पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने कहा कि बांग्लादेशी की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना (77 साल) भारत में जब तक रहना चाहें, उनको तब तक रहने की इजाजत दी जाए. वहीं, बांग्लादेश द्वारा किए जा रहे हसीना के प्रत्यर्पण की मांग पर अय्यर ने कहा कि शेख हसीना ने हमारे लिए बहुत कुछ अच्छा किया है. ये हम सब जानते हैं. मुझे खुशी है कि उन्हें शरण दी गई.
उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि जब तक वो चाहें, हमें उनकी मेजबानी करनी चाहिए. भले ही वो पूरा जीवन भारत में रहना चाहती हों. न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अय्यर कोलकाता में आयोजित 16वें एपीजे लिटरेरी फेस्टिवल में बोल रहे थे.
हिंदुओं पर हमले हो रहे हैं
मणिशंकर अय्यर ने कहा कि यह सच है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमले हो रहे हैं, लेकिन अल्पसंख्यकों पर हमला इसी वजह से हो रहा है, क्योंकि वो शेख हसीना के समर्थक हैं. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमले की खबरें सच हैं, लेकिन बढ़ा-चढ़ाकर कर भी बताई गई हैं, क्योंकि अधिकतर संघर्ष राजनीतिक विवादों को सुलझाने के लिए होते हैं.
विभाजन की त्रासदी से अलग देश बना
लिटरेरी फेस्टिवल में प्रश्नकाल सत्र के दौरान अय्यर ने कहा कि पाकिस्तानी काफी हद तक भारतीयों की तरह हैं, लेकिन विभाजन की वजह से वो एक अलग देश बन गया. उन्होंने आगे कहा कि एक तमिल के रूप में मुझमें और एक पंजाबी के रूप में मेरी पत्नी के बीच जितना अंतर है, उससे कम मेरी पत्नी और पाकिस्तानी पंजाबी में अंतर है.
सरकार पर कसा तंज
नरेंद्र मोदी की सरकार पर निशाना साधते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि हमारे पास सर्जिकल स्ट्राइक करने का साहस है, लेकिन इस सरकार में उनके (पाकिस्तान) साथ मेज पर बैठने का साहस नहीं है. उन्होंने पाकिस्तान का जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तान एक ऐसा देश है, जो आतंकवाद को बढ़ावा देता है, लेकिन ये बात भी सच है कि वो खुद भी आतंकवाद का शिकार है.
अय्यर ने आगे कहा कि आज पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा खतरा अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता का होना है, जबकि पाकिस्तान ही तालिबान को सत्ता में लाना चाहता था.
पाकिस्तान को अपने गले लटकाए रखना आत्मघाती
मणिशंकर अय्यर ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सराहना की. अय्यर ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि थी कि उन्होंने पाकिस्तान के जनरल मुशर्रफ से बात की थी. पाकिस्तान को अपने गले में लटकाए रखना हमारे लिए आत्मघाती है. हमें उनसे वैसे ही बात करनी चाहिए जैसे मनमोहन सिंह ने कश्मीर के मुद्दे पर की थी.
बांग्लादेश में तख्तापलट
शेख हसीना 5 अगस्त से भारत में रह रही हैं, बांग्लादेश में छात्रों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया जिसके बाद शेख हसीना को बांग्लादेश छोड़ कर भागना पड़ा. छात्रों के आंदोलन ने ऐसा रूप धारण कर लिया कि बांग्लादेश में तख्तापलट हो गया और हसीना का 16 साल का शासन खत्म हो गया.
बता दें कि भारत में बांग्लादेश की पूर्व डिप्टी हाई कमिश्नर मशफी बिन्ते शम्स ने कहा था कि हालांकि शेख हसीना का भारत से प्रत्यर्पण एक प्रमुख मुद्दा है, लेकिन इससे नई दिल्ली और ढाका के बीच संबंधों में कोई तनाव नहीं आया है क्योंकि यह रिश्ता 'लंबे समय से चल रहा है और पिछले 50 वर्षों में लगातार विकसित हुआ है.'