उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा को लेकर सियासी हालात बदलते नजर आ रहे हैं. जिस तरह से रविवार को तिकुनिया इलाके में हिंसा भड़की थी, उसके संभलने की गुंजाइश कम ही थी. हिंसा वाली रात प्रियंका गांधी और विपक्ष के अन्य दूसरे नेताओं ने जो सियासी शोर मचाया उससे योगी सरकार और प्रशासन के हाथ पांव फूल गए थे, लेकिन जिस तरह से योगी सरकार द्वारा 24 घंटे के अंदर पूरे घटनाक्रम को मैनेज किया गया उससे विपक्ष का दांव अब फिर से ठंडा पड़ता दिखाई दे रहा है.
इस पूरे घटनाक्रम को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार अलर्ट पर थी. तिकुनिया इलाके में भारी पुलिस फोर्स ने रविवार शाम से ही मोर्चा संभाल लिया था. आज विपक्ष और किसान नेताओं की ओर से बड़े पैमाने पर प्रदर्शन की योजना थी, लेकिन सब धरा का धरा रह गया.
विपक्ष के नेताओं को नहीं मिली एंट्री, अलर्ट थी पुलिस
यूपी प्रशासन ने सारे राजनेताओं को लखीमपुर खीरी और तिकुनिया पहुंचने से रातो-रात रोक लिया. प्रियंका गांधी को सीतापुर में रोका गया, चंद्रशेखर आजाद को सीतापुर टोल प्लाजा पर रोका गया. इसी तरह अन्य नेता जैसे शिवपाल यादव, अखिलेश यादव, जयंत चौधरी को लखीमपुर पहुंचने से पहले ही हिरासत में ले लिया गया. इस बीच सिर्फ एक 'नेता' वहां पहुंचे, वह थे राकेश टिकैत. वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मौके पर लखनऊ से एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रशांत कुमार को भेजा और पूरा मसला सुलझाने की जिम्मेदारी सौंपी.
समझौते के बाद राकेश टिकैत ने कहा कि बातचीत के दौरान सरकार ने हमारे सभी मांगें मान ली हैं. मृतक किसानों के परिवारों को 45-45 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी. परिवार के एक सदस्य को स्थानीय स्तर पर सरकारी नौकरी का वादा किया गया है, जबकि घायलों को बेहतर इलाज के लिये 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी. साथ ही मामले की न्यायिक जांच उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त जज से कराई जाएगी.
टिकैत ने कहा कि केंद्रीय गृह राज्यमंत्री और उनके बेटे के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कर ली गई है. हालांकि समझौते के बाद टिकैत ने साफ कहा कि अगर केंद्रीय गृह राज्यमंत्री और उनके बेटे की गिरफ्तारी नहीं हुई तो आंदोलन होगा.
योगी सरकार के कदम का अंदाजा विपक्ष को नहीं था!
इधर, हाल के घटनाक्रम पर नजर डालें तो गोरखपुर हत्याकांड, महंत नरेंद्र गिरि केस, कानपुर में 48 घंटे के भीतर 6 हत्याओं के मामले में योगी सरकार घिरी थी. विपक्ष इन मामलों को लेकर योगी सरकार पर हमलावर था. इन मामलों के निपटारे में कुछ दिन भले लग गए हो, लेकिन जो हालात लखीमपुर खीरी में थे वैसे यहां नहीं थे. इसलिए शायद लखीमपुर हिंसा पर योगी सरकार के कदम का अंदाजा विपक्ष को भी नहीं था.
हाल के दिनों में हुई बड़ी घटनाओं की स्थिति
- उत्तर प्रदेश सरकार कानपुर के व्यापारी मनीष गुप्ता हत्या मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की सिफारिश कर चुकी है, मगर सीबीआई के केस हाथ में लेने से पूर्व एसआईटी तफ्तीश करती रहेगी. इस मामले में यूपी पुलिस की खूब किरकिरी हुई थी. विपक्ष के नेता पुलिस की भूमिका पर सरकार को घेर रहे थे.
- प्रयागराज में महंत नरेंद्र गिरी के कथित आत्महत्या का मामला अब सीबीआई के पास है. महंत नरेंद्र गिरि की मौत प्रकरण की जांच में जुटी सीबीआई ने अब उनके और मठ से जुड़े लेनदेन के मामलों पर नजर टिका दी है. इस मामले को लेकर विपक्ष ने जमकर सियासत चमकाई थी, लेकिन अब सब कुछ सीबीआई के हाथ में है.