड़ी योजना को लेकर कई बार स्थानीय लोगों को जानकारी नहीं मिलने की उन्हें सूचना है. इसलिए नए नोटिफिकेशन में प्रावधान किया गया है कि इससे जुड़े विभाग जल जीवन मिशन से जुड़ा कोई भी कार्यक्रम जैसे कि भूमि पूजन, शिलान्यास इत्यादि करें तो उसमें संसद सदस्य की उपस्थिति अनिवार्य है और इसके लिए उसी के अनुरूप प्रोटोकॉल का भी पालन किया जाए.
दूषित पानी के पुन: उपयोग की भी व्यवस्था
जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि जल जीवन मिशन इस बात का भी ध्यान रखा जा रहा है कि गांवों में उपयोग के बाद बचने वाले दूषित पानी का शोधन कर पुन: उपयोग में लाया जा सके या उससे भूजल के स्तर को सुधारने में उपयोग किया जा सके. इसके लिए व्यवस्थाएं कराने के लिए मिशन को मनरेगा के साथ और स्वच्छ भारत मिशन के साथ जोड़ा गया है.
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