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'अभी इस बारे में नहीं सोचा', हिजाब को लेकर छिड़ी सियासी जंग के बीच बोले कर्नाटक के डिप्टी CM डीके शिवकुमार

क्या कर्नाटक सरकार ने हिजाब पर लगे प्रतिबंध को खत्म करने के आदेश दे दिए हैं? इस बात पर अब राज्य के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार का जवाब आया है. उन्होंने कहा है कि हमने (सरकार) इस बारे में अभी नहीं सोचा है. सीएम ने सिर्फ इतना कहा है कि इस पर चर्चा की जायेगी.

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Karnataka Deputy Chief Minister DK Shivakumar (File Photo)
Karnataka Deputy Chief Minister DK Shivakumar (File Photo)

कर्नाटक में एक बार फिर हिजाब का जिन्न बाहर निकल आया है. BJP दावा कर रही है कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने स्कूलों और कॉलेजों में हिजाब पहनकर आने पर लगे प्रतिबंध को हटाने के निर्देश दे दिए हैं. हालांकि, बीजेपी के हमलों के बाद अब कर्नाटक सरकार बचाव की मुद्रा में आ गई है. इस मुद्दे पर अब राज्य के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार का बायन आया है.

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डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने कहा है कि इस मुद्दे पर यू टर्न जैसा कुछ भी नहीं है. हमने (सरकार) इस बारे में अभी नहीं सोचा है. सीएम ने सिर्फ इतना कहा है कि इस पर चर्चा की जायेगी. बस इतनी ही बात है, लेकिन इसे बिना वजह बड़ा बनाया जा रहा है.

कैसे हुई विवाद की शुरुआत?

हिजाब पर सियासी जंग की शुरुआत तब हुई, जब कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि उनकी सरकार राज्य में स्कूलों और कॉलेजों में हिजाब पर प्रतिबंध लगाने वाले आदेश को वापस ले लेगी. उन्होंने ये बयान 22 दिसंबर को एक सार्वजनिक बैठक के दौरान दिया था. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा था,'किसको क्या पहनना है यह उस व्यक्ति का विशेषाधिकार है. मैंने हिजाब प्रतिबंध को वापस लेने का निर्देश दिया है. पीएम मोदी का सबका साथ, सबका विकास फर्जी है. भाजपा लोगों और समाज को कपड़े, पहनावे और जाति के आधार पर बांट रही है'.

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हिजाब बैन पर क्या था कोर्ट का फैसला?

तत्कालीन बीजेपी सरकार के इस आदेश का एक समुदाय विशेष ने विरोध और प्रतिवाद किया था. विवाद इतना बढ़ गया था कि राज्य के कई जिलों में शिक्षण संस्थान बंद करने पड़े थे. मामला कर्नाटक हाई कोर्ट में पहुंचा था, जिसने अपने आदेश में कहा था कि 'हिजाब इस्लाम के धार्मिक व्यवहार का अनिवार्य हिस्सा नहीं है' और शैक्षणिक संस्थानों को अपना ड्रेस कोड लागू करने का अधिकार है, जिसका पालन सभी को करना होगा. हिजाब समर्थकों ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. शीर्ष अदालत ने 13 अक्टूबर 2022 को खंडित फैसला सुनाया था और मुख्य न्यायाधीश से मामले को बड़ी खंडपीठ के पास भेजने का अनुरोध किया था. हालांकि, यह मामला शीर्ष अदालत में लंबित है.

(रिपोर्ट: अनाघा)

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