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आजतक के कार्यक्रम सीधीबात में मिथुन चक्रवर्ती ने अपनी महात्वाकांक्षा को जाहिर करने से गुरेज नहीं किया था. जब उनसे पूछा गया था कि क्या वो बंगाल के मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं तो उन्होंने कहा था कि अगर पार्टी को लगता है कि मुझमें मुख्यमंत्री बनने की योग्यता है तो निश्चित तौर पर बनूंगा. हालांकि उन्होंने तब यह भी कहा था कि वे बीजेपी में पॉलिटिकल करियर बनाने के लिए नहीं आए हैं. उन्होंने कहा था कि वह गरीबों की सेवा करने के लिए आए हैं.
लेकिन अब जब चुनाव के नतीजे आ गए हैं तो कई दिलों के अरमां आसुओं में बह गए हैं और कई हसरतें परवान चढ़ने से पहले ही फना हो गई हैं. इस दौरान मिथुन का वो बयान एक बार फिर चर्चा में है जिसमें उन्होंने कहा था कि 'मैं असली कोबरा हूं... डसूंगा तो फोटो बन जाओगे.'
तब बंगाल चुनाव के लिए माहौल बन ही रहा था. 7 मार्च को कोलकाता के मशहूर बिग्रेड परेड ग्राउंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली थी. इसी रैली में मिथुन चक्रवर्ती बीजेपी में शामिल हुए. इसके बाद इसी रैली में पीएम मोदी के आगमन से पहले मिथुन ने खचाखच भरे बिग्रेड परेड ग्राउंड में लोगों को संबोधित करते हुए कहा था, "न मैं जोलधारा सांप हूं, और न ही मैं बेलेबोड़ा सांप हूं, मैं एक कोबरा हूं." उन्होंने बांग्ला में कहा था, "आमी एकटा कोबरा..."
तालियों की गड़गड़ाहट के बीच उन्होंने आगे कहा, "मैं जात से ही गोखड़ो हूं...मैं एक कोबरा हूं, मेरा एक डंक तुम्हें तस्वीर तक पहुंचा देगा."
सीधीबात में मिथुन से जब बात किया गया तो इस पर मिथुन ने अपने चिपरिचित अंदाज में जवाब देते हुए कहा, 'कोई शक'. मिथुन चक्रवर्ती ने कहा मैं साफ दिल का आदमी हूं. जो मेरे दिल में आता है, वो बोल देता हूं.
दरअसल बीजेपी ने मिथुन चक्रवर्ती को ममता बनर्जी के बंगाल की बेटी के बरक्स बंगाल के बेटे के रूप में स्थापित करना चाहा. पीएम मोदी ने उसी रैली में कहा था, "आज हमारे पास बंगाल के बेटे मिथुन चक्रवर्ती हैं." बीजेपी ने तृणमूल कांग्रेस के 'बंगाल की बेटी' (ममता बनर्जी) नारे की काट निकालने की कोशिश की थी. लेकिन मिथुन का चेहरा ममता बनर्जी की छवि के सामने कहीं नहीं टिक सका.
मिथुन चक्रवर्ती चुनाव में सक्रिय रहे, कई रैलियां और जनसभाएं कीं, उनकी रैलियों में भीड़ भी उमड़ती थी, लेकिन ये भीड़ वोटों से तब्दील नहीं हो सकी. बीजेपी नेतृत्व मिथुन को चुनाव भी लड़वाना चाहती थी, ताकि एक पुराने और विश्वसनीय बंगाली चेहरे की कमी को पूरा किया जा सके. लेकिन इस पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी.
71 साल के मिथुन चक्रवर्ती का बंगालियों पर गहरा प्रभाव है. सियासत की बात करें तो वे टीएमसी की ओर से राज्यसभा में रहे हैं, लेकिन जनता की अदालत में कभी सीधे-सीधे नहीं गए हैं. वे लोकप्रिय चेहरे हैं, लेकिन उनकी लोकप्रियता सिनेमा तक की सीमित है. उनका आभामंडल बंगाली समाज को बीजेपी को वोट करने के लिए नहीं प्रभावित कर सका.
फिलहाल मिथुन चक्रवर्ती ने अपने भाषण में जिस डंक के असर का जिक्र रूपक के तौर पर किया था वो तो दिखाई नहीं दिया, हां उनका ये बयान उनके राजनीतिक करियर पर जरूर छाप छोड़ गया है.