आज (19 जुलाई) से मॉनसून सत्र (Monsoon Session) की शुरुआत होने जा रही है. इस सत्र में मोदी सरकार का स्वरूप बदला-बदला है क्योंकि मंत्रिमंडल में नए चेहरे शामिल किए गए हैं. कई मंत्रियों की जिम्मेदारी भी बदली गई है. ऐसे में मंत्रियों के सामने विपक्ष के सवालों का सामना करने की बड़ी चुनौती होगी.
विपक्षी दल सरकार को कोरोना की दूसरी लहर के दौरान मिस मैनेजमेंट, किसान आंदोलन, महंगाई, बेरोजगारी, पेट्रोल-डीजल के लगातार बढ़ते दाम और चीन के साथ सीमा पर गतिरोध जैसे मुद्दों पर घेरने की तैयारी में हैं.
हालांकि, सत्र की शुरुआत से पहले विपक्ष की मंशा भांप सरकार की ओर से सर्वदलीय बैठक में यह जरूर कहा गया कि हम सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके बावजूद मॉनसून सत्र का हंगामेदार होना तय माना जा रहा है.
कांग्रेस इन मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में
- कोरोना की भीषण त्रासदी
- पेट्रोल-डीजल की कीमतें
- महंगाई और बेरोजगारी
- कृषि कानून और किसान आंदोलन
- चीन सीमा पर गतिरोध और राफेल
कई विपक्षी दलों के सांसदों ने स्थगन प्रस्ताव दिए हैं और कई मसलों पर चर्चा करने की मांग की गई है. कोरोना मैनेजमेंट, पेट्रोल और डीज़ल के बढ़ते दाम समेत अन्य मसलों पर संसद में चर्चा के लिए नोटिस दिया गया है.
आरजेडी की तरफ से संसद में कोरोना संकट पर चर्चा की मांग की गई है. सांसद मनोज झा ने नोटिस देकर कोरोना से हुई मौतों के आंकड़ों पर चर्चा करने को कहा है.
वहीं, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) द्वारा कई मसलों पर चर्चा कराने की मांग की गई है. इनमें पेट्रोल, डीज़ल के बढ़ते दाम, कृषि कानून, वैक्सीनेशन, अर्थव्यवस्था जैसे मसले शामिल हैं.
आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान ने किसानों का मुद्दा उठाया है. उन्होंने लोकसभा में कृषि कानून और किसान आंदोलन का मुद्दा उठाया जाएगा और इस मसले पर नोटिस दिया है.
किसानों के मसले पर हंगामे के आसार
गौरतलब है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने लोकसभा में नेता सदन मल्लिकार्जुन खड़गे को दूसरे विपक्षी दलों को भरोसे में लेने और उनके साथ समन्वय का जिम्मा सौंपा है. हालांकि, सबसे ज्यादा हंगामा किसानों के मुद्दे पर होने के आसार हैं. किसान कई महीनों से आंदोलन कर रहे हैं, कई प्रदर्शनकारी किसानों की जान जा चुकी है. दूसरी तरफ, सरकार का कहना है कि किसानों को लेकर बिजनेस एडवाइजरी कमेटी जो भी फैसला लेगी उसे माना जाएगा.
मॉनसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में विपक्ष से सरकार की मंत्रणा
इधर, किसान संगठनों (Farmers Organisations) ने कृषि कानूनों (Farm Laws) को रद्द करने की मांग को लेकर 22 जुलाई को संसद का घेराव करने का ऐलान किया है, लेकिन दिल्ली पुलिस ने इजाजत नहीं दी है. ऐसे में इस पर भी हंगामा बढ़ सकता है.
कोरोना पर इन सवालों का जवाब जरूरी
1- कोविड की दूसरी लहर के दौरान सरकार के कथित कुप्रबंधन के लिए क्या कैबिनेट फेरबदल में हटाए गए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ही अकेले जिम्मेदार हैं? कुंभ मेले की अनुमति, समय से पहले कोरोना को मात देने का ऐलान कर देना. क्या राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चूक के भागी लोग जिम्मेदार नहीं हैं?
2- क्या जनता को नहीं बताना चाहिए कि केंद्र कैसे दिसंबर अंत तक पूरी वयस्क आबादी को वैक्सीनेट करेगा?
3- बिहार चुनावों में केंद्र ने सभी को मुफ्त वैक्सीन का दावा किया, फिर भी ‘एक देश, एक कीमत’ के लिए सुप्रीम कोर्ट को दखल देना पड़ा. आखिर क्यों?
4- कोरोना से हुई मौतों की संख्या पर भ्रम बड़ा मुद्दा रहा है. क्या कोर्ट की निगरानी में पारदर्शी ऑडिट नहीं होना चाहिए?
5- क्या भारत संभावित तीसरी लहर के लिए तैयार है?