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पटना में विपक्षी दलों का महाजुटान, क्या पूरा करेगा नीतीश कुमार का सबसे बड़ा अरमान!

लोकसभा चुनाव में अभी भले ही एक साल का वक्त बाकी हो, लेकिन नरेंद्र मोदी को लगातार तीसरी बार सत्ता में आने से रोकने के लिए विपक्षी एकता का तानाबाना बुना जाने लगा है. 12 जून को पटना में विपक्षी एकता की बड़ी बैठक होने जा रही है, जिसकी अध्यक्षता नीतीश कुमार करेंगे?

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

देश में विपक्षी एकता की मुहिम में जुटे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मेहनत रंग लाने लगी है. 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए संयुक्त रणनीति पर मंथन करने और निर्णय लेने के लिए विपक्षी दलों की 12 जून को पटना में बैठक है, जिसमें 18 से ज्यादा दलों के नेता शिरकत करेंगे. इस बैठक की अध्यक्षता नीतीश कुमार करेंगे. बता दें कि नीतीश बार बार ये कहते आए हैं कि वे पीएम पद के उम्मीदवार नहीं हैं, लेकिन 2024 के चुनाव में नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली बीजेपी सरकार को जरूर हराना चाहते हैं. 

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पटना में अगले महीने 12 जून को होने वाली इस बैठक से विपक्षी खेमे में नीतीश कुमार का कद और रोल और भी बड़ा हो जाएगा, लेकिन क्या विपक्षी दल के नेता उन्हें विपक्ष का सर्वमान्य नेता स्वीकर कर पाएंगे. इस बात को नीतीश भी बाखूबी समझते हैं, लेकिन उनका पहला अरमान विपक्षी एकता के जरिए बीजेपी को सत्ता से बाहर करने का है. 

विपक्षी एकता की मुहिम में जुटे नीतीश

महागठबंधन में वापसी करने के बाद से नीतीश कुमार विपक्षी एकता का तानाबाना बुनने में जुट गए थे. देश के अलग-अलग राज्यों का दौरा नीतीश क्षेत्रीय पार्टियों के नेताओं से मुलाकात कर 2024 लोकसभा चुनाव से पहले गैर बीजेपी दलों को एक साथ एक मंच पर लाने की कोशिश में लगे हैं. सीएम नीतीश कुमार ने 2024 के आम चुनावों से पहले विपक्षी एकता के लिए वार्ताकार के रूप में कार्य करने की इच्छा जताई थी. पिछले हफ्ते ही दिल्ली में कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी से नीतीश ने मुलाकात भी की थी. इसके बाद ही विपक्षी दलों की पटना में 12 जून को होनी वाली बैठक की रूपरेखा तय हुई है. 

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नीतीश करेंगे विपक्षी जुटान की अध्यक्षता

जेडीयू नेता मंजीत सिंह ने रविवार को कहा कि, पटना में 12 जून को विपक्षी एकता के लिए विपक्षी दलों की बैठक तय की गई है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसकी अध्यक्षता करेंगे, जिसमें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री व टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी से लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, एनसीपी प्रमुख शरद पवार सहित कांग्रेस के दिग्गज नेता शिरकत करेंगे. इसके अलावा शिवसेना (उद्धव गुट) के अलावा लेफ्ट पार्टी सहित कई विपक्षी दल के नेता बैठक में हिस्सा लेंगे. 

नीतीश के चलते विपक्ष का बदला सुर

नीतीश कुमार उन सभी समान विचारधारा वाले विपक्षी दलों को एक साथ लाने की योजना बना रहे हैं, जो कांग्रेस के साथ खड़े नहीं होना चाहते है. कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने पटना में होने वाली विपक्षी दलों की बैठक पर कहा कि, 'एक बार विपक्ष एकजुट हो जाए तो पीएम मोदी को चुनाव में हराने का मौका मिल जाएगा. हम कुछ क्षेत्रीय पार्टियों को देखते हैं जिन्हें कांग्रेस के साथ आने में दिक्कत होती है. ऐसे में कांग्रेस की ओर से मल्लिकार्जुन खड़गे ने नीतीश कुमार को जिम्मेदारी दी थी कि जिन्हें बुलाना है बुला लें. नीतीश कुमार ने अन्य क्षेत्रीय दलों को आमंत्रित किया है. कांग्रेस को कोई दिक्कत नहीं है. 

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विपक्षी एकता की मुहिम में नीतीश कुमार ने ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और सपा प्रमुख अखिलेश यादव को शामिल करने में सफल रहे हैं, जो कांग्रेस के खिलाफ आक्रामक रहे हैं. हाल ही में ममता बनर्जी ने नीतीश कुमार से मुलाकात के बाद कहा था कि उन्हें कांग्रेस के होने पर कोई एतराज नहीं है तो सपा अखिलेश यादव के भी सुर बदले हैं. संसद भवन के उद्घाटन कार्यक्रम के बहिष्कार में विपक्षी एकता की झलक दिखी है, जहां कुछ विपक्षी दलों के छोड़कर बाकी दलों ने नेता शिरकत नहीं किए.  

विपक्ष के ज्यादातर दल इस बात पर सहमत हैं कि मजबूत क्षेत्रीय दल 2024 में अपने अपने इलाकों में बीजेपी का मुकाबला करेंगे और बदले में, वे 200 से अधिक सीटों पर कांग्रेस को बीजेपी से सीधे मुकाबले में उतरने देंगे. ममता बनर्जी से लेकर अखिलेश यादव और केसीआर इसी फॉर्मूले पर बात करते रहे हैं, लेकिन कांग्रेस इस पर अभी अपने पत्ते नहीं खोले. कांग्रेस की कोशिश यह थी कि 

नीतीश कुमार कब किससे मिले 

नीतीश कुमार ने विपक्षी दलों के नेताओं के साथ मिलकर 2024 में एकजुट होने की रणनीति पर चर्चा की है. 12 अप्रैल के नीतीश ने दिल्ली में मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल से मिले. 13 अप्रैल को लेफ्ट नेता सीताराम येचुरी और डी राजा से मिले. 24 अप्रैल को ममता बनर्जी और अखिलेश यादव से मिले तो 31 अप्रैल को तेलंगाना के सीएम केसीआर से नीतीश ने मुलाकात किया. 9 मई को ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक, 10 मई को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और 11 मई को एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मिले. इसके अलावा  हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला,आरएलडी के प्रमुख जयंत चौधरी, ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के नेता मौलाना बदरुद्दीन अजमल समेत तमाम विपक्षी दलों के नेताओं से मुलाकात की थी. 

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पटनायक और मायावती की दूरी

विपक्षी एकता में सिर्फ नवीन पटनायक की बीजेडी और मायावती की बसपा ही दूर हैं. दोनों ने बहुत पहले ही कह दिया है कि वे विपक्षी एकता की किसी भी मुहिम में शामिल नहीं होंगे. बसपा प्रमुख मायावती की अपनी मजबूरियां हैं लेकिन बाकी विपक्ष नवीन पटनायक के रवैए पर हैरान है. नवीन पटनायक नीति आय़ोग की बैठक से दूर रहे लेकिन वो नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए थे. 

मोर्चाबंदी से तय होगी विपक्षी एकता

नीतीश कुमार इस बात को बाखूबी समझते हैं कि विपक्षी मोर्चाबंदी जितनी ताकतवर होगी, 2024 के चुनाव में बीजेपी के खिलाफ विपक्ष भी उतना ही मजबूत बनेगा. नीतीश कुमार बिहार से आते हैं, जहां लोकसभा की 40 सीटें हैं. वे बिहार में कांग्रेस, आरजेडी और लेफ्ट के सहित 8 दलों को सफल गठबंधन में सरकार चला रहे हैं. इसका उदाहरण भी नीतीश तमाम विपक्षी दलों को देते हैं. 

क्या है नीतीश कुमार का अरमान

नीतीश कुमार बार-बार इस बात को दोहराते रहे हैं कि उन्हें बीजेपी को सत्ता से बेदखल करना है. इसके लिए उन्हें सिर्फ 100 सीटों पर बीजेपी को हराना है. इसके लिए जरूरी है कि ऐसे राज्य जहां क्षेत्रीय पार्टी की सरकार है, वहां महागठबंधन बनाया जाए और बीजेपी के खिलाफ बस एक उम्मीदवार को मैदान में उतारा जाए. इसमें मुख्य रूप से यूपी की 80, बिहार की 40, बंगाल की 42, महाराष्ट्र की 48, दिल्ली 7, पंजाब की 13 और झारखंड की 14 लोकसभा सीटें शामिल हैं. 

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अभी विपक्ष में संयुक्त नेतृत्व की स्थिति

देश में अभी तक विपक्ष की जो तस्वीर है वो संयुक्त नेतृत्व की है. नीतीश कुमार उन लोगों में शामिल हैं जो राष्ट्रीय स्तर बीजेपी के खिलाफ प्रस्तावित नेता के रूप में उभर सकते हैं. हालांकि, 2024 में पीएम मोदी के खिलाफ चेहरा कौन होगा? इस पर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है, क्योंकि किसी पार्टी ने भी अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं. नीतीश भी कह चुके हैं कि वे पीएम पद की रेस में नहीं हैं. ऐसे में पटना में विपक्ष की होने वाली बैठक की अध्यक्षता और मेजबानी करके नीतीश कुमार ने खुद को सभी विपक्षी दलों से आगे कर लिया है. ऐसे में देखना है कि नीतीश कुमार की अध्यक्षता के बाद किस तरह से विपक्षी एकता की मुहिम आगे बढ़ती है?   

 

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