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टिकट बंटवारे के बाद कर्नाटक बीजेपी में कलह, पूर्व CM शेट्टार को नड्डा ने बुलाया दिल्ली

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार को अपनी पहली सूची जारी की, जिसके बाद बगावत शुरू हो गई. पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार ने कहा कि वह किसी भी सूरत में चुनाव लडेंगे. शेट्टार के इस बयान के बाद पार्टी ने उन्हें दिल्ली तलब किया है.

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पूर्व सीएम जगदीश शेट्टार को बीजेपी ने दिल्ली बुलाया
पूर्व सीएम जगदीश शेट्टार को बीजेपी ने दिल्ली बुलाया

कर्नाटक में फिर से सरकार बनाने की कोशिशों में जुटी बीजेपी के लिए अपनों ने ही परेशानियां खड़ी कर दी हैं. मंगलवार को जैसे ही पार्टी ने अपने कैडिडेट्स की पहली लिस्ट जारी की, तो कुछ दिग्गजों को लिस्ट में अपना नाम नजर नहीं आया और फिर बगावत शुरू हो गई. पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार जो 6 बार विधायक रहे हैं, उन्हें बीजेपी ने इस बार टिकट नहीं देने की बात कही है और दूसरों के लिए रास्ता तैयार करने को बोला है. पार्टी के फैसले पर शेट्टार ने असहमति जाहिर की है, जिसके बाद बीजेपी प्रमुख जेपी नड्डा ने आज उन्हें दिल्ली बुलाया है.

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क्या कहा शेट्टार ने
शेट्टार ने कहा, 'मुझे हाईकमान का भी फोन आया कि मैं दूसरों को अवसर दूं. मैंने उनसे कहा कि मैं बीजेपी के लिए 30 साल से काम कर रहा हूं और पार्टी बनाई है. मैंने सीएम के रूप में भी काम किया है. मैंने उनसे पूछा कि मैं 6 बार विधायक चुना गया हूं, मेरे चुनाव न लड़ने का क्या कारण है?  क्या सर्वे कहता है कि मैं जीत नहीं रहा हूं? मेरी हाईकमान से विनती है कि मुझे सातवीं बार चुनाव लड़ने दिया जाए. मेरा परिवार जनसंघ के दौर से आरएसएस और बीजेपी से जुड़ा रहा है. मुझे पहले बता दिया गया होता तो यह सम्मानजक होता. मैं इस फैसले से आहत हुआ हूं. मैं किसी भी कीमत पर चुनाव लड़ूंगा.'

कौन हैं शेट्टार?

जगदीश शेट्टार ने राजनीति में आने से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में सक्रिय भूमिका निभाई. उत्तरी कर्नाटक के इलाके में शेट्टार की पकड़ काफी मजबूत मानी जाती है. शेट्टार राज्य में येदियुप्पा के बाद बीजेपी के दूसरे सबसे बड़े लिंगायत नेता हैं. हुबली-धारवाड़ सेंट्रल सीट को उनकी परंपरागत सीट माना जाता है. दिसंबर 1955 में जन्मे शेट्टार 2012 से 2013 तक कर्नाटक के 21वें मुख्यमंत्री रहे. साथ ही वह विधानसभा में नेता विपक्ष और स्पीकर की भूमिका भी निभा चुके हैं. विद्यार्थी परिषद में शामिल होने से पहले वह RSS के सक्रिय कार्यकर्ता थे. 1994 में पहली बार वह विधानसभा पहुंचे और उसके बाद 1996 में राज्य में बीजेपी सचिव बनाए गए.

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एस एम कृष्णा की अगुवाई में जब कांग्रेस की सरकार बनी तब शेट्टार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष थे. साल 2005 में वह राज्य में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त हुए. इसके बाद 2006 में एच डी कुमार स्वामी की अगुवाई वाली जेडीएस-बीजेपी गठबंधन सरकार में उन्हें राजस्व मंत्री का जिम्मा सौंपा गया. 2008 में पार्टी की जीत के बाद शेट्टार को विधानसभा में निर्विरोध रूप से स्पीकर चुना गया. 2012 में बीजेपी ने जगदीश शेट्टार को कर्नाटक की कमान सौंपने का फैसला किया. हालांकि उनकी अगुवाई में हुए 2013 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को करारी शिकस्त मिली और कांग्रेस ने राज्य में सत्ता हासिल की. चुनाव के बाद शेट्टार को विधानसभा में नेता विपक्ष का पद दिया गया.  

52 नए चेहरों को मौका

भाजपा ने मंगलवार को कुल 224 में से 189 निर्वाचन क्षेत्रों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा की और सूची में 52 नए चेहरों को मौका दिया गया है. सुलिया सीट से विधायक और कैबिनेट मंत्री अंगारा सहित कम से कम आठ विधायकों का टिकट काट दिया गया है. भाजपा के कर्नाटक प्रभारी अरुण सिंह ने बताया कि लिस्ट में 32 उम्मीदवार ओबीसी, 30 अनुसूचित जाति और 16 अनुसूचित जनजाति के हैं. पार्टी सूत्रों के अनुसार, उम्मीदवारों में 51 लिंगायत और 41 वोक्कालिगा से हैं, जो राज्य के दो प्रमुख समुदाय हैं. 

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पार्टी ने अभी तक शिवमोग्गा और हुबली-धारवाड़ सेंट्रल के लिए टिकटों की घोषणा नहीं की है, इन सीटों का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ नेता के एस ईश्वरप्पा और जगदीश शेट्टार करते हैं.

दिग्गजों के खिलाफ उतारे मंत्री
पार्टी ने एक अहम कदम उठाते हुए ऐलान किया कि वरिष्ठ मंत्री वी सोमन्ना और आर अशोक क्रमशः वरुणा और कनकपुरा से पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और कर्नाटक कांग्रेस प्रमुख शिवकुमार के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे.सोमन्ना चामराजनगर से और अशोक पद्मनाभनगर से भी चुनाव लड़ेंगे. पूर्व मंत्री सीपी योगेश्वर एक बार फिर चन्नापटना में जनता दल (सेक्युलर) के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी के खिलाफ ताल ठोकेंगे.

दलबदलुओं को फिर से टिकट

विजयनगर में पार्टी ने मंत्री आनंद सिंह के बजाय उनके बेटे सिद्धार्थ सिंह को टिकट दिया है, जबकि अथानी में उसने पूर्व उपमुख्यमंत्री लक्ष्मण सावदी को टिकट नहीं दिया गया है और उनकी जगह महेश कुमाथल्ली को टिकट दिया है. महेश ने कांग्रेस छोड़कर 2019 में भाजपा की सरकार बनाने में मदद की थी. कुछ ऐसी खबरें भी हैं कि सावदी अब कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं. अधिकांश विधायक जो दलबदल कर भाजपा में शामिल हुए थे और बीजेपी को सत्ता में लाने में मदद की थी और बाद के उपचुनावों में भाजपा के टिकट पर जीत हासिल करने में भी सफल रहे थे, उन्हें फिर से टिकट दिया गया है.

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