संसद के 14 सितंबर को शुरू होने वाले मॉनसून सत्र से पहले ही सत्ता पक्ष और विपक्ष में ठन गई है. मुद्दा है प्रश्नकाल को न रखे जाना. 1952 के बाद ये पहला मौका है जब संसद के नियमित सत्र में प्रश्नकाल नहीं रखा गया है. कई बार असाधारण परिस्थितियों में विशेष सत्र बुलाने पर प्रश्नकाल नहीं रखा गया लेकिन नियमित सत्र के दौरान ऐसा पहले कभी नहीं हुआ.
इस मुद्दे पर कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, आरजेडी समेत कई विपक्षी पार्टी एकजुट हैं. उनका कहना है कि “ये सांसदों के मूल अधिकारों का हनन है, सरकार से प्रश्न पूछना हमारा अधिकार है. हम जनता की तरफ से यह सवाल पूछते हैं. ऐसा पहली बार हो रहा है कि प्रश्नकाल नहीं रखा जा रहा.”
विपक्षी पार्टियों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू से अपील की है कि इस फैसले पर दोबारा विचार किया जाए. दरअसल, कोरोना महामारी को देखते हुए सत्र के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल को देखते हुए कई फैसले किए गए हैं. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू की ओर से सत्र के संचालन को लेकर गृह मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय के बीच कई दौर की बैठक हुई.
लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने भी मॉनसून सत्र में प्रश्नकाल स्थगित किए जाने को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक पत्र लिखा है, उनका कहना है कि प्रश्नकाल स्थगित किया जाना ठीक नहीं है, अगर संसद सत्र में प्रश्नकाल नहीं होगा तो ऐसे सत्र का औचित्य ही क्या है.
तृणमूल कांग्रेस भी प्रश्नकाल स्थगित किए जाने के फैसले से खुश नहीं है. पार्टी की ओर से डेरेक ओ ब्रायन और दिनेश त्रिवेदी ने इस मुद्दे पर नाराजगी जताई है. उनका कहना है कि नियमित सत्र के दौरान प्रश्नकाल नहीं रखे जाना, ये पहली बार होने जा रहा है जो कि गलत है. दिनेश त्रिवेदी ने तो कहा, “हम उन लोगों के सवाल पूछते हैं जो जनता हमें चुनकर भेजती है. वह हमारा हक हमसे छीना जा रहा है."
इस मुद्दे पर राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा का कहना है, “संसदीय लोकतंत्र के लिए इससे ज्यादा अशुभ और खतरनाक कुछ नहीं हो सकता. अगर प्रश्नकाल नहीं होगा तो संसदीय लोकतंत्र की आत्मा मर जाएगी. देश में लोगों के सरोकार से जुड़े इस वक्त कई सवाल हैं. कोरोना की वजह से लोगों की जानें जा रही है, यह सवाल तो पूछना ही पड़ेगा. सरहद के हालात पर क्या सवाल ना पूछे जाएं. कुप्रबंधन को लेकर क्या सवाल ना पूछे जाएं.यह हर एक सदस्य का संसदीय अधिकार है कि वह सवाल पूछे.”
मनोज झा ने आरोप लगाया कि प्रश्नकाल खत्म करना संसदीय जड़ों को खत्म करने का पूरा प्लान है. विपक्ष देश के आर्थिक हालात को लेकर भी सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है. इसके अलावा चीन के साथ सरहद पर तनाव और कोरोना वायरस को लेकर देश के पूरी दुनिया में इपिसेंटर बनने पर भी विपक्ष सरकार से तीखे सवाल करने के लिए कमर कस रहा है.
मॉनसून सत्र 14 सितंबर से 1 अक्टूबर तक चलेगा
संसद का मॉनसून सत्र 14 सितंबर से 1 अक्टूबर तक चलेगा. इसमें कोविड-19 सुरक्षा प्रोटोकॉल का खासा ध्यान रखा गया है. इस सत्र के दौरान कोई भी छुट्टी नहीं होगी यानि ब्रेकलेस सेशन होगा. 14 सितंबर से 1 अक्टूबर तक कुल 18 बैठकें होंगी. लोकसभा की कार्रवाई 14 सितंबर को पहले दिन सुबह 9:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक चलेगी. 15 सितंबर से 1 अक्टूबर तक दोपहर 3:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक लोकसभा के सदन की बैठक होगी.
इसी प्रकार राज्यसभा की कार्यवाही भी 14 सितंबर को दोपहर को 3:00 बजे से शाम 7:00 बजे होगी. लेकिन 15 सितंबर से 1 अक्टूबर तक ऊपरी सदन की बैठक सुबह 9:00 बजे से 1:00 बजे तक रहेगी.
सत्र के दौरान सांसदों के निजी स्टाफ को आने की अनुमति नहीं होगी. दूसरे विजिटर्स भी इस बार संसद के भीतर नहीं आ पाएंगे. मीडिया की एंट्री को लेकर भी नए नियम आने वाले हैं. बहुत सीमित संख्या में मीडियाकर्मियों को इस दौरान अनुमति दी जाएगी.