मॉनसून सत्र की कार्यवाही अब तक हंगामेदार रही है. सत्र के 7वें दिन भी सदन की कार्यवाही सुचारू ढंग से नहीं चल पाई है. पेगासस जासूसी कांड पर विपक्षी दलों के नेता सरकार पर हमलावार हैं. इस बीच आरजेडी सांसद मनोज झा ने मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की अध्यक्षता में कराने की बात कही है.
आरजेडी सांसद मनोझ ने कहा कि केंद्र एकालाप में लिप्त है, हमें संवाद चाहिए. हम चाहते हैं कि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री आएं और पेगासस पर चर्चा हो क्योंकि पेगासस जासूसी प्रकरण 4 कॉलम में पढ़ी जाने वाली खबर नहीं है.
उन्होंने कहा कि किसी को नहीं पता किसने उपकरण खरीदे और किसने अधिकृत किया? ऐसे कई सवाल हैं. हम चाहते हैं सुप्रीम कोर्ट की अध्यक्षता में इसकी जांच हो.
वहीं, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि देश में तानाशाही चल रही है. नरेंद्र मोदी मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से हल करने के लिए तैयार नहीं हैं. हम चर्चा के लिए तैयार हैं. सरकार को सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए.
खड़गे ने कहा कि आईटी अधिनियम कहता है कि निगरानी के लिए अनुमति की आवश्यकता है. इस सरकार ने अनुमति दी और न्यायाधीशों, सेना के अधिकारियों, पत्रकारों और विपक्षी नेताओं का जासूसी करवाई गई.
सपा सांसद ने भी घेरा
इधर, सपा सांसद राम गोपाल यादव ने कहा कि अगर सरकार राष्ट्रहित में मुद्दों पर चर्चा नहीं कर सकती है तो हम इसके राष्ट्रविरोधी बिलों को नहीं सुनेंगे. बता दें कि सरकार ने इस सत्र के दौरान 17 नये विधेयकों को पेश करने के लिए सूचीबद्ध किया है, जबकि 13 विधेयक संशोधन वाले हैं.
नकवी का कांग्रेस पर पलटवार
तमाम विपक्षी नेताओं के सियासी बयान पर केंद्रीय मंत्री मुख़्तार अब्बास नकवी ने कहा है कि मल्लिकार्जुन खड़गे और अधीर रंजन चौधरी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर ऑल पार्टी मीटिंग की मांग रखी थी, लेकिन कांग्रेस ने इसका बहिष्कार किया. सरकार सारी चर्चाओं पर बहस के लिए तैयार है लेकिन कांग्रेस पार्टी लगातार सदन को बाधित करने में लगी हुई है.