राज्यसभा के 8 सांसदों के निलंबन के बाद विपक्ष हमलावर हो गया है. तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन समेत 8 सांसदों के निलंबन के मुद्दे पर संसद परिसर में विपक्षी दलों के सांसदों ने विरोध-प्रदर्शन किया. वहीं, निलंबित सांसद परिसर में धरने पर बैठ गए हैं.
संसद परिसर में गांधी मूर्ति के पास ये सांसद धरने पर बैठे हैं. ये सभी सांसद सभापति के फैसले का विरोध कर रहे हैं. लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि हम राज्यसभा के सदस्यों की अलोकतांत्रिक तरीके से निष्कासन की निंदा करते हैं. हम सांसदों के निलंबन का विरोध करते रहेंगे.
बता दें कि कल राज्यसभा में हंगामा, तोड़फोड़ और उपसभापति का अपमान करने के आरोप में 8 सांसदों के खिलाफ आज बड़ा एक्शन हुआ है. 8 सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया है. डेरेक ओ ब्रायन, संजय सिंह, राजीव साटव, केके रागेश, रिपुन बोरा, डोला सेन और ए करीम को संस्पेंड किया गया है. वहीं, विपक्ष का उपसभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी खारिज हो गया.
सभापति ने क्या कहा
सभापति एम.वेंकैया नायडू ने सोमवार को सदन की कार्यवाही के दौरान कहा कि कल का दिन राज्यसभा के लिए बहुत खराब दिन था. कुछ सदस्य सदन के वेल तक आ गए. उपसभापति के साथ धक्कामुक्की की गई. कुछ सांसदों ने पेपर को फेंका. माइक को तोड़ दिया. रूल बुक को फेंका गया. सभापति ने कहा कि इस घटना से मैं बेहद दुखी हूं. उपसभापति को धमकी दी गई. उनपर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई.
निलंबन के बाद भी सदन में रहे सांसद
निलंबित होने वाले आठों सांसद सदन से बाहर नहीं जाने पर अड़े रहे. निलंबित सांसदों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की. वह वेल तक पहुंच गए. हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही को बार-बार स्थगित करना पड़ा. राज्यसभा के उपसभापति ने कहा कि विपक्ष के नेता को किसी भी बिल पर बोलने की इजाजत है, लेकिन निलंबित सांसदों को नियम 256 के तहत सदन से बाहर जाना होगा. उपसभापति के आदेश के बावजूद निलंबित सांसद सदन में मौजूद रहे.