लेफ्ट के नेता रहे कन्हैया कुमार कांग्रेस में शामिल हो गए. उन्होंने राहुल गांधी की मौजूदगी में कांग्रेस की सदस्यता ले ली. कन्हैया ने कहा कि अगर कांग्रेस नहीं बची तो देश नहीं बचेगा, इसलिए वो पार्टी में शामिल हो रहे हैं. हालांकि, ये वही कन्हैया हैं जिनके ऊपर देशद्रोह का केस चला था और यही वजह है कि बीजेपी उनके कांग्रेस में आने पर हमला कर रही है. बीजेपी के तमाम बड़े नेता कह रहे हैं कि कांग्रेस 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' के साथ आ गई है. आखिर कैसे कन्हैया छात्र राजनीति से राष्ट्र राजनीति में आ गए और क्यों कन्हैया सीपीआई छोड़कर कांग्रेस में आए? आइए जानते हैं...
बिहार के बेगूसराय में जन्मे हैं कन्हैया
कन्हैया कुमार का जन्म बिहार के बेगूसराय जिले के एक छोटे से गांव में हुआ था. ये गांव तेघरा विधानसभा में आता है, जहां सीपीआई को काफी समर्थन दिया जाता है. कन्हैया के पिता जयशंकर सिंह को पैरालिसिस है और काफी वक्त से बिस्तर पर ही हैं. उनकी मां मीना देवी एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं. उनके बड़े भाई प्राइवेट सेक्टर में काम करते हैं.
अपने स्कूल दिनों में कन्हैया अभिनय में रूचि रखते थे और इंडियन पीपल्स थियेटर एसोसिएशन के सक्रिय सदस्य थे. 2002 में कन्हैया ने पटना के कॉलेज ऑफ कॉमर्स में दाखिला लिया, जहां से उनकी छात्र राजनीति की शुरुआत हुई. पटना में पोस्ट ग्रेजुएशन खत्म करने के बाद कन्हैया ने जेएनयू में अफ्रीकन स्टडीज में पीएचडी के लिए एडमिशन ले लिया. कन्हैया कुमार 2015 में जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष चुने गए थे.
ये भी पढ़ें-- बस्ती में आग तो बेडरूम की चिंता नहीं, कांग्रेस बड़ा जहाज... कन्हैया कुमार के 5 बड़े डायलॉग
सुर्ख़ियों में ऐसे आए कन्हैया कुमार
9 फरवरी 2016 को जेएनयू में आतंकी अफजल गुरु की बरसी मनाई गई. इस दौरान यहां कथित तौर पर देशविरोधी नारे लगाए गए. कुछ वीडियो भी आए जिसमें कथित तौर पर कन्हैया देशविरोधी नारे लगाते दिखे. इन वीडियो में 'भारत तेरे टुकड़े होंगे', 'अफजल हम शर्मिंदा हैं' और 'आजादी, आजादी' के नारे लगाए गए. जेएनयू परिसर में हुई कथित नारेबाजी ने कन्हैया कुमार को पूरे देश में जाना-पहचाना नाम और चर्चित चेहरा बना दिया.
कन्हैया को जेल भेजा गया. देशद्रोह का केस भी लगा. 3 मार्च 2016 को हाईकोर्ट से उन्हें जमानत मिली. जमानत पर छूटने के बाद उसी रात कन्हैया सीधे जेएनयू कैंपस पहुंचे, जहां सैकड़ों की तादाद में स्टूडेंट्स उनका इंतजार कर रहे थे. रात करीब 10:30 बजे कन्हैया का भाषण शुरू हुआ. करीब 50 मिनट के भाषण में कन्हैया ने बीजेपी और आरएसएस के खिलाफ जमकर हमला बोला. सीधे पीएम मोदी को निशाने पर लिया. कन्हैया के भाषण से साफ था कि वो स्टूडेंट पॉलिटिक्स से राष्ट्रीय राजनीति में एंट्री के लिए तैयार हैं.
नहीं जीत पाए लोकसभा चुनाव
कन्हैया को लेफ्ट के बड़े चेहरे के तौर पर देखा जाने लगा. माना गया कि कन्हैया बदहाल लेफ्ट के लिए तारणहार होंगे. कन्हैया तब मोदी-विरोधी राजनीति के केंद्र बनकर उभरे थे. सीपीआई ने उन्हें देशभर में पार्टी काडरों में जोश भरने के अभियान पर लगा दिया.
2019 के लोकसभा चुनाव में सीपीआई ने उन्हें उनके गृह जिले बेगूसराय से मैदान में उतारा. मुकाबला केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह से था जो पिछली बार नवादा सीट से जीते थे. उम्मीद थी कि कन्हैया की बदौलत लेफ्ट बेगूसराय में इस बार लाल परचम लहरा देगी. लेकिन जब नतीजे आए तो कन्हैया 1-2 लाख नहीं बल्कि 4 लाख से भी ज्यादा अंतर से चुनाव हार गए. गिरिराज सिंह यहां से जीत गए. कन्हैया दूसरे नंबर पर रहे.
... शायद इसीलिए थामा कांग्रेस का हाथ
लोकसभा चुनाव के नतीजों से कन्हैया की चमक धुंधली जरूर पड़ी. सीपीआई में न तो उनका चुनाव से पहले वाला रुतबा रहा और न राष्ट्रीय स्तर पर पहले जैसी चर्चा. कभी आंबेडकर और लेफ्ट मूवमेंट की एकता की पैरवी करने वाले कन्हैया कुमार आज 'लाल कटोरे' को ही फेंक चुके हैं. वो भले ही अपने घर में पहले चुनावी इम्तिहान में बुरी तरह फेल हो गए लेकिन कांग्रेस को उनमें उम्मीद की किरण दिख रही है. बिहार में अस्तित्व के संकट से जूझ रही कांग्रेस को कन्हैया में वहां अपना भविष्य दिख रहा है.
ये भी पढ़ें-- क्यों लेफ्ट के भविष्य पर सवालिया निशान है कन्हैया कुमार का कांग्रेस में जाना
विवादों से रहा है नाता
- 9 फरवरी 2016 को जेएनयू में अफजल गुरु को फांसी के खिलाफ एक छात्र रैली में राष्ट्रविरोधी नारे लगाने के आरोप में देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया था. कन्हैया कुमार की अगवानी में 'भारत तेरे टुकड़े होंगे' और 'अफजल हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं' के नारे लगाने के आरोप लगे थे.
- कन्हैया कुमार ने भारतीय सेना के खिलाफ 8 मार्च 2016 को दिल्ली में विवादित बयान दिया था. कन्हैया ने कश्मीर का जिक्र करते हुए कहा था कि कश्मीर में सेना महिलाओं से बलात्कार करती है.
- 4 फरवरी 2020 को कन्हैया ने एक विवादित ट्वीट किया था, जिसमें आरएसएस पर हमला बोला गया था. उन्होंने आरएसएस को धर्म का धंधा करने वाला बताया था.
- कन्हैया कुमार पर पटना एम्स के जूनियर डॉक्टरों ने दुर्व्यवहार के आरोप लगाए थे. कन्हैया AISF के बिहार प्रदेश के सचिव सुशील कुमार को एम्स में देखने गए थे. सुशील एम्स के ट्रामा इमरजेंसी वार्ड में भर्ती थे.
(आजतक ब्यूरो)