महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना उस ऊंट की तरह हो गई है, जो किस करवट बैठेगा किसी को पता नहीं है. हाल के दिनों में शिवसेना ने कांग्रेस को अकेले बीएमसी चुनाव लड़ने को लेकर लताड़ लगाई थी. इतना ही नहीं शिवसेना विधायक प्रताप सरनाईक (Pratap Sarnaik) ने तो मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को एक बार फिर से बीजेपी के साथ समझौता तक करने का सुझाव दिया था. हालांकि महा विकास अघाड़ी (शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी) की तरफ से यही कहा गया कि सब कुछ ठीक है. इस झगड़े को एक बार फिर से हवा मिली जब प्रशांत किशोर के साथ शरद पवार की बैठक में शिवसेना को शामिल नहीं किया गया.
एनसीपी (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) प्रमुख शरद पवार ने इस बैठक को लेकर कहा कि यह सभी विपक्षी दलों की बैठक नहीं थी. बैठक को लेकर कहा गया कि महाराष्ट्र की तर्ज पर सेंटर में भी बीजेपी सरकार को चुनौती देने पर विचार किया जा रहा है. वहीं इस बैठक से अलग रहने वाली शिवसेना ने एक बार फिर से लोगों को चौंका दिया है. शिवसेना ने अपने विधायक प्रताप सरनाईक को ममता बनर्जी से सीख लेने की सलाह दी है. पार्टी की तरफ से कहा गया है कि अगर विधायक को लगता है कि उन्हें ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) या अन्य केंद्रीय एजेंसियों के जरिए परेशान किया जा रहा है तो उन्हें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तरह इसका सामना करना चाहिए.
इससे पहले रविवार को शिवसेना विधायक प्रताप सरनाईक की तरफ से महाराष्ट्र सीएम उद्धव ठाकरे एक पत्र लिखा गया. उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है महा विकास अघाड़ी का मुख्य मकसद बस NCP और कांग्रेस को बड़ा करना है. सरनाईक ने पत्र में लिखा है कि बेहतर होगा अगर शिवसेना पीएम मोदी के नेतृत्व में फिर से लौट चले. ठाणे से विधायक प्रताप सरनाईक ने पत्र में आगे बीएमसी और ठाणे नगर निगम चुनावों का जिक्र करते हुए कहा है कि अगर शिवसेना वापस बीजेपी के साथ जाती है, तो यह उसके लिए अच्छा होगा.
बता दें, प्रताप सरनाईक के खिलाफ दो मामलों में ईडी की जांच चल रही है. हाल ही में बीजेपी ने प्रताप सरनाईक को घेरने के लिए प्रदेश बीजेपी ने कैंपेन तक चलाया था. आरोप लगाया था कि विधायक पिछले 100 दिनों से क्षेत्र से गायब हैं. उद्धव ठाकरे को जो पत्र प्रताप सरनाईक ने लिखा है, उसके मुताबिक, 'मेरा निजी मत है कि पीएम मोदी के साथ जाना ठीक रहेगा. कई लोगों को लगता है कि ऐसा करने से मुझे और बाकी साथियों को सेंट्रल एजेंसियों द्वारा बेवजह परेशान नहीं किया जाएगा.'
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शिवसेना ने अपने मुखपत्र 'सामना' में ममता बनर्जी की प्रशंसा करते हुए लिखा कि केंद्रीय एजेंसियां उन लोगों के खिलाफ जांच करने से बच रही है जिसने बीजेपी का दामन थाम लिया है, जैसे कि शुभेंदु अधिकारी. लेकिन वैसे लोग जो बीजेपी के साथ नहीं हैं उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है. पश्चिम बंगाल की तरह ही महाराष्ट्र में भी उत्पीड़न नीति चलाया जा रहा है. शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस को बिना कारण परेशान किया जा रहा है.
संपादकीय में आगे लिखा गया है कि किसी को भी इस तरह के उत्पीड़न के खिलाफ लड़ाई नहीं छोड़नी है. अगर आप खुद को शिवाजी का अनुयायी मानते हैं तो आपको इसके बारे में सोचना चाहिए. कुल मिलाकर संपादकीय में प्रताप सरनाईक द्वारा लिखी गई चिट्ठी का जवाब देते हुए केंद्रीय एजेंसियों का मुकाबला करने की सलाह दी गई है.
संपादकीय में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पीएम मोदी-सीएम उद्धव ठाकरे के बीच हुई बैठक में कोई खास बातचीत नहीं हुई है. लोकतांत्रिक व्यवस्था में पीएम देश का सर्वोच्च नेता होता है. लेकिन अगर कोई इस बैठक के अलग मतलब निकालता है तो उसे अपरिपक्व ही कहा जा सकता है. संपादकीय में यह स्पष्ट किया गया है कि महा विकास अघाड़ी गठबंधन में कुछ भी गड़बड़ नहीं है और अब लोगों को केंद्र में भी इस तरह के प्रयोग का इंतजार है.