मोदी सरकार के चार मंत्रियों का राज्यसभा में कार्यकाल खत्म हो रहा है. इनमें बीजेपी कोटे से तीन और एक मंत्री जेडीयू कोटे से हैं. बीजेपी ने अपने दो मंत्रियों निर्मला सीतारमण और पीयूष गोयल को दोबारा से राज्यसभा भेजने का फैसला किया है तो मुख्तार अब्बास नकवी को रिपीट नहीं किया गया है. वहीं, जेडीयू कोटे से मोदी सरकार में मंत्री आरसीपी सिंह की जगह खीरू महतो को प्रत्याशी बनाया गया है.
मुख्तार अब्बास नकवी और आरसीपी सिंह का राज्यसभा से पत्ता कटने के बाद अब उनके सामने अपने मंत्री पद की कुर्सी को बचाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है. बीजेपी ने 22 राज्यसभा उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया, जिसमें नकवी शामिल नहीं हैं. ऐसे में अगर छह महीन के अंदर आरसीपी और नकवी संसद नहीं पहुंचे तो उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना होगा. इस तरह मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में बदलाव भी देखने को मिल सकता है.
झारखंड से राज्यसभा पहुंचे थे नकवी
मोदी सरकार में मुस्लिम चेहरे के तौर पर शामिल मुख्तार अब्बास नकवी साल 2016 में झारखंड से राज्यसभा सदस्य चुने गए थे, जिनका कार्यकाल 7 जुलाई को खत्म हो रहा है. बीजेपी ने झारखंड से राज्यसभा के लिए इस बार नकवी की जगह आदित्य साहू को उम्मीदवार बनाया है. झारखंड से पत्ता कटने के बाद माना जा रहा था कि नकवी को किसी दूसरे राज्य से बीजेपी प्रत्याशी बना सकती है, लेकिन सोमवार को लिस्ट आने के बाद उस पर भी विराम लग गया. ऐसे में अब नकवी की साख दांव पर लग गई है.
मुख्तार अब्बास नकवी के सामने अब यूपी की रामपुर सीट से लोकसभा चुनाव लड़ना का विकल्प दिख रही है, क्योंकि वो 1998 में इस सीट से सांसद रह चुके हैं. रामपुर संसदीय सीट से नकवी तीन बार चुनाव लड़े हैं, जिनमें एक बार जीते हैं. ऐसे में बीजेपी अगर उन्हें रामपुर से प्रत्याशी बनाती है तो जीत दर्ज करनी होगी तभी जाकर कभी मंत्री पद की कुर्सी बचेगी, नहीं तो उन्हें इस्तीफा देना पड़ेगा.
आरसीपी सिंह के सामने भी चैलेंज
वहीं, मुख्तार अब्बास नकवी की तरह जेडीयू के वरिष्ठ नेता और मोदी सरकार में केंद्रीय इस्पात मंत्री आरसीपी सिंह के लिए भी मुश्किलें खड़ी हो गई हैं. जेडीयू ने आरसीपी सिंह की जगह इस बार झारखंड के पार्टी नेता खीरू महतो को राज्यसभा का प्रत्याशी बनाया है. ऐसे में आरसीपी की मंत्री पद की कुर्सी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. एक वक्त में नीतीश कुमार के बेहद खास माने जाने वाले आरसीपी की पार्टी में तूती बोला करती थी.
जेडीयू में महासचिव से लेकर पार्टी की कमान तक संभाली, लेकिन नीतीश कुमार ने उन्हें उच्च सदन जाने का तीसरी बार मौका नहीं दिया. ऐसे में अब आरसीपी सिंह के सामने केंद्रीय मंत्री पद के लिए बचाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई. नकवी के पास तो रामपुर सीट से लोकसभा उपचुनाव लड़ने का विकल्प है, लेकिन आरसीपी के सामने कोई विकल्प नहीं बचा. ऐसे में अब नकवी और आरसीपी कैसे अपनी कुर्सी बचाए रखते हैं.
दरअसल, भारतीय संविधान का अनुच्छेद 164 (4) के मुताबिक बिना किसी सदन के सदस्य रहते हुए एक मंत्री छह महीने तक अपने पद पर बना रह सकता है, लेकिन अपनी कुर्सी को बचाए रखने के लिए उसे छह महीने के अंदर लोकसभा और राज्यसभा में किसी भी सदन का सदस्य चुना जाना जरूरी है. हालांकि, छह महीने के अंदर अगर लोकसभा या राज्यसभा में किसी भी सदन का सदस्य नहीं चुना जाता है तो मंत्री पद से इस्तीफा देना होगा.
हालांकि, नकवी और आरसीपी सिंह के इस्तीफों के बाद अगर प्रधानमंत्री चाहें तो उन्हें दोबारा से मंत्री पद की शपथ दिलवा सकते हैं, लेकिन यह मौका सिर्फ एक बार ही मिलता है. इस तरह से वो बिना किसी सदन में हुए एक साल तक मंत्री पद पर बने रहे सकते हैं. इसके बाद उन्हें कैबिनेट में बने रहने के लिए लोकसभा या फिर राज्यसभा में किसी भी एक सदन का सदस्य चुना जाना जरूरी होता है. ऐसे में देखना है कि नकवी और आरसीपी सिंह किस तरह से अपनी कुर्सी को कितने दिनों तक बचाए रखते हैं?