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चुनाव में परिवारवाद का मुद्दा नहीं आया काम, जनता ने जमकर दिए वोट

लोकसभा चुनाव परिणामों पर अगर नजर डालें तो परिवारवाद की राजनीति को लेकर जनता ने जो फैसला सुनाया वो मिला-जुला नजर आ रहा है. देश के राजनीतिक परिवार से आने वाले नेताओं को कहीं जीत तो कहीं हार का सामना करना पड़ा है.

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अखिलेश यादव और चिराग पासवान (फाईल फोटो)
अखिलेश यादव और चिराग पासवान (फाईल फोटो)

चुनाव आयोग द्वारा 4 जून को नजीतों के ऐलान के साथ ही 18वीं लोकसभा की तस्वीर साफ हो गई. बीजेपी अपने अकेले दम पर बहुमत से दूर जरूर रही लेकिन एनडीए 293 सीटों के साथ सरकार बनाने के जरूरी आंकड़ों से काफी है. वहीं, INDIA ब्लॉक 234 सीटों के साथ अपने अनुमानित आकड़े 295 और बहुमत के लिए जरूरी संख्या 272, दोनों से बहुत पहले ही ठहर गया. बहुमत को आंकड़ों तक पहुंचने के लिए सभी दलों के नेताओं ने खूब पसीना बहाया. वादों और दावों की झड़ी लगा दी. निजी हमलों से लेकर राजनीति में परिवारवाद का मुद्दा खूब उछाला गया. 

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पूरे चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी और पीएम मोदी के निशाने पर विपक्ष का परिवारवाद रहा. अपने चुनावी भाषणों में पीएम नरेंद्र मोदी यूपी में अखिलेश यादव तो बिहार में लालू यादव के परिवार के सदस्यों के राजनीति में होने को लेकर खूब हमलावर रहे. इसके अलावा भी तमाम राजनीतिक सभाओं में बीजेपी के कई नेता लगातार परिवारवाद पर निशाना साधते दिखे. 

ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर इन भाषणों और हमलों ने वोटरों को कितना प्रभावित किया? इसका नतीजा अब हमारे सामने है. लोकसभा चुनाव परिणामों पर अगर नजर डालें तो परिवारवाद की राजनीति को लेकर जनता ने मिला-जुला फैसला सुनाया है. देश के राजनीतिक परिवार से आने वाले नेताओं को कहीं जीत तो कहीं हार मिली है.   

अखिलेश यादव के पूरे परिवार को मिला जनता का आशीर्वाद 
चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा नेताओं ने अखिलेश यादव पर परिवारवाद की राजनीति करने का खूब आरोप लगाया. लेकिन इन तमाम आरोपों को नजरअंदाज करते हुए उत्तर प्रदेश की जनता ने सूबे के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार के पक्ष में फैसला सुनाया. प्रदेश की जनता ने अखिलेश यादव के परिवार के पांचों सदस्यों को संसद में बैठने का जनादेश दिया है. लोकसभा चुनाव 2024 में सपा प्रमुख अखिलेश यादव कन्नौज से, उनकी अपनी पत्नी डिंपल यादव मैनपुरी से, अखिलेश के चचेरे भाई एवं पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव आजमगढ़ से, यादव परिवार के एक और पूर्व सांसद अक्षय यादव फिरोजाबाद से और उनके चचेरे भाई आदित्य यादव बदायूं से मैदान में थे. अखिलेश यादव सहित उनके परिवार के पांचों सदस्यों को चुनाव में सफलता मिली है. कुल मिलाकर मुलायम परिवार का इस चुनाव में स्ट्राइक रेट 100 फिसदी का रहा.  

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लालू परिवार कहीं हारा तो कहीं मिली जीत
उत्तर प्रदेश की तरह बिहार की जनता के बीच भी परिवारवाद का मुद्दा कोई खास असर नहीं दिखा सका. बिहार में राजद सुप्रीमो लालू यादव की बेटी मीसा भारती पटना के पाटलिपुत्र सीट जीतने में कामयाब रहीं. इस सीट पर बीजेपी के रामकृपाल यादव और लालू यादव की बड़ी बेटी मीसा भारती के बीच सीधा मुकाबला था. जबकि लालू यादव की एक और बेटी रोहिणी आचार्य को सारण सीट पर बीजेपी के राजीव प्रताप रूडी के आगे हार झेलनी पड़ी. 

चिराग पासवान को भी मिली जीत
बिहार की हाजीपुर लोकसभा सीट से लोजपा रामविलास के अध्यक्ष चिराग पासवान जीतने में कामयाब रहे. चिराग ने अपने पिता रामविलास पासवान की परंपरागत सीट रही हाजीपुर से एक लाख 70 हजार से अधिक वोटों से जीत दर्ज की. इसके अलावा चिराग की पार्टी में जिन 5 सीटों पर चुनाव लड़ रही थी, उन सभी पर पार्टी ने जीत हासिल की. चिराग पासवान हाजीपुर सीट से पहली बार चुनावी मैदान में थे. इससे पहले वो जमुई सीट से जीतकर संसद पहुंचे थे.

रेवन्ना को हाथ लगी मायूसी   
देश के पूर्व प्रधानमंत्री और जेडीएस चीफ एचडी देवगौड़ा के पोते प्रज्वल रेवन्ना को इस चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा. कर्नाटक की हासन सीट से रेवन्ना को कांग्रेस प्रत्याशी श्रेयस एम पटेल ने हराया. रेवन्ना के पिता एचडी रेवन्ना कर्नाटक सरकार में मंत्री रह चुके हैं. प्रज्वल रेवन्ना पर हाल ही में सेक्स स्कैंडल के आरोप लगे थे. अब JDS की सबसे सेफ सीटों सीट माने जाने वाली हासन लोकसभा से उसे हार का सामना करना पड़ा है. JDS यहां 2004 के बाद से लगातार जीत दर्ज करती आ रही थी. 

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जम्मू-कश्मीर में परिवारवाद की हुई जबरदस्त हार
केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में इस आम चुनाव में जनता ने परिवारवाद पर गहरा चोट किया है. लोकसभा चुनाव 2024 में राज्य के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को हार झेलनी पड़ी है. जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को लाखों वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा है.

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