वक्फ बिल का कई मुस्लिम संगठन समर्थन भी कर रहे हैं. इन संगठनों का कहना है कि वक्फ बोर्ड ने आजतक मुसलमानों की तरक्की में क्या योगदान दिया? वक्फ बोर्ड ने आजतक कितनी गरीब बच्चियों की शादी करवाई. वक्फ बोर्ड ने आज तक कितने बे घरों को घर दिये. गौरतलब है कि आज लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल (Waqf amendment bill) पेश किया जा रहा है. आज दिल्ली और भोपाल में कई छोटे-छोटे मुस्लिम संगठनों ने इस बिल के सपोर्ट में रैलियां निकाली.
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB), जमीयत उलेमा-ए-हिंद, और कई अन्य बड़े संगठनों ने वक्फ बिल का विरोध किया है और इसे मजहबी आजादी पर हमला बताया है.
अब जानते हैं कि किन मुस्लिम संगठनों ने इस बिल का सपोर्ट करने की घोषणा की है.
1. जमीयत हिमायत उल इस्लाम
जमीयत हिमायत उल इस्लाम ने इस बिल का समर्थन करते हुए वक्फ बोर्ड और वक्फ संशोधन बिल की पैरवी करने वालों से तीखे सवाल पूछे हैं. जमीयत हिमायत उल इस्लाम के सदर कारी अबरार जमाल ने कहा है कि वक़्फ बिल पास होने से सिर्फ वो मुसलमान परेशान हैं जो खुद वक्फ बोर्ड की सम्पत्ति पर कब्जा किए बेठे हैं.
उन्होंने पूछा है कि वक्फ बोर्ड ने आजतक मुसलमानों की तरक्की में क्या योगदान दिया? वक्फ बोर्ड ने आजतक कितनी गरीब बच्चियों की शादी करवाई, कितने लोगों को घर दिए.
कारी अबरार जमाल ने पूछा है कि वक्फ बोर्ड की तमाम दुकानों पर 20 रुपये और 50 रुपये देकर अमीर लोगों ने कैसे कब्जा किया है. वक्फ माफियाओं से वक्फ की संपत्ति को कब्जा मुक्त करने के लिए मुस्लिम संगठनों ने आजतक आवाज क्यों नहीं उठाई.
उन्होंने एक अहम सवाल उठाते हुए कहा है कि वक्फ बोर्ड के पास देश की तीसरी सबसे बड़ी सम्पत्ति होने के बावजूद सड़क पर घूमने वाला हर चौथा भिखारी मुस्लिम ही क्यों है. उन्होंने कहा कि जब वक्फ की संपत्ति पर अल्लाह के अलावा किसी का अधिकार नहीं तो वक्फ माफियाओं का कैसे हो गया. वक्फ बोर्ड ने आजतक अपनी आमदनी और खर्च को सार्वजनिक क्यों नहीं किया है.
2. ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल
राजस्थान के अजमेर से संचालित ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल ने वक्फ बिल का समर्थन किया है. यह संगठन अजमेर शरीफ दरगाह से जुड़ा है और सूफी परंपराओं का प्रतिनिधित्व करता है. सितंबर 2024 में संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के समक्ष इसने वक्फ बिल का समर्थन किया. इस संगठन ने माना कि यह बिल वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और प्रबंधन में सुधार करेगा.
ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल के चेयरमैन और अजमेर दरगाह से जुड़े सैयद नसरुद्दीन चिश्ती ने कहा है कि इस बिल में संशोधन का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि मस्जिदें या संपत्तियां छिन जाएंगी. यह कहना गलत है. उन्होंने कहा कि जेपीसी में चर्चा के बाद बड़ी तसल्ली से यह बिल लाया गया है. नसरुद्दीन चिश्ती ने दावा किया कि उन्हें पूरा यकीन है कि संशोधन के बाद वक्फ के काम में पारदर्शिता आएगी.
उन्होंने कहा कि असहमति होना अलग है. हमारा मानना है कि जो भी बिल आए, वो वक्फ की समस्त धार्मिक सम्पत्ति के हित में होना चाहिए और सरकार की भी मंशा यही है. सैयद चिश्ती ने कहा कि जो लोग गुमराह करने का काम कर रहे हैं, उनसे मैं यह आग्रह करूंगा कि यह गुमराह करने का समय नहीं है. सब मिलकर एक अच्छा बिल पास करवाएं. यह वक्त की जरूरत है.
3. पसमांदा मुस्लिम महाज
पसमांदा (पिछड़े) मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व करने वाला यह संगठन वक्फ बिल के पक्ष में है. सितंबर 2024 में JPC की बैठक में इसने बिल को 85% मुस्लिमों के लिए फायदेमंद बताया. इस संगठन का कहना है कि यह बिल वक्फ बोर्ड में सुधार लाकर हाशिए पर पड़े मुस्लिमों को लाभ पहुंचाएगा.
पसमांदा समाज का कहना है कि इस संशोधन से वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जा करने वाले अशराफ (अगड़ी) मुसलमानों की नींव हिलने लगी है, इसलिए वे इसका विरोध कर रहे हैं और मुस्लिम समुदाय का विरोध कर रहे हैं.
पसमांदा मुस्लिमों का कहना है कि इस बिल के पास होने से गरीब मुसलमानों के जीवन में सुधार आएगा.
ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष परवेज हनीफ ने कहा था कि मुसलमानों का ठेका ओवैसी और मदनी जैसे लोगों को किसने दिया है. मुस्लिम समुदाय इस संशोधन के साथ है.
इस संगठन से जुड़े एक और नेता आतिफ रशीद ने कहा था कि वक्फ बोर्ड की स्थापना गरीबों के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए की गई थी. लेकिन हो इसके उलट रहा है.
4. मुस्लिम राष्ट्रीय मंच
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से संबद्ध यह संगठन वक्फ बिल के समर्थन में खड़ा है. 23 फरवरी 2025 को दिल्ली में हुई बैठक में MRM ने कहा कि यह बिल वक्फ संपत्तियों में पारदर्शिता लाएगा और मुस्लिम समुदाय के हित में है.
5. मुस्लिम महिला बौद्धिक समूह
मुस्लिम महिलाओं के बौद्धिक समूह ने वक्फ बिल का सपोर्ट किया है. नवंबर 2024 में JPC की बैठक में शालिनी अली के नेतृत्व में मुस्लिम महिलाओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने बिल का समर्थन किया. उन्होंने तर्क दिया कि यह वक्फ बोर्ड में पारदर्शिता लाएगा और महिलाओं, अनाथों, विधवाओं जैसे कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए काम करेगा.
इस समूह ने प्रस्तावित संशोधनों का स्वागत किया लेकिन इस बात पर जोर दिया कि ये केवल कागज पर लिखे शब्दों से कहीं अधिक होने चाहिए.
वहीं बरेली के एक मौलाना ने वक्फ बिल के समर्थन में बयान दिया है. मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने बयान दिया इन्होंने अपना समर्थन दिया और कहा कि यह बिल फायदेमंद साबित होगा क्योंकि अभी तक वक्फ बोर्ड और माफिया मिलकर देश की कीमती जमीनों पर कब्जा कर लेते थे. उस पर शॉपिंग मॉल बना लेते थे लेकिन इस बिल के पास होते ही यह सब बंद हो जाएगा. इस संपत्ति से होने वाली आय मुसलमान के हित में खर्च की जाएगी. किसी भी दरगाह मस्जिद, मदरसा पर कोई दखल नहीं है.
उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक स्थल किसी भी मुस्लिम संपत्ति पर सरकार का कोई कब्जा नहीं है. यह सिर्फ बहकाया जा रहा है. यह बिल पास होते ही सभी मुस्लिम धार्मिक स्थल दरगाह मस्जिद का नए रूप में विकास होगा.