लोक जनशक्ति पार्टी दो गुटों में बंट गई है. पशुपति पारस और सांसदों की बगावत के बाद चिराग पासवान बैकफुट पर आ गए हैं और वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहे हैं. सियासी संकट में घिरे चिराग ने कहा कि परिवार ने मेरी पीठ में छुरा घोंपा है तो बीजेपी ने मंझधार में छोड़ दिया. ऐसे में चिराग ने बीजेपी शीर्ष नेतृत्व को याद दिलाया कि बिहार में जब नीतीश कुमार ने उनका साथ छोड़ दिया था तब उनकी पार्टी एलजेपी मजबूती के साथ एनडीए के साथ खड़ी थी.
उन्होंने एक बार फिर से पीएम मोदी को याद दिलाते हुए कहा कि मैंने हनुमान की तरह हर मुश्किल दौर में उनका साथ दिया. आज जब हनुमान का राजनीतिक वध करने का प्रयास किया जा रहा है तो मैं ये विश्वास करता हूं कि राम ये सब खामोशी से नहीं देखेंगे.
चिराग पासवान ने कहा है कि सीएए, एनआरसी समेत सभी फैसलों में मैं बीजेपी के साथ खड़ा रहा हूं. वहीं नीतीश कुमार इससे असहमत थे. अब बीजेपी को तय करना है कि आने वाले दिनों में वे मेरा समर्थन करेंगे या नीतीश कुमार का.
वहीं लोजपा नेता चिराग पासवान ने कहा है कि मेरे पिताजी (स्वर्गीय रामविलास पासवान) और लालू यादव काफी घनिष्ठ मित्र रहे हैं. मैं और तेजस्वी यादव एक दूसरे को बचपन से ही जानते हैं और हम लोग काफी अच्छे दोस्त हैं. तेजस्वी मेरे छोटे भाई के समान हैं. बिहार में जब चुनाव का समय आएगा तब पार्टी आरजेडी के साथ गठबंधन को लेकर अंतिम फैसला लेगी.
पशुपति पारस को एलजेपी संसदीय दल का नेता चुने जाने को लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने जिस तरह तुरंत सहमति दी है, उसे लेकर चिराग पासवान ने शनिवार को स्पीकर से मुलाकत की थी. उन्होंने कहा कि स्पीकर से मैंने कहा था कि यह निर्णय लेने से पहले उन्हें कम से कम मुझसे बात करनी चाहिए थी. यहां तक कि संसद की नियम पुस्तिका भी इसे बहुत स्पष्ट रूप से परिभाषित करती है, कि संसदीय दल के नेता को पार्टी द्वारा तय किया जाना है, सदस्यों द्वारा नहीं. साथ ही चिराग ने कहा कि इस बात पर भरोसा करना बेहद मुश्किल है कि एलजेपी में हुई इस बगावत का बीजेपी के बड़े नेताओं को पता नहीं रहा होगा.
जाहिर है पीएम मोदी को राम बताकर चिराग अपनी पार्टी में ही राजनीतिक हैसियत बचाने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि बीजेपी से वो नाराज भी हैं. शायद यही वजह है कि वह तेजस्वी यादव को अपना छोटा भाई बता रहे हैं और भविष्य के चिराग पासवान की राजनीतिक हैसियत बनाने की रणनीति पर काम करना शुरू भी कर दिया है.
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चिराग को साथ लाने में जुटी RJD
LJP में टूट के बाद से RJD अलग-थलग पड़े चिराग पासवान को अपने साथ लाने की कवायद में जुट गई है. आरजेडी ने तय किया है कि 5 जुलाई को उनकी पार्टी रामविलास पासवान की जयंती मनाएगी. 5 जुलाई की तारीख आरजेडी के लिए भी खास है. वो इसलिए क्योंकि इस दिन आरजेडी का 25वां स्थापना दिवस है. इसी दिन रामविलास पासवान का भी जन्मदिन है, इसलिए आरजेडी ने फैसला किया है कि स्थापना दिवस के कार्यक्रम से पहले रामविलास पासवान की जयंती का कार्यक्रम बनाया जाएगा. सूत्रों की मानें तो आरजेडी रामविलास पासवान की जयंती मनाकर चिराग को अपने खेमे में लाने की कोशिश कर रही है.
इससे पहले आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने चिराग पासवान को साथ आने का ऑफर दिया था. साथ ही उन्होंने याद दिलाते हुए कहा कि कैसे लालू यादव ने 2010 में रामविलास पासवान को राज्यसभा भेजने में मदद की थी जब एलजेपी के पास कोई सांसद और विधायक नहीं थे.