लोकसभा चुनाव में बीजेपी को सत्ता में आने से रोकने की रणनीति पर चर्चा के लिए पटना में 12 जून को होने वाली विपक्ष दलों की बैठक पर ग्रहण लग गया है. कांग्रेस और डीएमके के अनुरोध पर यह बैठक स्थगित की गई है.राहुल गांधी अभी विदेश यात्रा पर हैं जबकि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और डीएमके प्रमुख और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन अपने-अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के चलते 12 जून की बैठक में शरीक होने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं. इस तरह से विपक्षी दलों के मुखियाओं की 'डेट्स' नहीं मिलने के चलते नीतीश की महाजुटान का मुहूर्त एक बार फिर टल गया है.
तीसरी बार विपक्षी एकता की बैठक टली
विपक्षी एकता की बैठक तीसरी बार टली है. पहली बैठक 19 मई को होनी थी, लेकिन कर्नाटक विधानसभा चुनाव और वहां पर कांग्रेस सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के चलते विपक्षी दलों की बैठक टाल दी गई. इसके बाद मई के आखिरी सप्ताह में बैठक होनी थी, लेकिन वो भी नहीं हो पाई. नीतीश कुमार ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के साथ मुलाकात के बाद 12 जून को पटना में बैठक की रूप रेखा बनी थी. 12 तारीख को लेकर सभी विपक्षी दलों ने सहमति भी जता दी थी, लेकिन कांग्रेस नेता राहुल गांधी और एमके स्टालिन उस तारीख को पटना आने में असमर्थ थे.
#WATCH | Opposition meeting to be held on June 12 has been postponed. Heads of all political parties were supposed to come to the meeting, it's not right if any other representative will come. So we've asked Congress party that the head of the party should come. New date of the… pic.twitter.com/Tg5kh63Isj
— ANI (@ANI) June 5, 2023
तमिलनाडू सरकार डीएमके के संस्थापक एम करुणानिधि की शतवार्षिकी पर साल भर के लिए समारोह का आयोजन कर रही है. 12 जून को इसी से संबंधित एक बड़े समारोह में स्टालिन को अपने राज्य में ही रहना है. राहुल गांधी के अमेरिका में होने के चलते कांग्रेस की ओर उनके के बदले कोई राष्ट्रीय महासचिव शामिल होने का अग्रह किया गया था, जिसको नीतीश कुमार ने स्वीकार नहीं किया और बैठक को स्थागित कर आगे बढ़ा दिया है.
नीतीश बैठक में किसे बुलाना चाहते हैं
मिशन-2024 में विपक्षी दलों को एकजुट करने की मुहिम में जुटे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि 12 जून को विपक्षी दलों की बैठक फिलहाल के लिए स्थागित कर दी गई है, क्योंकि हम चाहते है कि सभी पार्टियों के प्रमुखों को शामिल हों. ये सही नहीं होगा कि बैठक में पार्टी के अध्यक्ष के बजाय उनका कोई प्रतिनिधि शामिल हो. हमने कांग्रेस को भी कहा है कि आपस में बात कर तय कर लीजिए, उसके बाद जो भी तारीख तय होगी, उस दिन बैठक होगी, लेकिन सभी पार्टियों के प्रमुख शामिल हों.
नीतीश कुमार ने कहा कि विपक्षी के ज्यादातर दलों के प्रमुखों ने 12 जून की बैठक में शामिल होने के लिए अपनी स्वीकृति दे दी थी, लेकिन दो से तीन दल की कुछ दिक्कतें थी. इसीलिए 12 की बैठक को स्थागित कर दिया गया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार किसी भी हाल में इस बैठक को करना चाहते हैं. सभी पार्टियों की सहमति भी है, लेकिन एक-दो अड़चन की वजह से लगातार यह बैठक स्थगित होती रही है. राहुल गांधी अमेरिका में हैं जबकि एमके स्टालिन पार्टी के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम में व्यस्त हैं. नीतीश ने साफ तौर पर कहा कि सभी विपक्षी दलों के मुखिया बैठक में शामिल हों.
अखिलेश-ममता बनर्जी रजामंद थे
नीतीश कुमार ने ममता बनर्जी की बात मानते हुए पटना में विपक्षी दलों की बैठक तो बुला ली है, लेकिन कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे और राहुल गांधी के बैठक में शामिल होने से पीछे हट गए. नीतीश कुमार की विपक्षी एकता की बैठक में सपा प्रमुख अखिलेश यादव, टीएमसी ममता बनर्जी और आप नेता अरविंद केजरीवाल अपनी स्वीकृति दे दी थी. ममता ने वीडियो जारी करते हुए कहा कि पटना में होने वाली विपक्ष की एकता की बैठक से हिंदी बेल्ट में बेहतर असर होगा तो सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी अपनी रजामंदी दे दी थी.
खड़गे और राहुल गांधी कब देंगे तारीख
हालांकि, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और एमके स्टालिन के चलते ऐन मौके पर एक सप्ताह पहले इस बैठक को फिर से टाल दिया गया है.नीतीश कुमार ने साफ शब्दों में कह दिया है कि सभी पार्टियों के अध्यक्षों को शामिल होना होगा. राहुल गांधी के अमेरिका से लौटने के बाद कांग्रेस नेता सलाह-मशविरा करने के बाद बैठक में शामिल होने पर अपना एजेंडा साफ करेंगे. एमके स्टालिन ने 12 जून को टालने की गुजारिश की थी, लेकिन अगली बैठक की तारीख पर उपस्थित रहेंगे कि नहीं यह अभी साफ नहीं है.
नीतीश के मिशन से इन दलों की दूरी
बसपा अध्यक्ष मायावती ने पहले से ही नीतीश कुमार की विपक्षी एकता से दूरी बना ली है. तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर ने बैठक में आने से मना कर दिया था. ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक ने नीतीश से मुलाकात के बाद ही अपना स्टैंड साफ कर दिया था कि वो किसी भी विपक्षी एकता में शिरकत नहीं करेंगे. वहीं, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी खुद को किसी भी गठबंधन के साथ नहीं खड़े होना चाहते हैं. जेडीएस नेता कुमारस्वामी भी विपक्षी एकता से दूरी बनाए हुए जबकि बाकी जो दल नीतीश के साथ है, उनकी तारीख तय नहीं हो पा रही है.
विपक्षी एकता बना पाने में कामयाब होंगे नीतीश
नीतीश कुमार साफ तौर पर कह चुके हैं कि बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस के बिना विपक्षी एकता कतई संभव नहीं है. बिहार का उदाहरण देते हुए कहा था कि जिस तरह बिहार में सभी दल बीजेपी के खिलाफ एकजुट हैं, उसी तरह से देश में भी विपक्षी एकता बननी चाहिए. इस कड़ी में उन्होंने देशभर के तमाम विपक्षी दलों के नेताओं के साथ मुलाकात कर विपक्षी एकता का तानाबाना बुन रहे हैं, जिसके लिए उन्होंने पटना में बैठक बुलाई थी ताकि एक बड़ा सियासी संदेश दिया जा सके, लेकिन कई विपक्षी के प्रमुखों के कदम पीछे खींच लेने और खुद की जगह अपना प्रतिनिधि भेजने के प्रस्ताव को नीतीश ने स्वीकार नहीं किया है. ऐसे में देखना है कि नीतीश कुमार की विपक्षी एकता की कवायद क्या सियासी रंग लाती है?