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CM बनने के बावजूद रास नहीं आई कांग्रेस, वे नेता जिन्होंने पाला बदलकर थामा BJP का दामन

आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी शुक्रवार को भाजपा में शामिल हो गए. हालिया वर्षों में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए मुख्यमंत्रियों की लिस्ट में किरण कुमार रेड्डी का नाम नया है. बता दें कि इससे पहले भी ऐसे कई नेता रहे हैं जो कि एक समय में कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री बने और फिर बाद में भाजपा में शामिल हो गए. 

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किरण कुमार रेड्डी, कैप्टन अमरिंदर सिंह और एसएम कृष्णा
किरण कुमार रेड्डी, कैप्टन अमरिंदर सिंह और एसएम कृष्णा

राजनीति में नेताओं का पार्टी बदलना एक आम चलन है. आमतौर पर ऐसी अदला-बदली निचले स्तर के नेताओं में होती है. लेकिन कुछ मुख्यमंत्री ऐसे भी रहे जो एक वक्त पर तो कांग्रेस के टिकट पर मुख्यमंत्री रहे लेकिन बाद में भाजपा जॉइन कर ली. यह चर्चा शुरू हुई आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी से. 

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दरअसल शुक्रवार को किरण कुमार रेड्डी भाजपा में शामिल हो गए. हालिया वर्षों में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए मुख्यमंत्रियों की लिस्ट में किरण कुमार रेड्डी का नाम नया है. बता दें कि इससे पहले भी ऐसे कई नेता रहे हैं जो कि एक समय में कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री बने और फिर बाद में भाजपा में शामिल हो गए. 

आइए आपको बताते हैं उन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बारे में जो कि बाद में कभी भाजपा में शामिल हुए...

किरण कुमार रेड्डी

आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए. पार्टी नेता और संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने उन्हें भाजपा में शामिल कराया. हाल ही में अविभाजित आंध्र प्रदेश के अंतिम मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी ने 12 मार्च को कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था. 2014 में उन्होंने राज्य के विभाजन का कड़ा विरोध किया था और तत्कालीन यूपीए सरकार के आंध्र प्रदेश को विभाजित करने और तेलंगाना को अलग करने के फैसले के विरोध में कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था.

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इसके तुरंत बाद उन्होंने अपनी खुद की पार्टी 'जय समैक्य आंध्र' बनाई और 2014 के चुनावों में कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवार भी उतारे. हालांकि इसके बाद वो 2018 में फिर से कांग्रेस में शामिल हो गए थे. 

कैप्टन अमरिंदर सिंह

सितंबर 2022 में, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह अपनी पार्टी - पंजाब लोक कांग्रेस का विलय करने के बाद भाजपा में शामिल हो गए थे. कैप्टन अमरिंदर सिंह ने नवंबर 2021 में कांग्रेस से इस्तीफा देकर अपनी नई पार्टी बनाई थी. 

बता दें कि सितंबर 2021 में अमरिंदर सिंह ने उनके और तत्कालीन पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) के प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू के बीच महीनों तक चली लड़ाई के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके कुछ दिनों बाद उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था. 

एसएम कृष्णा

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एसएम कृष्णा ने मार्च 2017 में कांग्रेस छोड़ दी थी और नई दिल्ली में भाजपा में शामिल हो गए थे. वे अक्टूबर 1999 से मई 2004 के बीच कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे थे. एसएम कृष्णा ने दिसंबर 2004 और मार्च 2008 के बीच महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में भी काम किया था. मई 2009 से अक्टूबर 2012 तक वह यूपीए सरकार में विदेश मंत्री रहे थे.

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दिगंबर कामत

गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री दिगंबर कामत सितंबर 2022 में दूसरी बार भाजपा में शामिल हुए. इससे पहले 1994 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था. वह 2005 में कांग्रेस में लौटे और राज्य में मनोहर पर्रिकर के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार को गिराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. कामत 2007 से 2012 तक गोवा के मुख्यमंत्री रहे थे. 

विजय बहुगुणा

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा मई 2016 में भाजपा में शामिल हो गए थे. विजय बहुगुणा उत्तराखंड के आठ पूर्व विधायकों के साथ भगवा पार्टी में शामिल हुए थे. जनवरी 2014 में विजय बहुगुणा ने अपना इस्तीफा दिया था. बहुगुणा ने मार्च 2012 से जनवरी 2014 तक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में काम किया था.

नारायण दत्त तिवारी

उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता नारायण दत्त तिवारी अपने बेटे रोहित शेखर के साथ जनवरी 2017 में भाजपा में शामिल हुए थे. एनडी तिवारी ने 2002 से 2007 तक उत्तराखंड के तीसरे मुख्यमंत्री और 1976 और 1989 के बीच तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में काम किया था. वह अगस्त 2007 से दिसंबर 2009 तक आंध्र प्रदेश के राज्यपाल भी रहे.

पेमा खांडू

वर्तमान में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू भी एक वक्त में कांग्रेसी नेता थे. दिसंबर 2016 में पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (पीपीए) के 32 विधायकों के साथ वो भाजपा में शामिल हुए थे. खांडू सरकार जुलाई 2016 से सत्ता में है. पहले इस सरकार का नेतृत्व कांग्रेस कर रही थी, लेकिन खांडू और लगभग सभी कांग्रेस विधायक सितंबर 2016 में पीपीए में शामिल हो गए थे, लेकिन बाद में खांडू को अपनी सत्ता की स्थिति बनाए रखने की अनुमति मिली थी.

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