Parliament Budget Session: संसद के मॉनसून सत्र का आज दूसरा दिन था. संसद परिसर में विपक्ष ने महंगाई और जीएसटी की दरों में बढ़ोतरी के चलते विरोध प्रदर्शन किया.
लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई. अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रश्नकाल शुरू किया, जिसमें कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी सासंदों के अहम सवालों के जवाब दे रहे थे.
लेकिन विपक्ष ने मानो यह तय किया हुआ था कि आज वे संसद की कार्यवाही बाधित करके ही रहेंगे. वे लगातार सभा में शोर कर रहे थे, जमकर नारेबाजी की जा रही थी. तख्तियां और प्लेकार्ड लहराए जा रहे थे. यहां तक कि अध्यक्ष की चेयर के पास आकर विपक्ष ने खूब हंगामा किया.
शुरुआती 10 मिनट तक अध्यक्ष ओम बिरला शांति से विपक्ष की नारेबाजियों को अनदेखा करते रहे, और कार्यवाही जारी रखी. लेकिन इसके बाद विपक्षी सांसदों ने इतनी जोर से शोर मचाना शुरू किया कि प्रश्न करने वाले सांसदों की आवाज और जवाब देने वाली मंत्री की आवाज शोर में दबने लगी.
दादा, नियम की किताब पढ़ाओ इनको!'
पानी सर से ऊपर उठा तो, अध्यक्ष ने सांसदों से कहा,'किसानों के समर्थन मूल्य पर सवाल किए जा रहे हैं. क्या आप सवाल नहीं करना चाहते? तख्तियां लेकर आ रहे हैं. उन्होंने विपक्ष के नेता अधार रंजन चौधरी की तरफ रुख करते हुए कहा, 'ये दादा नियमों की किताब लेकर खड़े हैं. नियमों की किताब आपने पढ़ रखी है. दादा, नियम की किताब पढ़ाओ इनको!'
उन्होंने सभा में कहा कि नियम 349 के तहत, सदन में तख्तियां लेकर आना उचित नहीं है. यह परंपरा ठीक नहीं है. आप सदन में मर्यादा और अच्छी परंपराओं का पालन करें. उन्होंने यह भी कहा कि प्रश्नकाल में किसानों के समर्थन मूल्यों को लेकर सवाल किया गया है. आप बाहर जाकर किसानों का बात करते हैं. सदन के अंदर किसानों की बात नहीं करते, बाहर जाकर महंगाई की बात करते हैं, सदन के अंदर बात नहीं करते.
उन्होंने विपक्षी सांसदों से कहा, 'पिछले सत्र में उन्होंने महंगाई पर चर्चा के लिए अनुमति दी थी. लेकिन चर्चा नहीं की गई, ये उचित नहीं है, यह गलत तरीका है. आप सदन में चर्चा नहीं करना चाहते. मैं हर मुद्दे पर चर्चा करने का पर्याप्त समय और मौका देता हूं.'
लेकिन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष की बातों को अनदेखा करते हुए हंगामा जारी रखा. और अध्यक्ष ने कार्यवाही दोपहर तक के लिए स्थगित कर दी.