राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्यसभा में विपक्ष पर जमकर बरसे. लगभग 85 मिनट के संबोधन में पीएम मोदी ने नेहरू-गांधी फैमिली, अनुच्छेद 356, नौकरी-बेरोजगार जैसे मुद्दों को उठाया.
पीएम मोदी ने अपने भाषण को समेटते हुए कहा कि जिन्हें सत्ता के अलावा कुछ नहीं दिखता है उन्होंने अर्थ नीति को अनर्थ नीति में तब्दील कर दिया है. मैं उन्हें चेतावनी देना चाहता हूं मैं इस सदन की गंभीरता के साथ उनसे कहना चाहता हूं अपने अपने राज्यों में जाकर समझाएं कि ये गलत रास्ते पर न चले जाएं, पड़ोस के देशों का हाल देख रहे हैं, अनाप-शनाप कर्जे लेकर क्या हाल कर दिया है.
कर्जे ले लिया जाए, भुगतान आने वाली पीढ़ी करेगी
पीएम मोदी ने कहा कि इनकी सोच है कि कर्जे ले लिया जाए, भुगतान आने वाली पीढ़ी करेगी. कर्ज करो घी पीओ ये सोचने वाले राज्य को तो तबाह करेंगे ही देश को भी बर्बाद कर देंगे. पड़ोसी देशों को देखिए, दुनिया में उन्हें कोई कर्ज देने के लिए तैयार नहीं हैं, ये मुसीबतों से गुजर रहे हैं. दलों के विषय में एक देश की आर्थिक सेहत के साथ खिलवाड़ मत कीजिए. आप ऐसा कोई पाप मत कीजिए जो आपके बच्चों के अधिकारों को छीन लें.
एक अकेला कितनों पर भारी पड़ रहा है
विपक्ष की नारेबाजी के बीच पीएम मोदी मोदी ने कहा कि हमने सामाजिक न्याय, दो वक्त की रोटी जैसी समस्याओं का समाधान निकाला है, आपने इसका समाधान नहीं निकाला था. हम आजाद भारत के सपनों को पूरा करने के लिए संकल्पबद्ध होकर चले हैं. विपक्ष को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने सीना ठोकते हुए कहा कि सभापति जी देश देख रहा है एक अकेला कितनों पर भारी पड़ रहा है... एक अकेला कितनों को भारी पड़ रहा है. नारे बोलने के लिए भी इनको (सांसदों को) बदलना पड़ता है. दो मिनट ये बोलता है. इधर घंटे भर से आवाज दबी नहीं है.
पीएम मोदी ने कहा कि आदरणीय सभापति जी ये कनविक्शन के कारण चला हुआ है. देश के लिए जीता हूं. देश के लिए कुछ करने के लिए निकला हूं. और इसलिए ये राजनीतिक खेल खेलने वाले लोग उनके अंदर ये हौसला नहीं है वे बचने का रास्ता खोज रहे हैं.
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कीचड़ उसके पास था मेरे पास गुलाल
इससे पहले पीएम मोदी ने कहा कि यह सदन राज्यों का सदन है, बीते दशकों में अनेक बुद्धिजीवियों ने सदन से देश को दिशा दी. सदन में ऐसे लोग भी बैठे हैं जिन्होंने अपने जीवन में कई सिद्धियां प्राप्त की है. सदन में होने वाली बातों को देश गंभीरता से सुनता और लेता है. लेकिन यह दूर्भाग्यपूर्ण है कि सदन में कुछ लोगों का व्यवहार और वाणी न सिर्फ सदन को बल्कि देश को निराश करने वाली है.
विपक्ष की लगातार नारेबाजी के बीच पीएम मोदी ने कहा कि इस प्रकार की प्रवृति के माननीय सदस्यों को मैं यही कहूंगा कि 'कीचड़ उसके पास था मेरे पास गुलाल... जो भी जिसके पास था उसने दिया उछाल'. अच्छा ही है जितना कीचड़ उछालोगे कमल उतना ही ज़्यादा खिलेगा. इसलिए कमल खिलाने में आपका प्रत्यक्ष-परोक्ष जो भी योगदान है उसके लिए मैं आभार व्यक्त करता हूं.
...उनका नाम है श्रीमती इंदिरा गांधी
केंद्र की सत्ता के दुरुपयोग के आरोपों का जवाब देते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि इतिहास उठा कर देख लिजिए कि वे कौन सी पार्टी थी जिन्होंने आर्टिकल 356 का सबसे ज्यादा दुरुपयोग किया. 90 बार चुनी हुई सरकारों को गिरा दिया एक प्रधानमंत्री ने आर्टिकल 356 का 50 बार उपयोग किया, उनका नाम है श्रीमती इंदिरा गांधी.
नेहरू सरनेम रखने से क्या शर्मिंदगी है
गांधी-नेहरू परिवार को निशाने पर लेते हुए पीएम मोदी ने कहा कि किसी अखबार में पढ़ा था कि 600 सरकारी योजनाएं गांधी-नेहरू परिवार के नाम पर है. मैं उसको तो वैरिफाई नहीं कर रहा हूं. सभापति जी अगर किसी कार्यक्रम में अगर नेहरू जी के नाम उल्लेख ना हुआ तो कुछ लोगों के बाल खड़े हो जाते हैं. उनका लहू गरम हो जाता है. लेकिन मुझे ये समझ में नहीं आता है कि उनकी पीढ़ी का कोई व्यक्ति नेहरू सरनेम रखने से डरता क्यों है? क्या शर्मिंदगी है? नेहरू सरनेम रखने से क्या शर्मिंदगी है. इतना बड़ा महान व्यक्ति अगर आपको मंजूर नहीं है, परिवार को मंजूर नहीं है और हमारा हिसाब मांगते रहते हैं. कुछ लोगों को समझना होगा ये सदियों पुराना देश सामान्य मानवी की पसीनों से बना देश है, ये देश किसी परिवार की जागीर नहीं है.