कांग्रेस के दिग्गज नेता और केरल के तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने जॉर्ज सोरोस को लेकर सफाई दी है. थरूर ने कहा है कि उन्होंने अमेरिकी कारोबारी और निवेशक जॉर्ज सोरोस या उनकी किसी भी संस्था से कभी भी एक पैसा नहीं लिया है.
थरूर ने यह सफाई इसलिए दी है क्योंकि उनके एक 15 साल पुराने ट्वीट का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर वायरल हो रहा है. 26 मई 2009 को किए गए इस ट्वीट में शशि थरूर लिखते हैं,'अपने पुराने दोस्त जॉर्ज सोरोस से मिला. वह भारत को लेकर काफी उत्साहित नजर आए और पड़ोसियों को लेकर उनके मन में जिज्ञासा थी. वह एक निवेशक से कहीं ज्यादा आगे हैं. सोरोस विश्व के एक चिंतित नागरिक हैं.'
कांग्रेस पर हमलावर है बीजेपी
दरअसल, जॉर्ज सोरोस को लेकर इन दिनों भारत की सियासत गरमाई हुई है. बीजेपी आरोप लगा रही है कि विपक्षी पार्टी के जॉर्ज सोरोस के साथ अच्छे संबंध हैं और यह अमेरिकी निवेशक भारत की सरकार को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं. इस बीच शशि थरूर का 15 साल पुराना ट्वीट वायरल होने पर वह भी निशाने पर आ गए. लोग उनसे सवाल पूछने लगे कि इस ट्वीट के बारे में उनका क्या खयाल है? इस पर जवाब देते हुए थरूर ने बताया कि वह इस ट्वीट के बाद जॉर्ज सोरोस से सिर्फ एक बार और मिले हैं.
थरूर ने बताया- कैसे हुई पहचान
सोरोस से मुलाकात के बारे में बताते हुए शशि थरूर ने कहा,'इस ट्वीट के बारे में अस्वस्थ जिज्ञासा है. मैं अपने UN के दिनों में न्यूयॉर्क के एक ईमानदार अंतरराष्ट्रीय सोच वाले निवासी के रूप में सोरोस को अच्छी तरह से जानता था. वह सामाजिक अर्थों में एक मित्र थे. मैंने कभी भी उनसे या उनके किसी भी फाउंडेशन से अपने लिए या किसी संस्था या उद्देश्य के लिए एक पैसा नहीं मांगा और न ही लिया.'
'आमंत्रित थे कई और अमेरिकी'
शशि थरूर ने आगे कहा,'इस ट्वीट के बाद मैं सोरोस से केवल एक बार और मिला. वह मुलाकात तत्कालीन राजदूत और अब BJP मंत्री हरदीप सिंह पुरी के घर पर हुई थी. यह तब की बात है, जब मैं विदेश राज्य मंत्री के रूप में न्यूयॉर्क का दौरा कर रहा था. पुरी ने मेरे साथ रात्रिभोज पर चर्चा के लिए कई प्रमुख अमेरिकियों को आमंत्रित किया था (और यह पूरी तरह से उचित था). मैं तब से सोरोस के संपर्क में नहीं हूं. मेरे पुराने संबंधों का कभी कोई राजनीतिक अर्थ नहीं बचा है.'
'संदेह नहीं था कि ऐसा होगा'
कांग्रेस नेता ने कहा,'मुझे उम्मीद है कि इससे उन लोगों को कुछ समझ में आएगा, जो पंद्रह साल पुराने एक बेतुके ट्वीट को लेकर बेतुका आरोप लगा रहे हैं. लेकिन ट्रोल फैक्ट्री कैसे काम करती है. यह जानते हुए भी मुझे कोई संदेह नहीं था कि ऐसा नहीं होगा!'