उत्तर प्रदेश के बाद अब उत्तराखंड में भी बसपा ने मुसलमानों की वोट शिफ्टिंग को हार की एक बड़ी वजह माना है. बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती (mayawati) ने उत्तराखंड में बसपा की 2 सीट आने पर राज्य के पदाधिकारियों के साथ लखनऊ में बैठक की. हार की समीक्षा करते हुए मायावती ने कहा कि मुस्लिम समाज ने सही विकल्प चुनने में भूल की है. इसका फायदा उठाकर भाजपा दोबारा सत्ता में आ गई है.
बसपा सुप्रीमो ने आगे कहा कि अगर इसी तरह लोगों का रवैया नहीं बदलता है तो समस्या का निदान काफी मुश्किल होगा. लेकिन फिर भी बसपा कार्यकर्ताओं को दिल-जान लगाकर अपना काम करना है. पार्टी और संगठन के कामों में नजर आने वाली कमी को दूर कर आगे बढ़ना है.
बता दें कि इससे पहले मायावती ने उत्तर प्रदेश में मिली करारी शिकस्त की समीक्षा की थी. तब भी बसपा सुप्रीमो ने सपा के बहाने मुसलमानों पर ही हार का ठीकरा फोड़ा था. उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा था कि ऐसा नैरेटिव बनाया गया कि सपा ही भाजपा को सत्ता में आने से रोक सकती है, इसके कारण सभी मुसलमानों का वोट समाजवादी पार्टी में शिफ्ट हो गया.
मायावती ने कहा था कि यूपी चुनाव में पूरा का पूरा मुसलमान वोट सपा को चला गया. सपा की गुंडागर्दी और आतंकवाद को याद करते हुए दूसरे दलितों और हिंदुओं के वोट बीजेपी में चले गए. उन्होंने कहा कि मुसलमानों का वोट एक तरफ शिफ्ट होना ही हमारी हार का सबसे बड़ा कारण है. लेकिन बसपा एक बार फिर उठ खड़ी होगी.
बसपा 1 सीट ही जीत सकी
बता दें कि 38 साल पहले 1984 में बनी बसपा 2022 के चुनाव में आते-आते एक सीट पर पहुंच चुकी है. जिस बसपा ने 2007 में उत्तर प्रदेश में भारी बहुमत के साथ सरकार बनाई थी, वही बसपा 10 साल में सिमटकर एक विधायक पर आ गई है. 2022 के चुनाव में सिर्फ एक विधायक (रसड़ा से उमाशंकर सिंह) ने ही जीत हासिल की है.
1993 से बसपा ने विधान सभा चुनावों में 65 से 70 सीटों पर जीतना शुरू किया. 2002 में भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाने वाली बसपा का वोट प्रतिशत 23 फीसदी पार कर गया. 2007 में बसपा को सबसे ज्यादा 40.43 फीसदी वोट मिले और उसने अपने दम पर सरकार भी बनाई. 2022 आते-आते बसपा महज 13 फीसदी पर सिमट गई.